इस मंदिर मे फल फूल नहीं बल्कि चढ़ाया जाता है अंडा, मनोकामना पूर्ति के लिए करते है होश उड़ाने वाला काम

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भारत कई आस्थाओं का गढ़ माना जाता है यहां आस्था के नाम पर सब सम्भव है। दरअसल आज हम ऐसे मंदिर की आस्था के बारे में बताने जा रहें हैं जिसे जान आपके होश उड़ जाएंगे।

Eggs Are Not Offered In This Temple :

क्योंकि हम बात कर रहें हैं फीरोजाबाद शहर से करीब आठ किमी दूर मटसेना रोड पर बिलहना गांव में नगरसेन बाबा के विख्यात मंदिर की, जहां की परम्परा के बारे आपके होश उड़ जाएंगे।

मारे जातें हैं अंडे 

यह अद्भुत मंदिर उत्तर प्रदेश के जिरोजाबाद शहर में है, जहां भक्तों द्वारा अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए दीवार पर अंडे मारे जाते हैं। सुन कर अजीब जरूर लग रहा होगा लेकिन यह हकीकत है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हर साल बैशाख माह यानी अप्रैल के महीने यहां एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।

इस मेले के दौरान भक्त अपने पूजा के थाल के साथ अंडे भी लेकर आते हैं और मंदिर के अंदर दीवार और मंदिर के देवता जो कोई बाबा बताए जाते हैं उनपर फेंकते हैं। यह मंदिर बाबा नगर सेन का बताया जाता है। यहां मन्नत मांगने और पूरी होने पर अंडा फेंकने की परंपरा है।

ऐसे हुई मंदिर की स्थापना 

मंदिर की स्थापना के संबंध में मेला कमेटी पदाधिकारी पूर्व प्रधान जगन्नाथ दिवाकर एवं पुजारी विनोद कुमार के अनुसार उनके पूर्वज दयाराम और रामदयाल लगभग सौ वर्ष पूर्व मंदिर का निर्माण कराया था। उनका बच्चा बीमार हो गया था, तब उन्होंने बच्चा ठीक होने की नगरसेन बाबा से मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरी होने पर पूर्वजों ने मंदिर की स्थापना कराई गई।

 

 

भारत कई आस्थाओं का गढ़ माना जाता है यहां आस्था के नाम पर सब सम्भव है। दरअसल आज हम ऐसे मंदिर की आस्था के बारे में बताने जा रहें हैं जिसे जान आपके होश उड़ जाएंगे। क्योंकि हम बात कर रहें हैं फीरोजाबाद शहर से करीब आठ किमी दूर मटसेना रोड पर बिलहना गांव में नगरसेन बाबा के विख्यात मंदिर की, जहां की परम्परा के बारे आपके होश उड़ जाएंगे।

मारे जातें हैं अंडे 

यह अद्भुत मंदिर उत्तर प्रदेश के जिरोजाबाद शहर में है, जहां भक्तों द्वारा अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए दीवार पर अंडे मारे जाते हैं। सुन कर अजीब जरूर लग रहा होगा लेकिन यह हकीकत है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हर साल बैशाख माह यानी अप्रैल के महीने यहां एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले के दौरान भक्त अपने पूजा के थाल के साथ अंडे भी लेकर आते हैं और मंदिर के अंदर दीवार और मंदिर के देवता जो कोई बाबा बताए जाते हैं उनपर फेंकते हैं। यह मंदिर बाबा नगर सेन का बताया जाता है। यहां मन्नत मांगने और पूरी होने पर अंडा फेंकने की परंपरा है।

ऐसे हुई मंदिर की स्थापना 

मंदिर की स्थापना के संबंध में मेला कमेटी पदाधिकारी पूर्व प्रधान जगन्नाथ दिवाकर एवं पुजारी विनोद कुमार के अनुसार उनके पूर्वज दयाराम और रामदयाल लगभग सौ वर्ष पूर्व मंदिर का निर्माण कराया था। उनका बच्चा बीमार हो गया था, तब उन्होंने बच्चा ठीक होने की नगरसेन बाबा से मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरी होने पर पूर्वजों ने मंदिर की स्थापना कराई गई।