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घर भेजने से पहले पेट की भूख मिटा दो साहब

By टीम पर्दाफाश 
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जयपुर: साहब, हमे अपने घर नहीं जाना है। हम यहां पर ही ठीक है लेकिन अब खाने-पीने की चीजों की परेशानी होने लगी है। केवल हमारे खाने-पीने की व्यवस्था करवा दो। हम यहीं पर रहना चाहते है। फैक्ट्री मालिकों ने भी हमारी खूब मदद की है लेकिन उनकी भी सीमाएं है। भामाशाहों का भी सहयोग मिला है लेकिन पिछले दिनों से परेशानियां उठानी पड़ रही है अत: किसी तरह पेट भरने का जुगाड़ हो जावें तो राहत मिले। यह दर्द है ब्यावर शहर के अजमेर रोड स्थित ओद्यौगिक क्षेत्र की विभिन्न फैक्टियों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों की।

मालूम हो कि वर्तमान में यूपी, बिहार, तेलंगाना तथा हैदराबाद सहित प्रदेश के अन्य जिले के करीब डेढ़ सौ से अधिक मजदूर इन फैक्ट्रियों में रूके हुए है। फैक्ट्रियों में रहने वाले बिहार निवासी हसंराज ने बताया कि लॉक डाउन के बाद फैक्ट्री मालिकों की और से खाने-पीने की व्यवस्थाएं की जा रही है लेकिन मालिकों की भी सीमाएं है। आखिर बिना कामकाज के वे भी कब तक देंगे। इसी प्रकार बबलू ने बताया कि शुरू-शुरू में तो शहर के कुछ भामाशाहों ने हमारी मदद की थी। कुख राहत सामग्री के पैकेट भी मिले थे जिसके कारण परिवार का काम चल गया। लेकिन पिछले दिनों से किसी भी प्रकार की कोई मदद नहीं मिल रही है जिसके कारण परेशनियां उठानी पड़ रही है।

श्रमिकों ने बताया कि जीवन मजदूरी के सहारे ही काटना है को फिर घर जाने के क्या करेंगे। काम शुरू होने पर फिर से वापस यहां ही आना पडेगा। तो फिर यहीं पर रहना ही अच्छा ही। सभी ने केवल स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई है कि हमे गांव तक नहीं जाना है केवल खाने-पीने की व्यवस्था करवा दें ताकि परेशानियों का सामना नहीं करना पडे। कुछ महिला श्रमिकों ने बताया कि खाने-पीने के साथ-साथ बच्चों के दूध की व्यवस्था के लिए भी कड़ी मशक्त करनी पड़ रही है। धन्नी लाल, विपिन, हंसराज, बबलू, कालू, लक्ष्मणराम, पारे, अशोक सहाय, आशिष, सरिता देवी, सरोज देवी, सलमा तथा रसीदा सहित अन्य मजदूरों ने प्रशासन तथा स्थानीय भामाशाहों से खाने-पीने की सामग्री की व्यवस्था की मांग की है।

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