दुष्कर्म के आरोपी पिता को मौत की सजा, बेटों की गवाही पर मिली सजा

agra
दुष्कर्म के आरोपी पिता को मौत की सजा, बेटों की गवाही पर मिली सजा

आगरा। आगरा के एत्मादपुर में 50 वर्षीय शख्स को अपनी ही सात साल की बेटी की दुष्कर्म के बाद हत्या करने के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई गई है। उसने यह वारदात 24 नवंबर 2017 की रात में की थी। बेटी को घर से उठाकर पास के सरकारी स्कूल में ले गया था। वहां उसे हवस का शिकार बनाया।
चीखें बंद करने के लिए मुंह में कपड़ा ठूंस दिया था। वह छटपटाई तो मुंह दबा दिया। दरिंदगी की इंतहा यह थी कि मौत हो जाने के बाद बच्ची के चेहरे को दांतों से काटा और नाखूनों से नोंचा था। उसे 2.35 लाख रुपये का अर्थदंड भी दिया गया है।

Father Accused Of Rape Sentenced To Death Sentenced On Testimony Of Sons :

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुभाष गिरि, मधु शर्मा ने कोर्ट में इस केस की पैरवी की। उन्होंने कोर्ट में 16 गवाह पेश किए। आरोपी मौनी सिंह के छोटे बेटे को भी गवाह बनाया गया। उसने यह बताया कि रात को बहन के दर्द हो रहा था। वह रो रही थी। पिता यह बोलकर उसे अपने साथ ले गए थे कि उसे दवा दिलाने ले जा रहे हैं।

यह वाकया रात करीब 12 बजे का था। इसे अहम साक्ष्य माना गया। तर्क दिया गया कि बेटे की गवाही लॉस्ट सीन है। उसके बाद बच्ची को किसी ने नहीं देखा। पिता ही उसे साथ लेकर गया था।

कोर्ट में तर्क दिया गया कि अभियुक्त द्वारा किया गया कृत्य अत्यंत गंभीर है। डीएनए और फोरेसिंक साक्ष्य हैं। जिससे यह साबित होता है कि हत्या और दुराचार करने वाला कोई और नहीं बल्कि पिता ही है। घटना से पता चलता है कि अभियुक्त गिरे हुए चरित्र का व्यक्ति है। घटना दिल दहला देने वाली है। सभ्य समाज में इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। पिता अपनी बेटी के साथ ऐसी हरकत करेगा।

स्पेशल जज (पॉक्सो एक्ट) वीके जायसवाल ने इसे विरलतम श्रेणी का अपराध माना है। 24 पेज के फैसले में कहा कि हत्यारे को गर्दन में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक कि उसकी मृत्यु न हो जाए। उसने बेटी की हत्या के बाद थाने जाकर झूठ बोला था कि वह लापता हो गई है।

बच्ची का शव स्कूल से ही सुबह छह बजे बरामद हुआ था। बेटों ने बताया कि पापा ने पहले घर में उसके साथ दुष्कर्म किया। वह रोने लगी तो उसे दवा दिलाने के बहाने उठाकर ले गए। इस पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुभाष गिरी ने कोर्ट में 16 गवाह और साक्ष्य पेश किए। हत्यारा झोंपड़ी डालकर रहता था। लोगों के कान साफ करने का काम करता था।

इस केस में सबसे अहम गवाही हत्यारे के 9 और 13 साल के बेटों की रही। उन्होंने बताया कि पापा ने घर में ही बहन के साथ बुरा काम किया, वह रोने लगी तो उसे दवा दिलाने के बहाने उठाकर ले गए। दोनों ने कहा कि पापा ने दरिंदगी की है, उन्हें सजा मिले।

जज ने टिप्पणी की है, यदि बेटी से दुष्कर्म और उसका कत्ल करने वाले समाज में खुलेआम घूमते रहे तो सभ्य समाज में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का उद्देश्य कभी सफल नहीं हो सकता।

