आलिया खान के खिलाफ फतवा जारी, कृष्ण की वेशभूषा में पढे गीता के श्लोक

aliya

लखनऊ। मेरठ के सेठ बीके माहेश्वरी इंटर कॉलेज की छात्रा आलिया खान ने उत्तर प्रदेश में गीता पाठ करके दूसरा स्थान प्राप्त किया है। जिसके बाद कुछ इस्लामिक संगठन इसे इस्लाम विरोधी बता बवाल कर रहे हैं। दारुल उलूम के ऑनलाइन फतवा विभाग के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुकी ने एेसा करने को इस्लाम विरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्कूल की मुस्लिम बच्ची या बच्चे द्वारा एेसा रूप रखना इस्लाम के खिलाफ है। इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। एेसी बातें या ड्रामों में मुस्लिम बच्चों को शामिल न करें जो उनके मजहब के खिलाफ हों।

Fatwa Released Against Aliya Khan Reads Gita Shloka In Krishnas Costume :

उन्होंने कहा कि किसी भी मुसलमान बच्ची या बच्चे का जो स्कूल के छात्र हैं, ऐसे रूप को इख्तियार करना जो इस्लाम के मुखालिफ हैं वह शिर्क (अल्लाह के अलावा किसी दूसरे मजहब को मानना) कहलाता है। इस्लाम में इसकी इजाजत नहीं है। इस कारण अगर किसी छात्रा ने गीता के शब्द और श्लोक पढ़े हैं और कृष्ण का रूप इख्तियार किया है तो शिर्क जैसी बात है। ऐसी ड्रामों में और कार्यक्रमों में मुसलमान बच्चों को शामिल ना करें जो उनके मजहब के खिलाफ हो। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि जब टीवी सीरियल सिया के राम में दानिश खान हनुमान का रोल कर सकते हैं तो आलिया के गीता पढ़ने पर कुछ लोगों को दिक्कत क्यों हो रही है।

वहीं आलिया का कहना है कि गीता धार्मिक किताब नहीं है, कर्म ज्ञान देता है। जैसे हमारे यहां नेकी कर दरिया में डाल। मैंने सिर्फ ज्ञान के लिए इसका पाठ किया है, ज्ञान हम किसी से भी हासिल कर सकते हैं। किसी भी धर्म का ग्रंथ हमें इंसानियत का पाठ पढ़ाता है। जब मैं कोई पाठ करूंगी तो उसके तौर तरीके भी अपनाने पड़ेंगे। वही मैने किया है, रूप धारण करने से मेरा मजहब नहीं बदल जाता। मैं विरोध करने वाले लोगों से कहना चाहती हूं कि मुझे राजनीति में ना घसीटें, पढ़ने दें और अपना ड्रामा बंद करें। आलिया का दावा है कि वो विरोध करने वालों को मुंहतोड़ जबाव देंगी।

लखनऊ। मेरठ के सेठ बीके माहेश्वरी इंटर कॉलेज की छात्रा आलिया खान ने उत्तर प्रदेश में गीता पाठ करके दूसरा स्थान प्राप्त किया है। जिसके बाद कुछ इस्लामिक संगठन इसे इस्लाम विरोधी बता बवाल कर रहे हैं। दारुल उलूम के ऑनलाइन फतवा विभाग के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुकी ने एेसा करने को इस्लाम विरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्कूल की मुस्लिम बच्ची या बच्चे द्वारा एेसा रूप रखना इस्लाम के खिलाफ है। इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। एेसी बातें या ड्रामों में मुस्लिम बच्चों को शामिल न करें जो उनके मजहब के खिलाफ हों।उन्होंने कहा कि किसी भी मुसलमान बच्ची या बच्चे का जो स्कूल के छात्र हैं, ऐसे रूप को इख्तियार करना जो इस्लाम के मुखालिफ हैं वह शिर्क (अल्लाह के अलावा किसी दूसरे मजहब को मानना) कहलाता है। इस्लाम में इसकी इजाजत नहीं है। इस कारण अगर किसी छात्रा ने गीता के शब्द और श्लोक पढ़े हैं और कृष्ण का रूप इख्तियार किया है तो शिर्क जैसी बात है। ऐसी ड्रामों में और कार्यक्रमों में मुसलमान बच्चों को शामिल ना करें जो उनके मजहब के खिलाफ हो। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि जब टीवी सीरियल सिया के राम में दानिश खान हनुमान का रोल कर सकते हैं तो आलिया के गीता पढ़ने पर कुछ लोगों को दिक्कत क्यों हो रही है।वहीं आलिया का कहना है कि गीता धार्मिक किताब नहीं है, कर्म ज्ञान देता है। जैसे हमारे यहां नेकी कर दरिया में डाल। मैंने सिर्फ ज्ञान के लिए इसका पाठ किया है, ज्ञान हम किसी से भी हासिल कर सकते हैं। किसी भी धर्म का ग्रंथ हमें इंसानियत का पाठ पढ़ाता है। जब मैं कोई पाठ करूंगी तो उसके तौर तरीके भी अपनाने पड़ेंगे। वही मैने किया है, रूप धारण करने से मेरा मजहब नहीं बदल जाता। मैं विरोध करने वाले लोगों से कहना चाहती हूं कि मुझे राजनीति में ना घसीटें, पढ़ने दें और अपना ड्रामा बंद करें। आलिया का दावा है कि वो विरोध करने वालों को मुंहतोड़ जबाव देंगी।