मोदी युग से पहले कुछ ऐसी थी देश की राजनीति, अटल ने राजीव को लेकर बोला था ऐसा

rajiv atal
अगर राजीव गांधी ने अटल बिहारी की मदत ना की होती तो तीन साल पहले हो जाती मौत

नई दिल्ली। राजनीति में ‘अटल’ सिद्धान्तों के चलते अमिट छाप छोड़ने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 16 अगस्त 2018 को निधन हो गया था वाजपेयी ने राजीव गांधी की हत्या के बाद वाजपेयी ने एक पत्रकार को बड़े भावुक अंदाज में एक वाकया सुनाया और कहा कि जिंदा अगर बचे थे तो राजीव गांधी की वजह से।

Ex Pm Rajiv Gandhi Saved Atal Bihari Vajpayee S Life Before 30 Years :

दरअसल 1991 से पहले वाजपेयी किडनी की समस्या से ग्रसित थे। तब भारत में इस बीमारी का इलाज संभव नहीं था। वाजपेयी जी को इलाज के लिए अमेरिका जाने की जरूरत थी। लेकिन आर्थिक साधनों की तंगी की वजह से वे अमेरिका नहीं जा पा रहे थे।

तब इलाज कराने के लिए वे अमेरिका गए थे और वहां उन्होंने अपनी जद्दोजहद को लेकर ‘मौत से ठन गई’ शीर्षक से एक कविता लिखी थी। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी के ‘अटल’ जज्बे ने मौत को मात दे दी थी और वे सकुशल वापस आकर देश की राजनीति में सक्रिय हो गए थे। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अटल की इस जंग में उनका साथ उनके विपक्षी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दिया था जिसके कारण उनकी जान बच सकी।

न्यूयॉर्क से लौटने के बाद यह वाकया न राजीव गांधी और न ही वाजपेयी ने किसी से साझा किया। दोनों शख्सियतों ने सार्वजनिक जीवन में एक दूसरे के विरोधी की भूमिका निभाई। हालांकि अटल बिहारी वाजपेयी ने कुछ समय बाद एक पोस्टकार्ड के जरिए संदेश भेजकर राजीव गांधी को इस शिष्टता के लिए धन्यवाद प्रेषित किया। लेकिन राजीव के जीते जी अटल जी ने यह वाकया किसी और से साझा नहीं किया।

अटल बिहारी वाजपेयी और राजीव गांधी आज की राजनीति का हिस्सा नहीं हैं और न ही आज वो दौर है। अपने विरोधियों के लिए इस तरह का वंधुत्व आज के दौर की निष्ठुर राजनीति में दुर्लभ ही है।

नई दिल्ली। राजनीति में 'अटल' सिद्धान्तों के चलते अमिट छाप छोड़ने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 16 अगस्त 2018 को निधन हो गया था वाजपेयी ने राजीव गांधी की हत्या के बाद वाजपेयी ने एक पत्रकार को बड़े भावुक अंदाज में एक वाकया सुनाया और कहा कि जिंदा अगर बचे थे तो राजीव गांधी की वजह से। दरअसल 1991 से पहले वाजपेयी किडनी की समस्या से ग्रसित थे। तब भारत में इस बीमारी का इलाज संभव नहीं था। वाजपेयी जी को इलाज के लिए अमेरिका जाने की जरूरत थी। लेकिन आर्थिक साधनों की तंगी की वजह से वे अमेरिका नहीं जा पा रहे थे। तब इलाज कराने के लिए वे अमेरिका गए थे और वहां उन्होंने अपनी जद्दोजहद को लेकर 'मौत से ठन गई' शीर्षक से एक कविता लिखी थी। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी के 'अटल' जज्बे ने मौत को मात दे दी थी और वे सकुशल वापस आकर देश की राजनीति में सक्रिय हो गए थे। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अटल की इस जंग में उनका साथ उनके विपक्षी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दिया था जिसके कारण उनकी जान बच सकी। न्यूयॉर्क से लौटने के बाद यह वाकया न राजीव गांधी और न ही वाजपेयी ने किसी से साझा किया। दोनों शख्सियतों ने सार्वजनिक जीवन में एक दूसरे के विरोधी की भूमिका निभाई। हालांकि अटल बिहारी वाजपेयी ने कुछ समय बाद एक पोस्टकार्ड के जरिए संदेश भेजकर राजीव गांधी को इस शिष्टता के लिए धन्यवाद प्रेषित किया। लेकिन राजीव के जीते जी अटल जी ने यह वाकया किसी और से साझा नहीं किया। अटल बिहारी वाजपेयी और राजीव गांधी आज की राजनीति का हिस्सा नहीं हैं और न ही आज वो दौर है। अपने विरोधियों के लिए इस तरह का वंधुत्व आज के दौर की निष्ठुर राजनीति में दुर्लभ ही है।