एनडीए उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह बने राज्यसभा के उपसभापति, इनते मतों से मिली जीत

harivansh narayan singh
एनडीए उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह बने राज्यसभा के उपसभापति, इनते मतों से मिली जीत

नई दिल्ली। राज्यसभा उपसभापति के हुए लिए हुए चुनाव के एनडीए उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह जीत गए। उन्हे 125 वोट मिले, जबकि उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे हरिप्रसाद को 105 वोट मिले। चुनाव तीन बार में हुए मतदान के बाद पूरा हुआ। जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सदन में ही उन्हे बधाई दी, इसके साथ ही विपक्ष ने भी उन्हे शुभकामनाएं दी।

Election Of Rajya Sabha Vice Chairman Hariwansh Narayan Win By 15 Votes :

बता दें कि वोटिंग से पहले ही हरिवंश की जीत लगभग पक्की थी। बीजू जनता दल ने हरिवंश का समर्थन करने के संकेत देकर विपक्ष की उम्मीदों पर पानी फेर दिया, वहीं शिवसेना ने हरिवंश के समर्थन में प्रस्ताव देकर एनडीए को सियासी राहत दी है। चुनाव से पहले हरिनारायण के पक्ष में 126 जबकि हरिप्रसाद के खाते में 111 वोट पड़ने की उम्मीद थी।

कांग्रेस पार्टी की ओर से बीके हरिप्रसाद को उम्मीदवार के तौर पर उतारना विपक्षी एकता का लिटमस टेस्ट साबित हो सकती है। इस चुनाव के बाद विपक्ष की तस्वीर साफ हो जाएगी कि कौन-कौन से दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस के साथ खड़े रहते हैं और कौन से नहीं। हालांकि कांग्रेस इस पद पर किसी सहयोगी दल के सदस्य को उतारना चाहती थी, पर कोई इसके लिए तैयार नहीं हुआ।

नई दिल्ली। राज्यसभा उपसभापति के हुए लिए हुए चुनाव के एनडीए उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह जीत गए। उन्हे 125 वोट मिले, जबकि उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे हरिप्रसाद को 105 वोट मिले। चुनाव तीन बार में हुए मतदान के बाद पूरा हुआ। जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सदन में ही उन्हे बधाई दी, इसके साथ ही विपक्ष ने भी उन्हे शुभकामनाएं दी।बता दें कि वोटिंग से पहले ही हरिवंश की जीत लगभग पक्की थी। बीजू जनता दल ने हरिवंश का समर्थन करने के संकेत देकर विपक्ष की उम्मीदों पर पानी फेर दिया, वहीं शिवसेना ने हरिवंश के समर्थन में प्रस्ताव देकर एनडीए को सियासी राहत दी है। चुनाव से पहले हरिनारायण के पक्ष में 126 जबकि हरिप्रसाद के खाते में 111 वोट पड़ने की उम्मीद थी।कांग्रेस पार्टी की ओर से बीके हरिप्रसाद को उम्मीदवार के तौर पर उतारना विपक्षी एकता का लिटमस टेस्ट साबित हो सकती है। इस चुनाव के बाद विपक्ष की तस्वीर साफ हो जाएगी कि कौन-कौन से दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस के साथ खड़े रहते हैं और कौन से नहीं। हालांकि कांग्रेस इस पद पर किसी सहयोगी दल के सदस्य को उतारना चाहती थी, पर कोई इसके लिए तैयार नहीं हुआ।