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अरबों खर्च के बाद भी यूपी के सरकारी स्कूलों में छात्रों का टोटा

By बलराम सिंह 
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Even After Spending Billions Students In Up Government Schools Tout

लखनऊ। सरकार की दर्जनों योजनाएं और अरबों के बजट के बाद भी यूपी के सरकारी स्कूल छात्रों को अपनी ओर आकर्षित करने में असफल हो रहे हैं। अकेले राजधानी लखनऊ के ही 40 फ़ीसदी से ज्यादा सरकारी सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज बंदी की कगार पर हैं। इनमें से अधिकांश कॉलेज वो हैं, जिनकी कभी लखनऊ ही नहीं पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान थी। इन स्कूलों में सरकार शिक्षकों के वेतन पर तो करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन छात्र एडमीशन ही नहीं ले रहे। मामले में अब माध्यमिक शिक्षा विभाग जागा है और उसने रिपोर्ट तलब कर ली है। डीआईओएस कह रहे हैं कि स्कूलों में छात्र संख्या के हिसाब से शिक्षक रखे जाएंगे।

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लखनऊ के सबसे पुराने कॉलेजों में से एक विद्यांत इंटर कॉलेज का हाल यह है कि यहां 35 का स्टाफ नौकरी कर रहा है और छात्र एक भी नहीं है। यहां 27 शिक्षक व 7 कर्मचारी हैं। सिर्फ वेतन पर कॉलेज में प्रतिमाह 25 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। यहां 6 से 12वीं तक कुल 150 छात्र हैं। ऐसी स्थिति में कॉलेज बंदी की कगार पर है।

कुछ यही हाल बासमंडी स्थित इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज का है, यहां प्रिंसिपल समेत 17 शिक्षक हैं और 17 लाख रुपये से ज्यादा की तनख्वाह दी जा रही है। लेकिन, 9वीं से 11 तक सिर्फ 14 स्टूडेंट पढ़ाई कर रहे हैं। इसी तरह सोहनलाल इंटर कॉलेज में 43, गिरधारी सिंह इंटर कॉलेज में 41, गांधी विद्यालय में 39, बाबा ठाकुरदास इंटर कॉलेज में 35, श्री दिगम्बर जैन इंटर कॉलेज और वैदिक कन्या इंटर कॉलेज में 17-17 छात्र हैं।

इस स्थिति पर अब शासन ने शिक्षकों की नियुक्ति पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन का मानना है कि जब कॉलेजों में स्टूडेंट ही नहीं हैं तो छात्रों के हिसाब से टीचर व अन्य स्टाफ होने चाहिए। ज्यादा स्टाफ पर खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। डीआईओएस डॉ मुकेश कुमार सिंह कहते हैं कि शासन के निर्देश पर टास्क फोर्स बनाई गई है। ये सभी स्कूलों की जांच कर रिपोर्ट चयन बोर्ड प्रयागराज को उपलब्ध कराएंगे।

परिषदीय स्कूलों में घट गए 48.5 लाख छात्र

स्कूल चलो अभियान, मुफ्त किताब, यूनिफार्म, बैग, जूता, मोजा से लेकर मिड-डे-मील तक की योजनाएं परिषदीय स्कूलों में बच्चों को रोक नहीं पा रही हैं। आलम यह है कि बेसिक शिक्षा परिषद के डेढ़ लाख से अधिक प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में 2018 की तुलना में 2019-20 शैक्षिक सत्र में 48.5 लाख छात्र-छात्राओं की कमी दर्ज हुई है।

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