भारत के खिलाफ पाकिस्तान की हर साजिश नाकाम, अ​ब मुस्लिम देशों से भी मिली निराशा

Imran khan
भारत के खिलाफ पाकिस्तान की हर साजिश नाकाम, अ​ब मुस्लिम देशों से भी मिली निराशा

इस्लामाबाद। भारत के खिलाफ पाकिस्तान की तमाम कोशिशें बेकार साबित हो रही हैं. संयुक्त राष्ट्र में इस्लामोफोबिया पर इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के राजदूतों का एक अनौपचारिक समूह बनाने की पाकिस्तान की मुहिम को मुस्लिम देशों ने ही खारिज कर दिया.

Every Plot Of Pakistan Against India Failed Even Disappointment From Muslim Countries :

पाकिस्तानी अखबार डॉन ने एक राजनयिक सूत्र के हवाले से लिखा है, संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने इस्लामिक सहयोग संगठन के प्रतिनिधियों की वर्चुअल बैठक में इस्लामोफोबिया का मुद्दा उठाया और एक समूह बनाने की मांग की. लेकिन यूएई और मालदीव ने पाकिस्तान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया.

यह इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के सदस्य देशों की नियमित बैठक थी. पाकिस्तानी राजदूत ने भारतीय मुसलमानों और कश्मीर को लेकर चिंता जाहिर की और कहा कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के हाथों इनका उत्पीड़न हो रहा है.

पाकिस्तानी प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने बैठक में कहा, भारत में कोरोना वायरस की महामारी के दौरान इस्लामोफोबिया और ज्यादा खुलकर सामने आया है. कश्मीर में गैर-कश्मीरियों को बसने की अनुमति देने के फैसले का जिक्र करते हुए पाकिस्तानी दूत ने कहा कि मोदी सरकार वहां की जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश कर रही है.

अकरम तमाम आरोप लगाने के बाद ही नहीं रुके बल्कि उन्होंने ओआईसी सदस्य देशों को आगाह भी किया कि वे भारत से धोखा ना खाएं. पाकिस्तानी राजदूत ने भारत पर तमाम आरोप लगाते हुए इस्लामोफोबिया को काउंटर करने के लिए ओआईसी देशों का एक समूह बनाने की भी बात कही.

मालदीव ने पाकिस्तान का खुलकर विरोध किया. मालदीव मीडिया के मुताबिक, मालदीव के राजदूत थिलमीजा हुसैन ने भारत को अलग से निशाने पर लेने का विरोध किया और कहा कि दिल्ली पर इस्लामोफोबिया का आरोप लगाना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा. इससे दक्षिण एशिया की धार्मिक सौहार्दता को भी नुकसान पहुंचाएगा.

वहीं, बैठक की अध्यक्षता कर रहे यूएई के राजदूत ने भी पाकिस्तान के अनुरोध को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि इस्लामोफोबिया पर अनौपचारिक समूह बनाने का फैसला सदस्य देशों के विदेश मंत्री ही ले सकते हैं.

यूएई और मालदीव ने भारत के पक्ष में खड़े होकर पाकिस्तान की एक और मुहिम नाकाम कर दी. पाकिस्तान के एक राजदूत ने कहा, “ओआईसी में इस तरह के समूहों का बनना आम बात रही है और राजदूतों के स्तर पर ही इनका गठन हो जाता था. इस तरह के समूहों से लॉबीइंग करने में आसानी होती थी.” जाहिर है पाकिस्तान इस्लामोफोबिया के नाम पर गुट बनाकर भारत को निशाने पर लेना चाहता था.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने मंगलवार को इसे लेकर एक ट्वीट भी किया था. कुरैशी ने लिखा था, पाकिस्तान यूएन और ओआईसी से इस्लामोफोबिया वाली मोदी की हिंदुत्ववादी विचारधारा की आलोचना करने की लगातार अपील करता रहा है. हालांकि, कुरैशी ने एक ट्वीट में मोदी पर द्रविड़ियन सर्वश्रेष्ठता की विचारधारा अपनाने का आरोप लगाया जिसे लेकर वो ट्रोल हो गए. बाद में उन्होंने अपने ट्वीट से द्रविड़ियन शब्द हटाकर हिंदुत्व कर दिया था.

