यूपी बोर्ड परीक्षा 2017 के कार्यक्रम के आड़े आया निर्वाचन आयोग

लखनऊ। यूपी विधानसभा के आगामी चुनावों और यूपी बोर्ड द्वारा आयोजित करवाई जाने वाली 10वीं और 12वीं की परीक्षा के कार्यक्रम को लेकर अभीतक कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है। यूपी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से गुरुवार को जानकारी मिली थी कि बोर्ड 16 फरवरी से 20 मार्च के मध्य करवाई जाएंगी। इस खबर के सार्वजनिक होने के कुछ समय बाद यूपी निर्वाचन आयोग की ओर से बोर्ड द्वारा तय कार्यक्रम पर आपत्ति दर्ज करवा दी गई। जिसके बाद एकबार फिर बोर्ड परीक्षाओं के टलने की स्थिति बनती नजर आ रही है।




निर्वाचन आयोग की ओर 8 दिसंबर को जारी की गई एक प्रेस रिलीज के मुताबिक पांच राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल मार्च तक पूरा हो रहा है। संविधान के अनुसार वर्तमान ​विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने से पहले नई विधानसभा के गठन के लिए चुनाव करवाना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है। निर्वाचन आयोग अपनी जिम्मेदारी को पूरा कर सके इसके लिए संविधान अनुच्छेद 172(1) के तहत निर्वाचन आयोग को कुछ अधिकार मिले हैं। रिपर्जेन्टेशन आॅफ पीपुल्स एक्ट 1951 के सेक्शन 15 का हवाला देते हुए आयोग ने कहा है कि आयोग को जिम्मेदारी मिली है कि वह कार्यकाल पूरा कर रही विधानसभा के खत्म होने से छह महीने पहले कभी भी चुनावों का अयोजन कर सकती है।

आयोग की ओर से कहा गया है​ कि चूंकि देश के पांच राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल लगभग एक साथ समाप्त हो रहा है इन परिस्थितियों को देखते हुए आयोग पांचों राज्यों में एक साथ चुनावों की प्रक्रिया तैयार करने में लगा है। निर्वाचन आयोग का दायित्व बनता है कि वह 2017 की पहली छहमाही के दौरान पांचों राज्यों में चुनाव की प्रक्रिया को पूरा करवा दे। ऐसे में निर्वाचन आयोग नहीं चाहता कि चुनाव और वार्षिक परीक्षाओं का कार्यक्रम एक दूसरे की प्रक्रिया के आड़े आए।

राज्य की निर्वाचन प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए यूपी माध्यमिक परीक्षा बोर्ड को ये बात ध्यान में रखनी चाहिए थी कि वह बोर्ड की वार्षिक परीक्षा का कार्यक्रम तैयार करने से पहले निर्वाचन आयोग से सलाह लेती। निर्वाचन आयोग ने चुनावों में जाने को तैयार पांचों राज्य सरकारों को सलाह दी है कि वे बोर्ड परीक्षा आयोजक संस्थाओं को निर्देश दें कि बिना निर्वाचन आयोग की सलाह के कोई परीक्षा कार्यक्रम तैयार न करें।

आपको बता दें कि पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड की विधानसभाओं को कार्यकाल वर्ष मार्च 2017 में पूरा हो रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश की वर्तमान विधानसभा मई 2017 में अपना कार्यकाल पूरा कर रही है। निर्वाचन आयोग पांचों राज्यों में एक साथ ​चुनाव करवाने की योजना तैयार कर रहा है। उम्मीद की जा रही है कि निर्वाचन आयोग जनवरी के प्रथम सप्ताह से लेकर 15 जनवरी तक पांचों राज्यों के ​चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार ​संहिता लागू कर सकता है। जिसके चुनावों के चलते बोर्ड परीक्षाओं का कार्यक्रम मार्च में आने वाले विधानसभा चुनावों के परिणामों के तुरंत बाद घोषित किया जाएगा। वहीं कयास ऐसे भी लगाए जा रहे हैं कि चुनाव आयोग अपने कार्यक्रम को मार्च तक लंबित रखते हुए राज्य बोर्ड की परीक्षाओं को पहले करवाने की योजना को भी अमल में ला सकता है। दोनों ही परिस्थितियों में निर्वाचन आयोग का फैसला अहम प्रतीत हो रहा है।