पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा पर चुनाव आयोग की कार्रवाई, बांकुरा डीएम को हटाया गया

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कोलकता। लोकसभा चुनाव 2019 के छठे चरण में पश्चिम बंगाल के बांकुरा में मतदान के दौरान हुई हिंसा के मामले में चुनाव आयोग ने कड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने बांकुरा के डीएम को हटा दिया है। बता दें कि रविवार को बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने बांकुरा में चुनाव के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली में चुनाव आयोग से शिकायत की थी।

Election Commission Removes Bankura Dm From His Post With Immediate Effect :

बीजेपी की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी को निर्देश दिया है। चुनाव आयोग ने बांकुरा के जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला निर्वाचन अधिकारी उमा शंकर को पद से हटाकर उनके स्थान पर 2008 बैच आईएएस अधिकारी मुक्ता आर्य को नियुक्त किया।

रविवार को तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प होने के बाद जिलाधिकारी एवं डीईओ शंकर के खिलाफ शिकायतें की गई थी जिसके चलते उनका तबादला किया गया। चुनाव आयोग ने आर्य को तत्काल कार्यभार संभालने के आदेश दिए हैं। बीजेपी ने रविवार को आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के छठे चरण में खुलेआम हिंसा होने दी। बीजेपी ने राज्य के जंगलमहल क्षेत्र के विभिन्न बूथों पर पुनर्मतदान कराने की मांग की।

अधिकारियों ने बताया कि बीजेपी उम्मीदवार और पूर्व आईपीएस अधिकारी भारती घोष घाटल लोकसभा सीट पर जब मतदान केन्द्रों पर जाने का प्रयास कर रही थीं तो उस दौरान स्थानीय लोगों ने दो बार उन पर कथित तौर पर हमला किया। घोष केशपुर क्षेत्र में सुबह एक मतदान केन्द्र के भीतर एक बीजेपी एजेंट को ले जाने का प्रयास कर रहीं थी उसी दौरान महिलाओं के एक समूह ने उन पर कथित तौर पर हमला कर दिया जिसमें उन्हें मामूली चोंटे आईं।

एक अन्य बूथ में पथराव में उनका एक सुरक्षा गार्ड भी घायल हो गया। बीजेपी ने आरोप लगाया कि बांकुरा में उसके उम्मीदवार सुभाष सरकार पर भी तृणमूल कांग्रेस के कथित गुंडों ने हमला किया। वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को आधारहीन बताया है। केन्द्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा तृणमूल कांग्रेस स्वतंत्र एवं निष्पक्ष ढंग से चुनाव कराये जाने से क्यों डरती है।

ऐसा लगता है कि उन्होंने अपनी हार को भांप लिया है और इसलिए वे लोगों को वोट डालने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद उनके नेतृत्व में बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की और हिंसा के बारे में शिकायत की। उन्होंने कहा तृणमूल कांग्रेस चुनाव आयोग को ठीक ढ़ंग से काम नहीं करने दे रही है। वे बाधाएं उत्पन्न कर रहे है।

राज्य सरकार के कुछ अधिकारी निष्पक्ष ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। हम इन अधिकारियों के खिलाफ कल मुख्य निर्वाचन आयुक्त को अपनी शिकायत देंगे। इस बीच तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केन्द्रीय बल बीजेपी के आदेशों पर काम कर रहे हैं और लोगों को भगवा पार्टी के पक्ष में वोट डालने के लिए मजबूर कर रहे है।

तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि केन्द्रीय बल लोगों को बीजेपी के लिए वोट करने को मजबूर कर रहे है। हमने चुनाव आयोग के समक्ष पहले ही एक शिकायत दर्ज करा दी है। बीजेपी मतदाताओं को धमकाने के लिए केन्द्रीय बलों का इस्तेमाल क्यों कर रही है।

घोष पर कथित हमले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चटर्जी ने कहा कि उनकी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को धमकी देने संबंधी वीडियो फुटेज है। माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य राबिन देब ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के शासन में चुनावों के दौरान हिंसा बंगाल की पहचान बन गई है।

