सूरत अग्निकांड: मोबाइल पर रिंग बजाकर और घड़ी देखकर हुई शवों की शिनाख्त, कुछ ऐसा था मंजर

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सूरत अग्निकांड: मोबाइल पर रिंग बजाकर और घड़ी देखकर हुई शवों की शिनाख्त, कुछ ऐसा था मंजर

नई दिल्ली। गुजरात के सूरत में हुए अग्निकांड ने अभी तक 22 लोग काल के गाल में समा चुके हैं। इस भयानक मंजर को देख लोगों की रूह कांप उठी। इस अग्निकांड का वीडियो हादसे के कुछ देर बाद ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। वीडियो में अपनी जान बचाकर चौथी मंजिल से कूद रहे बच्चों को देखकर हादसे का अंदाजा साफ तौर पर लगाया जा सकता है। वहीं हादसे में घायल कई छात्र-छात्राओं की हालत अभी नाजुक बताई जा रही है।

Families Identified Dead Bodies By Watching Clock And Mobile :

हादसा इतना भयानक था कि मृतकों के परिजन को अपने बच्चों की पहचान करना मुश्किल था। उनकी पहचान घड़ी और मोबाइल पर घंटी बजाकर की गयी। कई परिजन घंटों अपने बच्चों की पहचान कराने के लिए भटकते रहे। स्मीमेर अस्पताल में एक के बाद एक करीब 10 एम्बुलेंस में 17 शव 30 मिनट में पहुंचाए गए। शव चादर और प्लास्टिक के बोरों में लाए गए। उधर, पीड़ित बच्चों के परिजन का अस्पताल पहुंचना शुरू हो गया था।

घटना के समय 15 से 22 की उम्र के करीब 60 छात्र-छात्राएं दूसरी और तीसरी मंजिल पर चलने वाली दो आर्ट-हॉबीज क्लासेज अटेंड कर रहे थे। हादसा गुरुवार दोपहर 3:40 बजे हुआ। शाम को करीब 7:30 बजे तक आग बुझ पाई। 13 बच्चों ने दूसरी और तीसरी मंजिल से छलांग लगाई। इनमें से तीन की कूदने से मौत हुई।

बिल्डिंग में हुआ था अवैध निर्माण

इस घटना के बाद पता चला है कि इमारत की छत को कवर करके उसमें ट्यूशन क्लासेज चलाये जा रहे थे। बिल्डिंग के इस फ्लोर पर आग बुझाने का सामान भी नहीं था। सूरत के नगर आयुक्‍त एम थेन्‍नर्सन ने वरच्‍छा के फायर ऑफिसर को इस घटना के लिए जिम्‍मेदार ठहराया है। उन्‍होंने कहा कि फायर ऑफिसर इमारत में सुरक्षा मानकों के उल्‍लंघन की पहचान नहीं कर सके इसीलिए उन्‍हें सस्‍पेंड करने का फैसला किया है।

आपको बता दें कि बीते चार महीने में सूरत के कोचिंग सेंटर में आग की ये दूसरी घटना है। इस घटना में घायल हुई उर्मिला का कहना है कि हम चौथी और सबसे ऊपरी मंजिल पर थे। अचानक से वहां आसपास धुआं हो गया। हमें सांस लेने में बहुत परेशानी होने लगी। हम मदद के लिए चिल्लाने लगे। मैंने अपनी मां को फोन किया और वहां मौजूद एकमात्र सीढ़ियों की तरफ भागी। लेकिन सीढ़ियों पर भी आग लग गई थी।

नई दिल्ली। गुजरात के सूरत में हुए अग्निकांड ने अभी तक 22 लोग काल के गाल में समा चुके हैं। इस भयानक मंजर को देख लोगों की रूह कांप उठी। इस अग्निकांड का वीडियो हादसे के कुछ देर बाद ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। वीडियो में अपनी जान बचाकर चौथी मंजिल से कूद रहे बच्चों को देखकर हादसे का अंदाजा साफ तौर पर लगाया जा सकता है। वहीं हादसे में घायल कई छात्र-छात्राओं की हालत अभी नाजुक बताई जा रही है। हादसा इतना भयानक था कि मृतकों के परिजन को अपने बच्चों की पहचान करना मुश्किल था। उनकी पहचान घड़ी और मोबाइल पर घंटी बजाकर की गयी। कई परिजन घंटों अपने बच्चों की पहचान कराने के लिए भटकते रहे। स्मीमेर अस्पताल में एक के बाद एक करीब 10 एम्बुलेंस में 17 शव 30 मिनट में पहुंचाए गए। शव चादर और प्लास्टिक के बोरों में लाए गए। उधर, पीड़ित बच्चों के परिजन का अस्पताल पहुंचना शुरू हो गया था। घटना के समय 15 से 22 की उम्र के करीब 60 छात्र-छात्राएं दूसरी और तीसरी मंजिल पर चलने वाली दो आर्ट-हॉबीज क्लासेज अटेंड कर रहे थे। हादसा गुरुवार दोपहर 3:40 बजे हुआ। शाम को करीब 7:30 बजे तक आग बुझ पाई। 13 बच्चों ने दूसरी और तीसरी मंजिल से छलांग लगाई। इनमें से तीन की कूदने से मौत हुई। https://www.youtube.com/watch?v=K_CMrBTEvEI

बिल्डिंग में हुआ था अवैध निर्माण

इस घटना के बाद पता चला है कि इमारत की छत को कवर करके उसमें ट्यूशन क्लासेज चलाये जा रहे थे। बिल्डिंग के इस फ्लोर पर आग बुझाने का सामान भी नहीं था। सूरत के नगर आयुक्‍त एम थेन्‍नर्सन ने वरच्‍छा के फायर ऑफिसर को इस घटना के लिए जिम्‍मेदार ठहराया है। उन्‍होंने कहा कि फायर ऑफिसर इमारत में सुरक्षा मानकों के उल्‍लंघन की पहचान नहीं कर सके इसीलिए उन्‍हें सस्‍पेंड करने का फैसला किया है। आपको बता दें कि बीते चार महीने में सूरत के कोचिंग सेंटर में आग की ये दूसरी घटना है। इस घटना में घायल हुई उर्मिला का कहना है कि हम चौथी और सबसे ऊपरी मंजिल पर थे। अचानक से वहां आसपास धुआं हो गया। हमें सांस लेने में बहुत परेशानी होने लगी। हम मदद के लिए चिल्लाने लगे। मैंने अपनी मां को फोन किया और वहां मौजूद एकमात्र सीढ़ियों की तरफ भागी। लेकिन सीढ़ियों पर भी आग लग गई थी।