किसानों ने जश्न के बाद डीएम को पगड़ी बांधकर किया सम्मानित

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किसानों ने जश्न के बाद डीएम को पगड़ी बांधकर किया सम्मानित

लखनऊ। रामपुर में शुक्रवार को ज़िला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष हाफ़िज़ अब्दुल सलाम और सोशल एक्टिविस्ट फैसल खान लाला की अगुवाई में आलिया गंज के किसान डीएम कार्यालय पहुंचे। डीएम आंजनेय कुमार सिंह को पगड़ी बांधकर उन्हें सम्मानित किया साथ ही इंसाफ दिलाने के लिए उनकी पूरी प्रशासनिक टीम का आभार व्यक्त किया।

Farmers Honored Dm By Wearing A Turban After The Celebration :

बता दे कि लगभग 15 साल पहले साल 2005 में आलिया गंज के किसानों की ज़मीनों पर पूर्व मंत्री आज़म खान ने नाजायज़ कब्ज़ा कर लिया था और उन किसानों की ज़मीने जौहर यूनिवर्सिटी के अंदर कैद कर ली थीं। तब ही से गरीब किसान यूनिवर्सिटी के बाहर से अपनी ज़मीनों को देखते और अपना दिल मसोस लेते थे। क्योंकि जब भी कोई किसान अपनी ज़मीन पर जाने की कोशिश करता था तो आज़म खान और तत्कालीन सीओ सिटी आले हसन किसानों को मारते पीटते थे। और झूठे मुकदमें लगाकर उन्हें जेल में डाल देते थे।

लंबे समय तक हाफ़िज़ अब्दुल सलाम और फैसल लाला ने किसानों को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्ष किया कई बार उच्च अधिकारियों से लेकर सूबे के तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक से भी मुलाकात की थी यहां तक की अब्दुल सलाम को किसानों की आवाज़ उठाने पर साल 2016 में जेल में भी डाल दिया गया था। सूबे में जैसे ही सपा की सरकार बदली तो फैसल लाला और अब्दुल सलाम ने किसानों की अगुवाई की और किसानों ने आज़म और आले हसन के खिलाफ मुकदमें दर्ज कराए थे।

किसान लगातार 15 साल से अपनी ज़मीनें वापस लेने को संघर्ष कर रहे थे ज़िला प्रशासन ने अब आकर किसानों की ज़मीन को चिन्हित करके किसानों को कब्ज़ा दिलाया है। लंबे समय के बाद अपने पूर्वजों की ज़मीनों पर पहुंचकर किसानों के चेहरे खिल गए सभी ने अब्दुल सलाम और फैसल लाला का आभार व्यक्त किया। अब्दुल सलाम और फैसल लाला ने ज़िलाधिकरी और प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

लखनऊ। रामपुर में शुक्रवार को ज़िला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष हाफ़िज़ अब्दुल सलाम और सोशल एक्टिविस्ट फैसल खान लाला की अगुवाई में आलिया गंज के किसान डीएम कार्यालय पहुंचे। डीएम आंजनेय कुमार सिंह को पगड़ी बांधकर उन्हें सम्मानित किया साथ ही इंसाफ दिलाने के लिए उनकी पूरी प्रशासनिक टीम का आभार व्यक्त किया। बता दे कि लगभग 15 साल पहले साल 2005 में आलिया गंज के किसानों की ज़मीनों पर पूर्व मंत्री आज़म खान ने नाजायज़ कब्ज़ा कर लिया था और उन किसानों की ज़मीने जौहर यूनिवर्सिटी के अंदर कैद कर ली थीं। तब ही से गरीब किसान यूनिवर्सिटी के बाहर से अपनी ज़मीनों को देखते और अपना दिल मसोस लेते थे। क्योंकि जब भी कोई किसान अपनी ज़मीन पर जाने की कोशिश करता था तो आज़म खान और तत्कालीन सीओ सिटी आले हसन किसानों को मारते पीटते थे। और झूठे मुकदमें लगाकर उन्हें जेल में डाल देते थे। लंबे समय तक हाफ़िज़ अब्दुल सलाम और फैसल लाला ने किसानों को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्ष किया कई बार उच्च अधिकारियों से लेकर सूबे के तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक से भी मुलाकात की थी यहां तक की अब्दुल सलाम को किसानों की आवाज़ उठाने पर साल 2016 में जेल में भी डाल दिया गया था। सूबे में जैसे ही सपा की सरकार बदली तो फैसल लाला और अब्दुल सलाम ने किसानों की अगुवाई की और किसानों ने आज़म और आले हसन के खिलाफ मुकदमें दर्ज कराए थे। किसान लगातार 15 साल से अपनी ज़मीनें वापस लेने को संघर्ष कर रहे थे ज़िला प्रशासन ने अब आकर किसानों की ज़मीन को चिन्हित करके किसानों को कब्ज़ा दिलाया है। लंबे समय के बाद अपने पूर्वजों की ज़मीनों पर पहुंचकर किसानों के चेहरे खिल गए सभी ने अब्दुल सलाम और फैसल लाला का आभार व्यक्त किया। अब्दुल सलाम और फैसल लाला ने ज़िलाधिकरी और प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।