गोमती रिवर फ्रंट में ईडी ने दर्ज करवाया मनी लांड्रिंग का केस, 8 इंजीनियरों के नाम शामिल

Gomti River Front, गोमती रिवर फ्रंट
गोमती रिवर फ्रंट में ईडी ने दर्ज करवाया मनी लांड्रिंग का केस, 8 इंजीनियरों के नाम शामिल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की निर्वासित समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में राजधानी में शुरू हुए गोमती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट में सीबीआई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम भी सक्रिय हो गई है। ईडी ने 30 नवंबर 2017 को सीबीआई के द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर के आधार पर ही लखनऊ के गोमतीनगर थाने में मनी लांड्रिंग की धाराओं में मामला दर्ज करवाया है। जिसमें सिंचाई विभाग के उन आठ इंजीनियरों को आरोपी बनाया गया हैं, जिनकी निगरानी में गोमती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट शुरू हुआ था। ईडी द्वारा आरोपी बनाए गए इन सभी इंजीनियरों में से 4 रिटायर हो चुके हैं।

Enforcement Directorate Files Fir In Gomti River Front Corruption Case :

आपको बता दें कि गोमती रिवर फ्रंट को लेकर पहला मामला 19 जून 2018 को सिंचाई विभाग की ओर से ही दर्ज करवाया गया था। जिसमें इन विभागीय इंजीनियरों पर जालसाजी, गबन, धोखाधड़ी, घूंसखोरी, पद का दुरउपयोग और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। सिंचाई विभाग की इस एफआईआर के आधार पर सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा ने 30 नवंबर 2018 को गोमती रिवर फ्रंट में हुए भ्रष्टाचार को लेकर एफआईआर दर्ज करवाई थी।

ईडी ने जिन इंजीनियरों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है, उनमें सिंचाई विभाग के तत्कालीन चीफ इंजीनियर गुलेश चन्द्रा, एसएन शर्मा, काजिम अली, एसई शिवमंगल यादव, अखिल रमन, रूप सिंह यादव, कमलेश्वर सिंह और एई सुरेंद्र यादव का नाम शामिल हैं। बताया जा रहा है कि सीबीआई ने इन सभी में से चार को समन भेजकर पूछ ताछ के लिए तलब किया है। वहीं प्रमुख सचिव सिंचाई वेंकटेश्वर लू को रिवर फ्रंट की टेक्निकल आडिट रिपोर्ट देने के लिए कहा है। बताया जा रहा है कि आईआईटी कानपुर के इंजीनियरों की एक विशेष टीम टेक्निकल आडिट कर रही है जोकि आने मई के महीने में इस रिपोर्ट को सिंचाई विभाग को सौंपेगी।

तत्कालीन सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव और कई करीबियों तक जाएगी जांच की आंच—

लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट में जिस तरह से सरकारी बजट को पानी की तरह बहाया गया, वह किसी से छुपा नहीं रहा। रिवर फ्रंट के नाम पर सत्ता के करीब रहे कितने ही ठेकेदारों ने ठेके लेकर और कितने ही लोगों ने ठेके दूसरी कंपनियों को दिलाकर करोड़ों कमाए हैं। इनमें कई नाम ऐसे हैं जोकि तत्कालीन सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव के करीबी हैं।

सूत्रों की माने तो रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट के टेंडरों के लेन देन का काम एसई रूप सिंह यादव देखता था, जिसे शिवपाल यादव का सबसे करीबी और विश्वास पात्र माना जाता था। रिवर फ्रंट के ठेकों को कैसे और किसे देना है ऐसे तमाम फैसले रूप सिंह यादव ही लिया करते थे। सिंचाई विभाग में उस दौर में एक कहावत प्रचचित थी कि रूप सिंह यादव मतलब शिवपाल यादव।

 

क्या है रिवर फ्रंट घोटाला —

समाजवादी सरकार ने लखनऊ में गोमती नदी के 13 किलो मीटर लंबे किनारों का सूरत की साबरमती नदी के तर्ज पर सौंदर्यीकरण करने की ठानी थी। उस समय सीएम रहे अखिलेश यादव ने अपने बजट में इस प्रोजेक्ट के लिए 656 करोड़ का प्रावधान कर दिया। पूरे जोर शोर से गोमती रिवर फ्रंट की तुलना साबरमती रिवर फ्रंट से की गई। विधानसभा चुनावों में जाने से पहले आनन फानन में रिवर फ्रंट के एक टुकड़े को पूरा करवाकर उद्घाटन भी कर दिया।

सपा पर आरोप लगा कि उसने 656 करोड़ की परियोजना को देखते देखते 1513 करोड़ का बना दिया। रिवर फ्रंट के नाम पर भ्रष्टाचार की ऐसी गंगा बही, जिसमें रिवाइज बजट का 90 फीसदी यानी 1435 करोड़ का बजट खर्च होने के बाद भी रिवर फ्रंट का काम केवल 60 फीसदी ही पूरा हो सका। जिसके बाद सिंचाई विभाग ने शेष कार्य को पूरा करने के लिए करीब 700 करोड़ के अतिरिक्त बजट की मांग की थी।

