योगी सरकार की ऋण माफी योजना से उत्साहित किसान चांद पर करेंगे खेती

लखनऊ। बेहिसाब वादों और ईमानदार इरादों के साथ अद्वितीय जनमत बटोरकर यूपी की सत्ता में आई सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने ऋण मांफी के नाम पर किसानों की भावनाओं से गजब का खेल खेला है, जिसे देखने के बाद किसान खुद को न सिर्फ ठगा महसूस कर रहे हैं बल्कि अपना ही मजाक उड़ा रहे हैं। जमीनी हकीकत तो यह है कि किसानों का ऋण तो कम माफ हुआ है, योगी के मंत्री प्रमाण पत्र बांटने में डीजल ज्यादा फूंके दे रहे हैं।

अगर योगी सरकार के ऋण माफी प्रमाण पत्रों को आप देखेंगे तो लगेगा कि यूपी का किसान दुनिया का सबसे अमीर किसान है। जो चांद पर प्लाट नहीं खेत की बुकिंग करवाने जा रहा है। धरती पर उसकी जो कुछ चिंता फिक्र थी वह सीएम योगी सरकार ने दूर कर दी है। उसके ऊपर बैंकों का बकाया 10—20 रुपए का जो कुछ कर्जा था वह सरकार ने चुका दिया है। अब वह फुरसत से चांद पर खेती कर यूपी का नाम रोशन करेगा।
हो सकता है यह शैली थोड़ी खराब हो लेकिन किसान और किसानों की व्यथा को करीब से जानने के बाद कुछ ऐसे शब्द दिमाग में आते हैं। करोड़ों रूपए प्रचार पर उड़ा दिए गए। किसानों की ऋण माफी का ढ़िढ़ोरा पीटकर सरकार ने उसे अपनी उपलब्धी बना लिया और किसान के हिस्से आई 10 रुपए 37 पैसे की कर्ज माफी।
इसके लिए किसान को प्रमाण पत्र भी दिया गया जिसकी छपाई और बंटवाई का बंदोबस्त खर्चा कुल मिलाकर 50 रुपए तो रहा ही होगा। आखिर रंगीन प्रमाण पत्र पर किसान का मजाक उड़ाते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और योगी आदित्य नाथ एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे हैं तो उसकी कीमत इतनी तो रही ही होगी।
किसान भी क्या करे हाथ आए प्रमाण पत्र को मोड़ कर उसने अपनी जेब में रख लिया। किसान ने पहले सोचा कि इसे फेंक दे फिर विचार आया कि 150 रुपया खर्चा करके घंटों लाइन में लगाकर सरकार ने उसके साथ जो मजाक किया है उसकी निशानी तो घर ले ही जानी चाहिए। आखिर 2019 में दरवाजे पर आकर कमल के सामने की बटन दबाने की अपील करने वाले नेता के मुंह पर प्रमाण पत्र मारकर पूछा तो जा सकेगा कि वोट की ठगी करने वालों काठ की हांड़ी कब तक चढ़ाओगे।

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