Ram Gopal Verma
श्रीदेवी की याद में राम गोपाल वर्मा ने लिखी भावुक चिट्ठी

मुंबई। फिल्म निर्माता और निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने अभिनेत्री श्रीदेवी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके फैन्स के लिए प्रेम पत्र लिखा है।जिसमें उन्होंने श्रीदेवी के निजी जीवन की वह सच्चाई जाहिर की है, जिसे बतौर एक करीबी महसूस किया और जाना—समझा। इस प्रेम पत्र में रामगोपाल वर्मा ने कुछ लोगों के नाम भी उजागर किए हैं, जिसे लेकर उन्होंने माना है कि श्रीदेवी का वास्ता उनके प्रशंसकों से था और जो सच उन्होंने लिखा है वह जानना श्रीदेवी के प्रशंसकों के लिए जरूरी है।

Emotional Ram Gopal Verma Writes Love Letter To Sridevis Fans :

रामगोपाल वर्मा लिखते हैं, श्रीदेवी के लाखों फैंस की तरह मैं भी मानता हूं कि वह एक बेहद खूबसूरत और सबसे ज्यादा चाही जाने वाली महिला थीं।हम सभी जानते हैं कि वह एक अभिनेत्री के रूप में देश की सबसे बड़ी सुपरस्टार थी, जिसने सिल्वर स्क्रीन पर करीब 20 सालों तक राज किया।

ये सब श्रीदेवी की कहानी का एक हिस्सा मात्र है। मैं श्रीदेवी की मौत से वि​स्मित हूं और दुखी महसूस कर रहा हूं, यह एक बुरी यादगार है कि उसकी जिन्दगी और मौत दोनों ही अकल्पिनीय, क्रूर, बुरे और रहस्यमय रही।

उसकी मौत के बाद यह कहना कि वह एक अच्छी अभिनेत्री थीं, वह कितनी सुंदर थी और उसकी मौत से उनकी जिन्दगियों पर क्या असर पड़ेगा? भगवान उसकी आत्मा को शांति दे, जैसी बातें कहने के अलावा मेरे पास कहने को बहुत कुछ है।

ऐसा इसलिए क्योंकि मैने अपनी दो फिल्मों में उसके साथ काम किया इस दौरान मुझे, उसे करीब से जानने और समझने का मौका मिला। एक सिलेब्रिटी की जिन्दगी को लोग जिस नजरिए से देखते हैं वास्तविकता में उसकी जिन्दगी सामन्य लोगों से कितनी अलग होती है यह जानने के लिए श्रीदेवी की जिन्दगी एक श्रेष्ठ उदाहरण है।

अधिकांश लोगों के लिए श्रीदेवी की जिन्दगी संपूर्ण थी। एक खूबसूरत चेहरा, अद्वितीय हुनर और दो बेटियों के साथ एक हंसता खेलता परिवार। बाहर से देखने पर श्रीदेवी के पास वह सब कुछ था जिसकी कल्पना आमतौर पर की जा सकती है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या वास्तविकता में श्रीदेवी की जिन्दगी खुशहाल थी या वह अपनी जिन्दगी को लेकर खुश थी?

मैं उसके जीवन को तब से जानता हूं जब मैं उसे मिला था। मैने अपनी आंखों से देखा कि किस तरह वह एक आजाद पंक्षी की तरह खुले आसमान में उड़ती फिरती थी, लेकिन यह सब कुछ उसके पिता की मौत के साथ बदल गया। इसके बाद असुरक्षा की भावना से ग्रस्त अपनी मां की क्षत्रछाया में आने के बाद उसकी जिन्दगी पिंजरे में कैद पंक्षी की तरह हो गई थी।

यह भारतीय सिनेमा का वह दौर था जब कलाकारों को रेड़ के डर से अधिकतम भुगतान कालेधन से नगद किया जाता था।उसके पिता ने अपने रिश्तेदारों और सगे सं​बन्धियों पर विश्वास किया था, लेकिन उनकी मौत के बाद वे सभी मुकर गए थे। दूसरी गलती उसकी घमंडी मां ने की ​थी जिसने कई विवादित संपत्तियां खरीद के उसे पाई पाई का मोहताज बनाकर रख दिया।