आगरा में मौनी को कठोर से कठोर सजा दिलाने के लिए सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने भी कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने जो तर्क दिए उनकी कोई काट नहीं थी। कोर्ट ने उसे गंभीरता से सुना। उसके बाद अपना फैसला सुनाया।

आगरा। आगरा के एत्मादपुर में 50 वर्षीय शख्स को अपनी ही सात साल की बेटी की दुष्कर्म के बाद हत्या करने के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई गई है। उसने यह वारदात 24 नवंबर 2017 की रात में की थी। बेटी को घर से उठाकर पास के सरकारी स्कूल में ले गया था। वहां उसे हवस का शिकार बनाया। चीखें बंद करने के लिए मुंह में कपड़ा ठूंस दिया था। वह छटपटाई तो मुंह दबा दिया। दरिंदगी की इंतहा यह थी कि मौत हो जाने के बाद बच्ची के चेहरे को दांतों से काटा और नाखूनों से नोंचा था। उसे 2.35 लाख रुपये का अर्थदंड भी दिया गया है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुभाष गिरि, मधु शर्मा ने कोर्ट में इस केस की पैरवी की। उन्होंने कोर्ट में 16 गवाह पेश किए। आरोपी मौनी सिंह के छोटे बेटे को भी गवाह बनाया गया। उसने यह बताया कि रात को बहन के दर्द हो रहा था। वह रो रही थी। पिता यह बोलकर उसे अपने साथ ले गए थे कि उसे दवा दिलाने ले जा रहे हैं। यह वाकया रात करीब 12 बजे का था। इसे अहम साक्ष्य माना गया। तर्क दिया गया कि बेटे की गवाही लॉस्ट सीन है। उसके बाद बच्ची को किसी ने नहीं देखा। पिता ही उसे साथ लेकर गया था। कोर्ट में तर्क दिया गया कि अभियुक्त द्वारा किया गया कृत्य अत्यंत गंभीर है। डीएनए और फोरेसिंक साक्ष्य हैं। जिससे यह साबित होता है कि हत्या और दुराचार करने वाला कोई और नहीं बल्कि पिता ही है। घटना से पता चलता है कि अभियुक्त गिरे हुए चरित्र का व्यक्ति है। घटना दिल दहला देने वाली है। सभ्य समाज में इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। पिता अपनी बेटी के साथ ऐसी हरकत करेगा। स्पेशल जज (पॉक्सो एक्ट) वीके जायसवाल ने इसे विरलतम श्रेणी का अपराध माना है। 24 पेज के फैसले में कहा कि हत्यारे को गर्दन में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक कि उसकी मृत्यु न हो जाए। उसने बेटी की हत्या के बाद थाने जाकर झूठ बोला था कि वह लापता हो गई है। बच्ची का शव स्कूल से ही सुबह छह बजे बरामद हुआ था। बेटों ने बताया कि पापा ने पहले घर में उसके साथ दुष्कर्म किया। वह रोने लगी तो उसे दवा दिलाने के बहाने उठाकर ले गए। इस पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुभाष गिरी ने कोर्ट में 16 गवाह और साक्ष्य पेश किए। हत्यारा झोंपड़ी डालकर रहता था। लोगों के कान साफ करने का काम करता था। इस केस में सबसे अहम गवाही हत्यारे के 9 और 13 साल के बेटों की रही। उन्होंने बताया कि पापा ने घर में ही बहन के साथ बुरा काम किया, वह रोने लगी तो उसे दवा दिलाने के बहाने उठाकर ले गए। दोनों ने कहा कि पापा ने दरिंदगी की है, उन्हें सजा मिले। जज ने टिप्पणी की है, यदि बेटी से दुष्कर्म और उसका कत्ल करने वाले समाज में खुलेआम घूमते रहे तो सभ्य समाज में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का उद्देश्य कभी सफल नहीं हो सकता। आगरा में मौनी को कठोर से कठोर सजा दिलाने के लिए सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने भी कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने जो तर्क दिए उनकी कोई काट नहीं थी। कोर्ट ने उसे गंभीरता से सुना। उसके बाद अपना फैसला सुनाया।