Exclusive: दरक रहा ‘कांग्रेस का किला’, क्या अमेठी की जनता का मोह भंग हो रहा?

अमेठी: साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को बीजेपी उम्मीदवार स्मृति ईरानी से कड़ी चुनौती मिली थी फिर 2017 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अमेठी की चार में से सभी विधानसभा सीटें हार गई। वही कल निकाय चुनाव के परिणाम आने के बाद अमेठी में कांग्रेस को फिर से तगड़ा झटका लगा है। अमेठी के नगर पंचायत और दो नगर पालिका चुनाव के दौरान आए नतीजों में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली है। इसके बाद ये सवाल उठना स्वाभाविक था कि शायद अब ये संसदीय क्षेत्र कांग्रेस या यूं कहें कि गांधी परिवार का ‘गढ़’ नहीं रहा।

निकाय चुनाव में भी अमेठी में खिला कमल-

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राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र और कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाली अमेठी में निकाय चुनाव में भी जीत कांग्रेस के हाथ से फिसल गयी। अमेठी के दो नगर पंचायत और दो नगर पालिका चुनाव के दौरान आए नतीजों में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली है। वहीं गौरीगंज नगर पालिका पर सपा प्रत्याशी राजपति देवी ने जीत दर्ज की हैं। अमेठी नगर पंचायत पर बीजेपी की चंद्रमा देवी ने परचम लहराया है। मुसाफिरखाना नगर पंचायत पर निर्दलीय प्रत्याशी बृजेश अग्रहरि ने जीत दर्ज की हैं। इसी कड़ी में जायस नगर पालिका सीट से बीजेपी प्रत्याशी ने जीत दर्ज की हैं।

लगातार खिसक रहा वोट बैंक-

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राजनीतिक पण्डितो की मानें तो कांग्रेस के लिए यह नतीजे हैरान करने वाले हैं, क्योंकि 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव की तुलना की जाए तो कांग्रेस के हाथ से अमेठी का वोट बैंक फिसलता दिखा था। वहीं, विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो कांग्रेस और सपा ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। इसके बावजूद अमेठी की 5 में से 4 सीटें बीजेपी ने जीती थी और कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला था।

अब 2019 के लोक सभा चुनाव की रणनीति तैयार कर बीजेपी-

2014 चुनाव में अमेठी में मिली हार से भाजपा ने सबक लिया है इस लिए अब 2019 में होने वाले लोकसभा के लिए पहले से ही रणनीति तैयार कर रही है इसीलिए बीजेपी कांग्रेस की कमजोर नब्ज राहुल को निशानें पर लेते हुए राहुल की कमियों पर ज्यादा ध्यान दे रहीं है सूत्रों की बात मानें तो राहुल में निम्न कमियां है।

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– राहुल गांधी जब भी अमेठी दौरे पर होते है तब वह चुनिंदा जगहों पर ही जाते है।
– राहुल अपने ही संसदीय क्षेत्र में कभी पांच महीने तो कभी छह महीने बाद ही अमेठी में नजर आते है।
– यहां तक अमेठी का प्रशासन का काम भी उनकी वजह से इस जिले में नहीं दिखता है, जबकि इसके उलट इटावा भी वीआईपी सीट है, जहां विकास आसानी से देखा जा सकता है।

अमेठी में ज्यादा समय दे राहुल गांधी-

देखा जाए तो कांग्रेस कहीं ना कहीं अमेठी तक ही सिमट कर रह गई है। इसके बाद भी राहुल अमेठी पर ध्यान नहीं दे रहे है लोगो का मानना है कि राहुल गांधी अमेठी को अपनी जागीर मान कर चलते हैं। इसके बावजूद वह अमेठी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं किसी की डेथ में भी वह छह महीने बाद या कुछ दिनों बाद ही जब उनका दौरा होता है, तब वह वहां पहुंचते हैं।

रिपोर्ट-राम मिश्रा

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