अखिलेश के भ्रष्ट मंत्री राजकिशोर सिंह की फर्जी फर्म को मिला योगी के मंत्री धर्मपाल का संरक्षण

लखनऊ। सीएम योगी आदित्यनाथ और उनके नेतृत्व वाली सरकार की छवि को उनके ही मंत्री और अधिकारी राहू बन निगलने की तैयारी में लग चुके हैं। ऐसा ही एक नाम है कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह का। सिंह के पास सिंचाई विभाग जैसे अहम महकमे की जिम्मेदारी है। अपनी जिम्मेदारी को मंत्री जी कितनी गंभीरता से निभा रहे हैं इस बात की तस्दीक, अखिलेश सरकार के भ्रष्ट मंत्री राजकिशोर सिंह की फर्जी फर्म पर हो रही सिंचाई विभाग की मेहरबानियों से की जा सकती है। भारद्वाज कंस्ट्रक्शन नामक फर्म को मई 2017 में सिंचाई विभाग के बस्ती बाढ़ खंड के अधिकारियों द्वारा नियमों को ताक पर रख 26 करोड़ के ठेके दिए जाने का मामला सामने आया है। यह फर्म पूरी तरह से फर्जी और राजकिशोर सिंह का विश्वासपात्र रामेंद्र प्रताप सिंह की बताई जा रही है। जिसने 26 करोड़ के ठेके लेने के लिए विभागीय शिष्टाचार को पूरा किया है। शिष्टाचार का आशय उस कीमत से है जो तमाम सरकारी विभागों के भीतर नीचे से ऊपर तक हरी झंड़ी की गारंटी तय करती है।

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर विषय यह है कि विभाग के अधिकारियों ने इस फर्जी फर्म को 26 करोड़ के ठेके देने के लिए बस्ती की हरैया सीट के विधायक अजय सिंह द्वारा की गई तमाम शिकायतों को नजरंदाज कर दिया। आपकी जानकारी के लिए बता दें राजकिशोर सिंह वही पूर्व कैबिनेट मंत्री हैं जिन्हें अखिलेश यादव ने भ्रष्टाचार में लिप्त करार देते हुए बर्खास्त कर दिया था।

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पूरी तरह फर्जी फर्म है भारद्वाज कंस्ट्रक्शन —

भारद्वाज कंस्ट्रक्शन नामक फर्म का जन्म सितंबर 2012 में वाणिज्य कर रजिस्ट्रेशन के साथ हुआ। इस तिथि से पहले तक इस फर्म की अपनी कोई पहचान नहीं थी, यानी न तो फर्म के पास वैट रजिस्ट्रेशन था और न ही अपना पैनकार्ड। सितंबर में कानूनी तौर पर स्वरूप में आई भारद्वाज कंस्ट्रक्शन ने अक्टूबर महीने में सिंचाई विभाग में ठेकेदारी के लिए AA श्रेणी में पंजीकरण करा लिया।

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उस समय बतौर कैबिनेट मंत्री सत्ता में बैठे राजकिशोर सिंह के प्रभाव के चलते सिंचाई विभाग ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों को स्वीकार करते हुए भारद्वाज कंस्ट्रक्शन का पंजीकरण एए श्रेणी में कर दिया गया। नवंबर 2012 में सिंचाई विभाग ने तमाम नियमों को ताक पर रखते हुए भारद्वाज कंस्ट्रक्शन को 21.58 करोड़ के दो ठेके भी दे दिए।

इन ठेकों को हासिल करने के लिए भारद्वाज कंस्ट्रक्शन के पास कोई योग्यता नहीं थी। सिंचाई विभाग के तत्कालीन अधिकारियों ने ठेकों के लिए औपचारिक कागजी कार्रवाई करने के लिए फर्म के टर्नओवर के प्रमाण के रूप में 2010 और 2011 की बैलेंस शीट को स्वीकार कर लिया। गौर करने वाली बात यह रही कि जो फर्म 3 महीने पहले अस्तित्व में आई उसका टर्नओवर दो साल पहले का था। जिसे विभाग ने स्वीकार भी कर लिया।

 

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अब जाने फर्म के मालिकों का इतिहास —

भारद्वाज कंस्ट्रक्शंस का स्वामित्व इंद्रावती सिंह और रामेंद्र प्रताप सिंह उर्फ राहुल सिंह के पास है। इंद्रावती सिंह, रामेंद्र की मां हैं, और वह फर्म में औपचारिक रूप से अपने बेटे की साझेदार हैं। रामेंद्र ने लखनऊ के सूर्या इंजीनियरिंग कालेज से 2008 में अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। 2010 में रामेंद्र ने ठेकेदारी में हाथ आजमाने के लिए एसआर कंस्ट्रक्शन नाम से एक फर्म का वाणिज्य कर रजिस्ट्रेशन करवाया। और इसी फर्म को A श्रेणी की ठेकेदारी के लिए सिंचाई विभाग में पंजीकृत करवाने के लिए आवेदन किया। इस दौरान रामेंद्र को छोटे मोटे ठेके तो मिल गए, लेकिन उसकी किस्मत ने पलटा 2012 में उस समय खाया जब सूबे में समाजवादी पार्टी सत्ता में आई और उसके पुराने संबन्धी राजकिशोर सिंह समाजवादी सरकार में कैबिनेट मंत्री पद से नवाजे गए।