आर्थिक तंगी का सामना कर रही श्रीदेवी के जीवन का यही समय था जब बोनी कपूर ने उसकी जिन्दगी में प्रवेश किया। उस समय बोनी कपूर भी बुरी तरह से कर्ज में डूबे हुए थे, लेकिन श्रीदेवी को सहारा देने के लिए वह मौजूद थे।

श्रीदेवी की मां अमेरिका में इलाज के दौरान हुई एक दिमाग की सर्जरी के बाद अपना मानसिक संतुलन खो बैठीं। इसी दौरान श्रीदेवी की छोटी बहन श्रीलता ने परिवार को धोखे में रखते हुए पड़ोसी के बेटे से शादी कर ली। जिसके बाद श्रीदेवी की मां ने मरने से पहले एक बसियत के जरिए सारी संपत्तियां श्रीदेवी के नाम कर दीं। मां की बसियत को श्रीलता ने उनकी मानसिक अवस्था के आधार पर कानूनी चुनौती दे डाली और करोड़ों की संपत्ति को अपने हिस्से के रूप में छीन लिया।

जिस श्रीदेवी के पास करोड़ों चाहने वाले थे वह निजी जिन्दगी में पूरी तरह से अकेली थी, बस बोनी कपूर अकेले ऐसे व्यक्ति थे जो उस समय उसके साथ खड़े थे।

श्रीदेवी की जिन्दगी में नई मुसीबत बोनी कपूर की के रूप में आई, जिसने उस पर बोनी कपूर और मोना कपूर के बसे बसाए घर को तोड़ने के आरोप लगाए। इतना ही नहीं बोनी कपूर की मां ने एक फाइव स्टार होटल की लॉबी में श्रीदेवी के पेट पर घूंसा तक मारा था।

इंग्लिश​ विंग्लिश फिल्म के कुछ हिस्से को छोड़ दिया जाए तो पूरे दौर में श्रीदेवी के बेहद दुखी महिला रही है। भविष्य की अनिश्चितताओं और निजी जीवन के बुरे बदलावों और मोड़ों ने इस सुपरस्टार के संवेदनशील दिमाग पर कुछ ऐसे निशान छोड़े जिनकी वजह से वह कभी शांत नहीं रही।

उसने अपने जीवन में बहुत कुछ झेला, एक बाल कलाकार के रूप में कैरियर शुरू करने के बाद जिन्दगी ने उसे एक सामान्य बच्चे की तरह विकसित होने का समय ही नहीं दिया।बाहरी दुनिया के से ज्यादा उस पर खुद की सोच का दबाव था, जिस वजह से उसने अपना ध्यान खुद रखना सीख लिया था।

वह बहुत से लोगों के लिए एक सुंदर महिला थी, लेकिन क्या वह खुद को खूबसूरत मानती थी? निश्चित ही इसका जवाब हां है, लेकिन हर अभिनेत्री की तरह बढ़ती उम्र उसके लिए भी एक बुरे सपने की तरह थी, वह कोई अपवाद नहीं थी। जिस वजह से कुछ सालों में उसने एक के बाद एक कॉस्मेटिक सर्जरीज का सहारा लिया जिसका असर भी स्पष्ट देखा गया।

गुजरते समय के साथ वह धीरे—धीरे गुस्से भरे अंदाज में नजर आने लगी, जिसका कारण खुद के द्वारा अपने आस पास बनाई एक मानसिकता की दीवार थी। वह हमेशा अपने जहन में छुपी असुरक्षा की भावना को छिपाने का प्रयास करती मानो कि वह दूसरे लोगों से अपनी किसी कमजोरी को छिपाने का प्रयास कर रही हो।

