नहीं रहे उर्दू के मशहूर शायर अनवर जलालपुरी

लखनऊ। मशहूर शायर अनवर जलालपुरी का 2 जनवरी को लखनऊ में निधन हो गया। वह करीब 70 वर्ष के थे। 28 दिसंबर को ब्रेन हैमरेज की शिकायत के बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। भगवद्गीता को शायरी की शक्ल में उर्दू में अनुवाद किया। उर्दू शायरी में बेहतरीन योगदान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें यश भारती अवार्ड से भी सम्मानित किया था।

जलालपुरी के बेटे शाहकार ने बताया उनके पिता ने मंगलवार सुबह नौ बजे लखनऊ स्थित ट्रॉमा सेंटर में आखिरी सांस ली। जलालपुरी के परिवार में पत्नी और तीन बेटे हैं। जलालपुरी को मुशायरों की सबसे मशहूर हस्तियों में शुमार किया जाता है। बतया दें कि उन्होंने राहरौ से रहनुमा तक, उर्दू शायरी में गीतांजलि, और भगवद्गीता के उर्दू संस्करण ‘उर्दू शायरी में गीता’ जैसी पुस्तकें लिखीं। इतना ही नहीं जलालपुरी को अकबर द ग्रेट धारावाहिक के संवाद भी लिखने के लिए जाना जाता है।

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शायरी की दुनिया में मशहूर होने से पहले उन्हे जलालपुरी अनवर अहमद के नाम से जाने जाता था। वो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आंबेडकर नगर जिले के जलालपुर कस्बे के निवासी थे। मुशायरों में आने के बाद वो अनवर जलालपुरी के नाम से मशहूर हुए।

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