कोलकता। लोकसभा चुनाव 2019 के छठे चरण में पश्चिम बंगाल के बांकुरा में मतदान के दौरान हुई हिंसा के मामले में चुनाव आयोग ने कड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने बांकुरा के डीएम को हटा दिया है। बता दें कि रविवार को बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने बांकुरा में चुनाव के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली में चुनाव आयोग से शिकायत की थी। बीजेपी की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी को निर्देश दिया है। चुनाव आयोग ने बांकुरा के जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला निर्वाचन अधिकारी उमा शंकर को पद से हटाकर उनके स्थान पर 2008 बैच आईएएस अधिकारी मुक्ता आर्य को नियुक्त किया। रविवार को तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प होने के बाद जिलाधिकारी एवं डीईओ शंकर के खिलाफ शिकायतें की गई थी जिसके चलते उनका तबादला किया गया। चुनाव आयोग ने आर्य को तत्काल कार्यभार संभालने के आदेश दिए हैं। बीजेपी ने रविवार को आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के छठे चरण में खुलेआम हिंसा होने दी। बीजेपी ने राज्य के जंगलमहल क्षेत्र के विभिन्न बूथों पर पुनर्मतदान कराने की मांग की। अधिकारियों ने बताया कि बीजेपी उम्मीदवार और पूर्व आईपीएस अधिकारी भारती घोष घाटल लोकसभा सीट पर जब मतदान केन्द्रों पर जाने का प्रयास कर रही थीं तो उस दौरान स्थानीय लोगों ने दो बार उन पर कथित तौर पर हमला किया। घोष केशपुर क्षेत्र में सुबह एक मतदान केन्द्र के भीतर एक बीजेपी एजेंट को ले जाने का प्रयास कर रहीं थी उसी दौरान महिलाओं के एक समूह ने उन पर कथित तौर पर हमला कर दिया जिसमें उन्हें मामूली चोंटे आईं। एक अन्य बूथ में पथराव में उनका एक सुरक्षा गार्ड भी घायल हो गया। बीजेपी ने आरोप लगाया कि बांकुरा में उसके उम्मीदवार सुभाष सरकार पर भी तृणमूल कांग्रेस के कथित गुंडों ने हमला किया। वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को आधारहीन बताया है। केन्द्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा तृणमूल कांग्रेस स्वतंत्र एवं निष्पक्ष ढंग से चुनाव कराये जाने से क्यों डरती है। ऐसा लगता है कि उन्होंने अपनी हार को भांप लिया है और इसलिए वे लोगों को वोट डालने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद उनके नेतृत्व में बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की और हिंसा के बारे में शिकायत की। उन्होंने कहा तृणमूल कांग्रेस चुनाव आयोग को ठीक ढ़ंग से काम नहीं करने दे रही है। वे बाधाएं उत्पन्न कर रहे है। राज्य सरकार के कुछ अधिकारी निष्पक्ष ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। हम इन अधिकारियों के खिलाफ कल मुख्य निर्वाचन आयुक्त को अपनी शिकायत देंगे। इस बीच तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केन्द्रीय बल बीजेपी के आदेशों पर काम कर रहे हैं और लोगों को भगवा पार्टी के पक्ष में वोट डालने के लिए मजबूर कर रहे है। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि केन्द्रीय बल लोगों को बीजेपी के लिए वोट करने को मजबूर कर रहे है। हमने चुनाव आयोग के समक्ष पहले ही एक शिकायत दर्ज करा दी है। बीजेपी मतदाताओं को धमकाने के लिए केन्द्रीय बलों का इस्तेमाल क्यों कर रही है। घोष पर कथित हमले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चटर्जी ने कहा कि उनकी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को धमकी देने संबंधी वीडियो फुटेज है। माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य राबिन देब ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के शासन में चुनावों के दौरान हिंसा बंगाल की पहचान बन गई है।