दोआबा में अपनी मांगो को लेकर गरजे किसान

दोआबा में अपनी मांगो को लेकर गरजे किसान
दोआबा में अपनी मांगो को लेकर गरजे किसान
कौशांबी। गंगा यमुना के दोआबा क्षेत्र के किसान बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती करते हैं। लेकिन अब यही गन्ने की खेती किसानों के गले की फांस बन गई है।अपने मेहनत का उचित दाम न मिलने पर किसानों का सब्र जवाब दे दिया है। किसान अब आंदोलन पर उतर आए हैं। कौशांबी जिले के उदहिन चौराहे पर समर्थ किसान पार्टी भारत की तरफ से आयोजित किसान पंचायत को सम्बोधित करते हुए किसान नेता अंशुल उमराव ने कहा कि यहां किसान बड़े…

कौशांबी। गंगा यमुना के दोआबा क्षेत्र के किसान बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती करते हैं। लेकिन अब यही गन्ने की खेती किसानों के गले की फांस बन गई है।अपने मेहनत का उचित दाम न मिलने पर किसानों का सब्र जवाब दे दिया है। किसान अब आंदोलन पर उतर आए हैं। कौशांबी जिले के उदहिन चौराहे पर समर्थ किसान पार्टी भारत की तरफ से आयोजित किसान पंचायत को सम्बोधित करते हुए किसान नेता अंशुल उमराव ने कहा कि यहां किसान बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती करते हैं। बहुत से किसान गन्ने की फसल को बेंचकर अगली फसल की जुताई-बुआई करते हैं।

दोआबा में अपनी मांगो को लेकर गरजे किसान
दोआबा में अपनी मांगो को लेकर गरजे किसान

इसी पैसे से किसान अपने बच्चों की पढ़ाई, लिखाई और जीवनयापन आदि की व्यवस्था करते हैं। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य के गृह जिले में गन्ने का एक भी सरकारी काँटा नहीँ है , गन्ना किसान अपनी फसल पड़ोसी जिले फतेहपुर के धाता में ले जाने को मजबूर है। किसानों का आरोप है कि फतेहपुर जिले में भी सरकारी गन्ना काँटा दलालों के हाथो सौप दिए गए हैं ,कांटे में काफी दिनों तक गन्ना लदी ट्रालिया खड़ी रहती हैं, जिससे गन्ना सूख जाता है और फिर मानक का रोना रोकर किसान को गन्ना औने पौने दाम में बेचने पर मजबूर करते हैं ।

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इसके साथ ही दलालों के सक्रिय होने से किसानों का शोषण हो रहा है। तमाम किसानों का भुगतान अभी तक नहीं हो सका। उनको भुगतान दिलाया जाए। सहकारी समितियां खाली पड़ी हैं। उनके पास न तो किसानों के लिए बीज है और न ही किसी प्रकार को उर्वरक हैं।

जिसके कारण किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। किसान नेता अंशुल उमराव ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि जल्द ही गाँव-गाँव कैम्पेनिंग चला कर काँटे की मांग के लिए जिलाधिकारी से मुलाकात किया जाएगा,यदि हमारी मांगों को सरकार और नौकरशाही विभाग के लोग नहीं मानते तो ट्रालियों में भर भर कर गन्ना इनके विभागों में भर दिया जाएगा।

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