इस्लामाबाद। भारत के खिलाफ पाकिस्तान की तमाम कोशिशें बेकार साबित हो रही हैं. संयुक्त राष्ट्र में इस्लामोफोबिया पर इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के राजदूतों का एक अनौपचारिक समूह बनाने की पाकिस्तान की मुहिम को मुस्लिम देशों ने ही खारिज कर दिया. पाकिस्तानी अखबार डॉन ने एक राजनयिक सूत्र के हवाले से लिखा है, संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने इस्लामिक सहयोग संगठन के प्रतिनिधियों की वर्चुअल बैठक में इस्लामोफोबिया का मुद्दा उठाया और एक समूह बनाने की मांग की. लेकिन यूएई और मालदीव ने पाकिस्तान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. यह इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के सदस्य देशों की नियमित बैठक थी. पाकिस्तानी राजदूत ने भारतीय मुसलमानों और कश्मीर को लेकर चिंता जाहिर की और कहा कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के हाथों इनका उत्पीड़न हो रहा है. पाकिस्तानी प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने बैठक में कहा, भारत में कोरोना वायरस की महामारी के दौरान इस्लामोफोबिया और ज्यादा खुलकर सामने आया है. कश्मीर में गैर-कश्मीरियों को बसने की अनुमति देने के फैसले का जिक्र करते हुए पाकिस्तानी दूत ने कहा कि मोदी सरकार वहां की जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश कर रही है. अकरम तमाम आरोप लगाने के बाद ही नहीं रुके बल्कि उन्होंने ओआईसी सदस्य देशों को आगाह भी किया कि वे भारत से धोखा ना खाएं. पाकिस्तानी राजदूत ने भारत पर तमाम आरोप लगाते हुए इस्लामोफोबिया को काउंटर करने के लिए ओआईसी देशों का एक समूह बनाने की भी बात कही. मालदीव ने पाकिस्तान का खुलकर विरोध किया. मालदीव मीडिया के मुताबिक, मालदीव के राजदूत थिलमीजा हुसैन ने भारत को अलग से निशाने पर लेने का विरोध किया और कहा कि दिल्ली पर इस्लामोफोबिया का आरोप लगाना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा. इससे दक्षिण एशिया की धार्मिक सौहार्दता को भी नुकसान पहुंचाएगा. वहीं, बैठक की अध्यक्षता कर रहे यूएई के राजदूत ने भी पाकिस्तान के अनुरोध को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि इस्लामोफोबिया पर अनौपचारिक समूह बनाने का फैसला सदस्य देशों के विदेश मंत्री ही ले सकते हैं. यूएई और मालदीव ने भारत के पक्ष में खड़े होकर पाकिस्तान की एक और मुहिम नाकाम कर दी. पाकिस्तान के एक राजदूत ने कहा, "ओआईसी में इस तरह के समूहों का बनना आम बात रही है और राजदूतों के स्तर पर ही इनका गठन हो जाता था. इस तरह के समूहों से लॉबीइंग करने में आसानी होती थी." जाहिर है पाकिस्तान इस्लामोफोबिया के नाम पर गुट बनाकर भारत को निशाने पर लेना चाहता था. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने मंगलवार को इसे लेकर एक ट्वीट भी किया था. कुरैशी ने लिखा था, पाकिस्तान यूएन और ओआईसी से इस्लामोफोबिया वाली मोदी की हिंदुत्ववादी विचारधारा की आलोचना करने की लगातार अपील करता रहा है. हालांकि, कुरैशी ने एक ट्वीट में मोदी पर द्रविड़ियन सर्वश्रेष्ठता की विचारधारा अपनाने का आरोप लगाया जिसे लेकर वो ट्रोल हो गए. बाद में उन्होंने अपने ट्वीट से द्रविड़ियन शब्द हटाकर हिंदुत्व कर दिया था.