इस साल किसान देंगे अर्थव्यवस्था को रफ्तार, बुवाई का रकबा 18 फीसदी बढ़ा

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नई दिल्ली: कोरोना महामारी के बीच इस साल देश की इकॉनमी के लिए अच्छी खबर ग्रामीण भारत से आ रही है। अच्छे मानसून के कारण पिछले साल के मुकाबले ज्यादा खेती हो रही है। भारत की जीडीपी में खेती का योगदान 15 फीसदी के करीब है। संकट के बीच यह एकमात्र सेक्टर है जिसका ग्रोथ दिख रहा है। हालांकि बिहार, असम जैसे राज्यों में बाढ़ के कारण इसपर काफी बुरा असर भी हुआ है। जुलाई के तीसरे सप्ताह में अनुकूल वर्षा से देश में प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा, पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 18.50 फीसदी बढ़ गया है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। प्रमुख खरीफ फसलों जैसे धान, दलहन, मोटे अनाज और तिलहन के बुआई आंकड़ों से पता लगता है कि इस वर्ष 24 जुलाई तक खेतों में बुवाई का कुल रकबा 799.95 लाख हेक्टेयर है जो पिछले साल इस दौरान खरीफ सत्र में 675.07 लाख हेक्टेयर था।

Farmers Will Accelerate The Economy This Year Area Under Sowing Increased By 18 :

ग्रामीण इनकम बढ़ने की उम्मीद
ब्रोकरेज हाउस के एक विश्लेषक ने बताया कि हाल के महीनों में ग्रामीण विकास ने शहरी विकास की गति को पीछे छोड़ दिया है और विश्लेषकों को उम्मीद है कि अच्छी फसल बुवाई और अधिक ऊपज के कारण ग्रामीण आय और बढ़ेगी। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक धान की बुवाई 24 जुलाई तक सामान्य रूप से होने वाले 397 लाख हेक्टेयर में से 220.24 लाख हेक्टेयर में की गई है।

32 लाख हेक्टेयर ज्यादा में धान की रोपाई
पिछले साल समीक्षाधीन अवधि में धान की रोपाई केवल 187.70 लाख हेक्टेयर में की गई थी। धान खेती के रकबे में 32.54 लाख हेक्टेयर की वृद्धि में उत्तर प्रदेश (6.50 लाख हेक्टेयर), झारखंड (6.10 लाख हेक्टेयर), मध्य प्रदेश (5.98 लाख हेक्टेयर), बिहार (5.66 लाख हेक्टेयर), छत्तीसगढ़ (3.57 लाख हेक्टेयर) और पश्चिम बंगाल (2.80 लाख हेक्टेयर) जैसे राज्यों का योगदान है।

दालों की 25 फीसदी ज्यादा बुआई
दालों में कुल बुवाई क्षेत्र 128.88 लाख हेक्टेयर में से 99.71 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में अब तक यह कवरेज 25 फीसदी से अधिक है। वहीं ज्वार, बाजरा, रागी और मक्का जैसे मोटे अनाजों के रकबे में समीक्षाधीन अवधि में 16.83 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई, जबकि तिलहनों की खेती के रकबे में अब तक 32.80 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।

30 लाख किसान जूट की खेती में भी
जूट और मेस्टा ने अब तक 1.49 फीसदी की मामूली वृद्धि दिखाई है। आंकड़ों से पता चलता है कि सामान्य बुवाई के 7.87 लाख हेक्टेयर में से लगभग 90 फीसदी में बुवाई पूरी हो चुकी है। आंकड़े दर्शाते हैं कि लगभग 30 लाख किसान जूट की खेती में लगे हुए हैं।

नई दिल्ली: कोरोना महामारी के बीच इस साल देश की इकॉनमी के लिए अच्छी खबर ग्रामीण भारत से आ रही है। अच्छे मानसून के कारण पिछले साल के मुकाबले ज्यादा खेती हो रही है। भारत की जीडीपी में खेती का योगदान 15 फीसदी के करीब है। संकट के बीच यह एकमात्र सेक्टर है जिसका ग्रोथ दिख रहा है। हालांकि बिहार, असम जैसे राज्यों में बाढ़ के कारण इसपर काफी बुरा असर भी हुआ है। जुलाई के तीसरे सप्ताह में अनुकूल वर्षा से देश में प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा, पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 18.50 फीसदी बढ़ गया है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। प्रमुख खरीफ फसलों जैसे धान, दलहन, मोटे अनाज और तिलहन के बुआई आंकड़ों से पता लगता है कि इस वर्ष 24 जुलाई तक खेतों में बुवाई का कुल रकबा 799.95 लाख हेक्टेयर है जो पिछले साल इस दौरान खरीफ सत्र में 675.07 लाख हेक्टेयर था। ग्रामीण इनकम बढ़ने की उम्मीद ब्रोकरेज हाउस के एक विश्लेषक ने बताया कि हाल के महीनों में ग्रामीण विकास ने शहरी विकास की गति को पीछे छोड़ दिया है और विश्लेषकों को उम्मीद है कि अच्छी फसल बुवाई और अधिक ऊपज के कारण ग्रामीण आय और बढ़ेगी। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक धान की बुवाई 24 जुलाई तक सामान्य रूप से होने वाले 397 लाख हेक्टेयर में से 220.24 लाख हेक्टेयर में की गई है। 32 लाख हेक्टेयर ज्यादा में धान की रोपाई पिछले साल समीक्षाधीन अवधि में धान की रोपाई केवल 187.70 लाख हेक्टेयर में की गई थी। धान खेती के रकबे में 32.54 लाख हेक्टेयर की वृद्धि में उत्तर प्रदेश (6.50 लाख हेक्टेयर), झारखंड (6.10 लाख हेक्टेयर), मध्य प्रदेश (5.98 लाख हेक्टेयर), बिहार (5.66 लाख हेक्टेयर), छत्तीसगढ़ (3.57 लाख हेक्टेयर) और पश्चिम बंगाल (2.80 लाख हेक्टेयर) जैसे राज्यों का योगदान है। दालों की 25 फीसदी ज्यादा बुआई दालों में कुल बुवाई क्षेत्र 128.88 लाख हेक्टेयर में से 99.71 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में अब तक यह कवरेज 25 फीसदी से अधिक है। वहीं ज्वार, बाजरा, रागी और मक्का जैसे मोटे अनाजों के रकबे में समीक्षाधीन अवधि में 16.83 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई, जबकि तिलहनों की खेती के रकबे में अब तक 32.80 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। 30 लाख किसान जूट की खेती में भी जूट और मेस्टा ने अब तक 1.49 फीसदी की मामूली वृद्धि दिखाई है। आंकड़ों से पता चलता है कि सामान्य बुवाई के 7.87 लाख हेक्टेयर में से लगभग 90 फीसदी में बुवाई पूरी हो चुकी है। आंकड़े दर्शाते हैं कि लगभग 30 लाख किसान जूट की खेती में लगे हुए हैं।