ग्रे लिस्ट में डाले जाने के बाद बौखलाया पाकिस्तान

नई दिल्ली। आतंकवाद को सपोर्ट करने वाला पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने ग्रे लिस्ट में डाल दिया है। जिसके बाद पाकिस्तान बौखला गया है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहम्मद आजम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एफएटीएफ ने अमेरिका और भारत के दबाव में आकर ऐसा किया है। उन्होने कहा कि दोनों देशों ने चीन और सऊदी अरब पर भी दबाव डाला है कि वह पाकिस्तान की मदद न करने के साथ ही इस मामले में कोई हस्तक्षेप करें।

Fatf Decides That Pakistan Keep In Gray List :

बता दें कि स्थानीय मीडिया के मुताबिक, पाकिस्तान ने अपने वित्त मंत्री शमशाद अख्तर को देश का बचाव करने के लिए चुना है। वो एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान का पक्ष रखने के साथ ही ग्रे सूची से पाकिस्तान का नाम हटाने की मांग करेंगे। इसके साथ ही पाक वित्त मंत्री मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी फंडिंग और आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देंगे।

अब पाकिस्तान का इस बात का डर सता रहा है कि कही उसे आतंकवाद को आर्थिक मदद मुहैया कराने वाले देशों की सूची में डाले जाने के साथ ही ब्लैक लिस्ट होने का खतरा मंडरा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इससे बचने के लिए पाकिस्तान ने 15 महीनों के अंदर 26-सूत्रीय एक्शन प्लान तैयार किया है। इसमें वो बताएगा कि आतंकियों को आर्थिक मदद पर रोक लगाने के लिए कौन—कौन से कदम उठाएगा।

बता दें कि एफएटीएफ का गठन 1989 में किया गया था। यह धन को अवैध तरीके से एक देश से दूसरे देश भेजने, आतंकवाद को आर्थिक मदद देने और वैश्विक आर्थिक ढांचे के लिए अन्य खतरनाक तरीकों पर नजर रखता है। बताया जा रहा है कि संस्था ने पाकिस्तान को बीते फरवरी माह में ही ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। तब एफएटीएफ ने उसे कुछ दिन मोहलत देते हुए कहा था कि समीक्षा बैठक में पाकिस्तान को इस मामले में एक्शन टेकेन रिपोर्ट देनी होगी।

नई दिल्ली। आतंकवाद को सपोर्ट करने वाला पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने ग्रे लिस्ट में डाल दिया है। जिसके बाद पाकिस्तान बौखला गया है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहम्मद आजम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एफएटीएफ ने अमेरिका और भारत के दबाव में आकर ऐसा किया है। उन्होने कहा कि दोनों देशों ने चीन और सऊदी अरब पर भी दबाव डाला है कि वह पाकिस्तान की मदद न करने के साथ ही इस मामले में कोई हस्तक्षेप करें। बता दें कि स्थानीय मीडिया के मुताबिक, पाकिस्तान ने अपने वित्त मंत्री शमशाद अख्तर को देश का बचाव करने के लिए चुना है। वो एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान का पक्ष रखने के साथ ही ग्रे सूची से पाकिस्तान का नाम हटाने की मांग करेंगे। इसके साथ ही पाक वित्त मंत्री मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी फंडिंग और आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देंगे। अब पाकिस्तान का इस बात का डर सता रहा है कि कही उसे आतंकवाद को आर्थिक मदद मुहैया कराने वाले देशों की सूची में डाले जाने के साथ ही ब्लैक लिस्ट होने का खतरा मंडरा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इससे बचने के लिए पाकिस्तान ने 15 महीनों के अंदर 26-सूत्रीय एक्शन प्लान तैयार किया है। इसमें वो बताएगा कि आतंकियों को आर्थिक मदद पर रोक लगाने के लिए कौन—कौन से कदम उठाएगा। बता दें कि एफएटीएफ का गठन 1989 में किया गया था। यह धन को अवैध तरीके से एक देश से दूसरे देश भेजने, आतंकवाद को आर्थिक मदद देने और वैश्विक आर्थिक ढांचे के लिए अन्य खतरनाक तरीकों पर नजर रखता है। बताया जा रहा है कि संस्था ने पाकिस्तान को बीते फरवरी माह में ही ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। तब एफएटीएफ ने उसे कुछ दिन मोहलत देते हुए कहा था कि समीक्षा बैठक में पाकिस्तान को इस मामले में एक्शन टेकेन रिपोर्ट देनी होगी।