राजकिशोर सिंह से अपने संबन्धों के सहारे रामेंद्र  ने सितंबर 2012 में भारद्वाज कंस्ट्रक्शन का रजिस्ट्रेशन वाणिज्य कर में करवाया। अक्टूबर में फर्म को सिंचाई विभाग में AA श्रेणी में रजिस्टर करवाया और नवंबर में कंपनी को बस्ती बाढ़ खंड में निकले 21.58 करोड़ के दो ठेके ई टेंडरिंग के माध्यम से हासिल कर लिए।

तो पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह के छोटे भाई डिंपल सिंह (पिछली सरकार में राज्यमंत्री का दर्ज प्राप्त थे) और रामेंद्र  के बीच कारोबारी साझेदारी भी है। चूंकि मंत्री रहते राजकिशोर सिंह और उनके परिवार के लोग ठेकेदारी नहीं कर सकते थे, इसलिए उन्होंने रामेंद्र प्रताप सिंह को जरिया बनाकर इस कारोबार में उतारा। रामेंद्र को राजकिशोर सिंह की बदौलत सिंचाई और पीडब्लूडी विभाग में सैकड़ों करोड़ के टेंडर मिले।

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वर्तमान में रामेंद्र की हैसियत कई सौ करोड़ की है। लखनऊ में कई आलीशान मकानों के स्वामित्व से लेकर करोड़ों की कीमत वाली लग्जरी गाड़ियों का काफिला उसके साथ चलता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में उसकी गिनती शीर्ष ठेकेदारों में होती है। फर्श से अर्श तक का यह सफर तय करने में रामेंद्र को केवल पांच सालों का समय लगा है।

योगी सरकार में भी कायम है राजकिशोर का जलवा—

बस्ती की हरैया सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचने के साथ कैबिनेट मंत्री बने राजकिशोर सिंह भले ही वर्तमान विधानसभा का हिस्सा न हों लेकिन सरकारी महकमों में उनकी तूती आज भी बोल रही है। राजकिशोर सिंह को हराने वाले हरैया के नए विधायक अजय सिंह ने उनके काले कारनामों को लेकर कई शिकायतें दर्ज करवाई। जिनमें एक शिकायत भारद्वाज कंस्ट्रक्शन के फर्जीवाड़े की भी है। विगत कुछ महीनों में विभागीय स्तर पर कई बार भारद्वाज कंस्ट्रक्शन के खिलाफ कार्रवाई होती दिखी लेकिन नोटों की गड्डियों के दबाव में ठंडे बस्ते में पहुंच गई। यह हाल केवल सिंचाई विभाग का नहीं है। राजकिशोर की पकड़ पीडबल्यूडी विभाग पर भी बनी हुई है। अब तक बस्ती जिले के तमाम टेंडरों में उनका हस्तक्षेप है।

सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह और बस्ती सांसद की जानकारी में है पूरा मामला—

पर्दाफाश के सूत्रों की माने तो सिंचाई विभाग के गंडक जोन में आने वाले बस्ती बाढ़ खंड में भारद्वाज कंस्ट्रक्शन को मिलने वाले टेंडरों में हुए फर्जीवाडे की जानकारी विभागीय मंत्री धर्मपाल सिंह और बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी को है। हरीश द्विवेदी पूर्व में इस कंपनी को मिले ठेकों को लेकर लोकसभा तक में शिकायत कर चुके हैं।

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सूत्रों की माने तो अप्रत्यक्ष रूप से राजकिशोर सिंह के स्वामित्व वाली भारद्वाज कंस्ट्रक्शन ने सिंचाई मंत्री और बस्ती सांसद का मुंंह ​अपने​ 6 और 5 सूत्रीय शिष्टाचार से बंद कर रखा है। योगी सरकार में स्थानीय विधायक की शिकायत के बावजूद भारद्वाज कंस्ट्रक्शन को सिंगल क्वालीफायर के रूप में 26 करोड़ के नए ठेके दिए गए है। वास्तविकता में देखा जाए तो भारद्वाज कंस्ट्रक्शन वर्तमान समय में अपने टर्नओवर के लिहाज से और सिंचाई विभाग के नियमों के अनुसार इतने बड़े ठेको को लेने के लिए बिडिंग क्वालिफिकेशन को पूरा नहीं करती, क्योंकि यह कंपनी पास करीब 100 करोड़ से अधिक कीमत के सड़क निर्माण के ठेकों को पूरा करने में लगी है।