श्रीदेवी के इस रवैये को उसकी कमी के रूप में नहीं देखना चाहिए, क्योंकि बहुत ही छोटी उम्र में एक प्रसिद्धी उसके साथ बांध दी गई थी, जिसने उसकी आजादी छीन। वह ना तो अपनी मर्जी से कुछ कर सकती थी और गई थी, जिसने उसकी वह आजादी छीन ली। वह वो नहीं बन सकी जो बन सकती थी या फिर बनना चाहती थी।

उसने केवल कैमरे के सामने आने के लिए ही मेकअप नहीं किया उसने अपनी मानसिकता पर भी एक मेकअप कर रखा था, जिससे वह कैमरे के पीछे अपनी वास्तविकता को छिपाए रखने का प्रयास करती थी।

लोगों ने उसे अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अपने इशारों पर चलाया पहले मां—बाप ने फिर रिश्तेदारों और संबन्धियों ने उसके बाद पति और फिर उसके अपने बच्चों ने…..उसमें एक डर अपनी बेटियों के भविष्य को लेकर भी था, बिल्कुल वैसा ही जैसे अन्य स्टार मां बाप अपने बच्चों की सफलता को लेकर रखते हैं।

सच में कहा जाए तो श्रीदेवी एक महिला के शरीर में कैद एक बच्ची की तरह थी..जो अनुभवहीन होने के साथ ही अपने जीवन के बुरे अनुभवों के चलते शक की भावना से ग्रस्त रहने लगी थी। जिसे एक खतरनाक गठजोड़ कहना चाहिए। उसकी मृत्यु के घटनाक्रम को हटाकर देखा जाए तो मैं मरने वाले की आत्मा के लिए शांति की कामना नहीं करता, लेकिन श्रीदेवी के लिए मैं ऐसी कामना करता हूं क्योंकि मैं मानता हूं कि उसे मृत्यु के बाद ​आखिरकार वो सच्ची शांति मिलेगी जो उसे जीते जी नहीं मिल सकी।

मेरा निजी अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि मैने उसे तभी शांत देखा जब वह कैमरे के सामने एक्शन और कट कहने के बीच होती। इस दौरान वह अपनी निजी जिन्दगी से बच निकल कर उस काल्पनिक दुनिया में प्रवेश कर जाती थी, जिसमें वह असलियत में जीना चाहती थी।

मुझे विश्वास है कि वह अब हमेशा के लिए शांत रहेगी, क्योंकि वह अब उन तमाम चीजों से हमेशा के लिए दूर जा चुकी है जिन्होंने उसे दर्द दिया या फिर दर्द दे रहीं थीं।

तुम्हारी शांति की कामना के साथ मैं इतना ही कहना चाहूंगा, श्रीदेवी कि जिस दुनिया ने तुम्हारे साथ ऐसा किया वह कभी शांत नहीं रहेगी।

तुम्हारे फैन्स और करीबियों ने बचपन से ही तुम से कड़ी मेहनत करवाकर तुम्हें केवल कष्ट ही दिए और बदले में तुमने खुशी दी। यह सही सौदा नहीं है लेकिन तुम्हारे लिए कुछ करने के लिए अब समय नहीं बचा है।

मैं तुम्हें स्वर्ग में उस आजाद पंक्षी की तरह उड़ता हुआ देख सकता हूं जिसकी आंखों में शांति नजर आ रही है।यूं तो मैं पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करता, लेकिन एक फैन के रूप में मैं कामना करता हूं कि अगले जन्म में हम फिर तुम्हारा साथ मिले, लेकिन अगली बार हम बदलाव का प्रयास करेंगे और साबित करेंगे कि हम तुम्हारे काबिल हैं।

श्रीदेवी, कृपा करके हमें वो मौका जरूर देना क्योंकि हम तुमसे बहुत प्यार करते हैं।

मैं ऐसे ही और लिखता रह सकता हूं, लेकिन मैं ऐसा करते हुए अपने आंसू नहीं रोक पा रहा हूं।

राम गोपाल वर्मा