इस घोटाले को चुनावी मुद्दा बनाने वाली भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान रिवर फ्रंट के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया और इसकी जांच सीबीआई से करवाने की बात कही थी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कुर्सी संभालने के पार्टी के वादे को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट की जांच सीबीआई से करवाने की सिफारिश कर दी थी।

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की निर्वासित समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में राजधानी में शुरू हुए गोमती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट में सीबीआई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम भी सक्रिय हो गई है। ईडी ने 30 नवंबर 2017 को सीबीआई के द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर के आधार पर ही लखनऊ के गोमतीनगर थाने में मनी लांड्रिंग की धाराओं में मामला दर्ज करवाया है। जिसमें सिंचाई विभाग के उन आठ इंजीनियरों को आरोपी बनाया गया हैं, जिनकी निगरानी में गोमती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट शुरू हुआ था। ईडी द्वारा आरोपी बनाए गए इन सभी इंजीनियरों में से 4 रिटायर हो चुके हैं।आपको बता दें कि गोमती रिवर फ्रंट को लेकर पहला मामला 19 जून 2018 को सिंचाई विभाग की ओर से ही दर्ज करवाया गया था। जिसमें इन विभागीय इंजीनियरों पर जालसाजी, गबन, धोखाधड़ी, घूंसखोरी, पद का दुरउपयोग और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। सिंचाई विभाग की इस एफआईआर के आधार पर सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा ने 30 नवंबर 2018 को गोमती रिवर फ्रंट में हुए भ्रष्टाचार को लेकर एफआईआर दर्ज करवाई थी।ईडी ने जिन इंजीनियरों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है, उनमें सिंचाई विभाग के तत्कालीन चीफ इंजीनियर गुलेश चन्द्रा, एसएन शर्मा, काजिम अली, एसई शिवमंगल यादव, अखिल रमन, रूप सिंह यादव, कमलेश्वर सिंह और एई सुरेंद्र यादव का नाम शामिल हैं। बताया जा रहा है कि सीबीआई ने इन सभी में से चार को समन भेजकर पूछ ताछ के लिए तलब किया है। वहीं प्रमुख सचिव सिंचाई वेंकटेश्वर लू को रिवर फ्रंट की टेक्निकल आडिट रिपोर्ट देने के लिए कहा है। बताया जा रहा है कि आईआईटी कानपुर के इंजीनियरों की एक विशेष टीम टेक्निकल आडिट कर रही है जोकि आने मई के महीने में इस रिपोर्ट को सिंचाई विभाग को सौंपेगी।

तत्कालीन सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव और कई करीबियों तक जाएगी जांच की आंच—

लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट में जिस तरह से सरकारी बजट को पानी की तरह बहाया गया, वह किसी से छुपा नहीं रहा। रिवर फ्रंट के नाम पर सत्ता के करीब रहे कितने ही ठेकेदारों ने ठेके लेकर और कितने ही लोगों ने ठेके दूसरी कंपनियों को दिलाकर करोड़ों कमाए हैं। इनमें कई नाम ऐसे हैं जोकि तत्कालीन सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव के करीबी हैं।सूत्रों की माने तो रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट के टेंडरों के लेन देन का काम एसई रूप सिंह यादव देखता था, जिसे शिवपाल यादव का सबसे करीबी और विश्वास पात्र माना जाता था। रिवर फ्रंट के ठेकों को कैसे और किसे देना है ऐसे तमाम फैसले रूप सिंह यादव ही लिया करते थे। सिंचाई विभाग में उस दौर में एक कहावत प्रचचित थी कि रूप सिंह यादव मतलब शिवपाल यादव। 

क्या है रिवर फ्रंट घोटाला —

समाजवादी सरकार ने लखनऊ में गोमती नदी के 13 किलो मीटर लंबे किनारों का सूरत की साबरमती नदी के तर्ज पर सौंदर्यीकरण करने की ठानी थी। उस समय सीएम रहे अखिलेश यादव ने अपने बजट में इस प्रोजेक्ट के लिए 656 करोड़ का प्रावधान कर दिया। पूरे जोर शोर से गोमती रिवर फ्रंट की तुलना साबरमती रिवर फ्रंट से की गई। विधानसभा चुनावों में जाने से पहले आनन फानन में रिवर फ्रंट के एक टुकड़े को पूरा करवाकर उद्घाटन भी कर दिया।सपा पर आरोप लगा कि उसने 656 करोड़ की परियोजना को देखते देखते 1513 करोड़ का बना दिया। रिवर फ्रंट के नाम पर भ्रष्टाचार की ऐसी गंगा बही, जिसमें रिवाइज बजट का 90 फीसदी यानी 1435 करोड़ का बजट खर्च होने के बाद भी रिवर फ्रंट का काम केवल 60 फीसदी ही पूरा हो सका। जिसके बाद सिंचाई विभाग ने शेष कार्य को पूरा करने के लिए करीब 700 करोड़ के अतिरिक्त बजट की मांग की थी।इस घोटाले को चुनावी मुद्दा बनाने वाली भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान रिवर फ्रंट के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया और इसकी जांच सीबीआई से करवाने की बात कही थी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कुर्सी संभालने के पार्टी के वादे को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट की जांच सीबीआई से करवाने की सिफारिश कर दी थी।