चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: कोविड-19 मरीजों और बुजुर्गों को मिलेगी बैलेट पेपर की सुविधा

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चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: कोविड-19 मरीजों और बुजुर्गों को मिलेगी बैलेट पेपर की सुविधा

नई दिल्ली। देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले को देखते हुए चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने कानून और न्याय मंत्रालय के उस संशोधन को मंजूरी दे दी है जिसके तहत 65 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं और घर/संस्थागत क्वारंटीन के तहत कोविड-19 रोगियों के लिए पोस्टल बैलट की सुविधा प्रदान की जाएगी।

Election Commissions Big Decision Kovid 19 Patients And Elderly Will Get The Facility Of Ballot Paper :

कानून और न्याय मंत्रालय ने चुनाव (संशोधन) नियम 2020 के लिए अधिसूचना जारी की है। इसके मुताबिक 65 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं और घर/संस्थागत क्वारंटीन के तहत कोविड-19 रोगियों के लिए पोस्टल बैलट की सुविधा प्रदान करता है। बता दें कि इससे पहले पोस्टल बैलेट का अधिकार 80 वर्ष तक के बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को प्राप्त था।

पिछले साल 22 अक्टूबर को कानून मंत्रालय द्वारा अधिसूचना के मुताबिक चुनाव में मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए 80 साल के अधिक उम्र के बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए पोस्टल बैलेट से मतदान की सुविधा दी गई थी। उस वक्त मंत्रालय ने मतपत्र से मताधिकार देने के लिए निर्वाचन संचालन नियम 1961 में संशोधन करते हुए इन्हें ‘अनुपस्थित मतदाता’ की श्रेणी में शामिल किया था।

नई दिल्ली। देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले को देखते हुए चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने कानून और न्याय मंत्रालय के उस संशोधन को मंजूरी दे दी है जिसके तहत 65 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं और घर/संस्थागत क्वारंटीन के तहत कोविड-19 रोगियों के लिए पोस्टल बैलट की सुविधा प्रदान की जाएगी। कानून और न्याय मंत्रालय ने चुनाव (संशोधन) नियम 2020 के लिए अधिसूचना जारी की है। इसके मुताबिक 65 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं और घर/संस्थागत क्वारंटीन के तहत कोविड-19 रोगियों के लिए पोस्टल बैलट की सुविधा प्रदान करता है। बता दें कि इससे पहले पोस्टल बैलेट का अधिकार 80 वर्ष तक के बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को प्राप्त था। पिछले साल 22 अक्टूबर को कानून मंत्रालय द्वारा अधिसूचना के मुताबिक चुनाव में मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए 80 साल के अधिक उम्र के बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए पोस्टल बैलेट से मतदान की सुविधा दी गई थी। उस वक्त मंत्रालय ने मतपत्र से मताधिकार देने के लिए निर्वाचन संचालन नियम 1961 में संशोधन करते हुए इन्हें 'अनुपस्थित मतदाता' की श्रेणी में शामिल किया था।