पूर्वांचल की ‘धड़कन’ में ‘कमल’ खिलाने का रण

लखनऊ। यूपी के चुनावी-रण में आखिरी दौर की ज़ोर आजमाइश में जुटे दिग्गजों ने अपनी पूरी ताकत पूर्वांचल की धड़कन कहे जाने वाले बनारस में झोंक दी है। सबसे बड़ी बात यह है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पिछली चार तारीख से छह तारीख तक डेरा जमाये हुए हैं। भाजपा के लखनऊ स्थित राज्य मुख्यालय को वाराणसी शिफ्ट कर दिया गया है। आपको बता दें कि इस जिले में आठ विधानसभा सीटें हैं। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र से भाजपा की झोली में महज तीन सीटें ही आयीं थी, लेकिन इस बार पीएम मोदी समेत करीब 17 केन्द्रीय मंत्रियों ने अपना डेरा जमा रखा है। आखिरी चरण में होने जा रहे इस क्षेत्र के चुनाव से पहले भाजपा अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने से चूकती नहीं दिख रही है।



Fight In Purvanchal For Raise Kamal :

पूर्वांचल की धुरी कहे जाने वाले और पीएम के संसदीय क्षेत्र में किसी भी तरह के लचर प्रदर्शन से भाजपा विरोधियों को आलोचना का मौका नहीं देना चाहती, जाहिर है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन की कमान संभाल रहे अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने इस क्षेत्र में अपना शक्ति प्रदर्शन दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। दरअसल, पिछली बार के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल में सबसे ज्‍यादा सीटें सपा को मिली थी। इसके मद्देनजर भाजपा अबकी बार किसी भी कीमत पर सपा को पछाड़कर इस अंचल में नंबर वन पार्टी बनना चाहती है।


बनारस के बागियों से सक्रिय हुए दिग्गज



प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र को साख की लड़ाई मान चुके भाजपा के सभी दिग्गज अपनी पूरी ताकत इस क्षेत्र में लगाए हुए हैं। माना जा रहा है कि टिकट कटने से नाराज कई बागी नेता इस चुनाव में उनके लिये मुसीबत का सबब बन सकते हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के कई बड़े नेताओं को क्षेत्र में लगा दिया है। पीएम मोदी के सक्रिय हो जाने के बाद से सपा-कांग्रेस गठबंधन भी अपना शक्ति प्रदर्शन दिखाने से नहीं चूका। लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन को देखते हुए विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ऐतिहासिक परिणाम मिलने की उम्मीद लगाए है, ऐसा इसलिए भी है क्योंकि यह पीएम मोदी का लोकसभा क्षेत्र भी है।

लखनऊ। यूपी के चुनावी-रण में आखिरी दौर की ज़ोर आजमाइश में जुटे दिग्गजों ने अपनी पूरी ताकत पूर्वांचल की धड़कन कहे जाने वाले बनारस में झोंक दी है। सबसे बड़ी बात यह है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पिछली चार तारीख से छह तारीख तक डेरा जमाये हुए हैं। भाजपा के लखनऊ स्थित राज्य मुख्यालय को वाराणसी शिफ्ट कर दिया गया है। आपको बता दें कि इस जिले में आठ विधानसभा सीटें हैं। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र से भाजपा की झोली में महज तीन सीटें ही आयीं थी, लेकिन इस बार पीएम मोदी समेत करीब 17 केन्द्रीय मंत्रियों ने अपना डेरा जमा रखा है। आखिरी चरण में होने जा रहे इस क्षेत्र के चुनाव से पहले भाजपा अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने से चूकती नहीं दिख रही है। पूर्वांचल की धुरी कहे जाने वाले और पीएम के संसदीय क्षेत्र में किसी भी तरह के लचर प्रदर्शन से भाजपा विरोधियों को आलोचना का मौका नहीं देना चाहती, जाहिर है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन की कमान संभाल रहे अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने इस क्षेत्र में अपना शक्ति प्रदर्शन दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। दरअसल, पिछली बार के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल में सबसे ज्‍यादा सीटें सपा को मिली थी। इसके मद्देनजर भाजपा अबकी बार किसी भी कीमत पर सपा को पछाड़कर इस अंचल में नंबर वन पार्टी बनना चाहती है। बनारस के बागियों से सक्रिय हुए दिग्गज प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र को साख की लड़ाई मान चुके भाजपा के सभी दिग्गज अपनी पूरी ताकत इस क्षेत्र में लगाए हुए हैं। माना जा रहा है कि टिकट कटने से नाराज कई बागी नेता इस चुनाव में उनके लिये मुसीबत का सबब बन सकते हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के कई बड़े नेताओं को क्षेत्र में लगा दिया है। पीएम मोदी के सक्रिय हो जाने के बाद से सपा-कांग्रेस गठबंधन भी अपना शक्ति प्रदर्शन दिखाने से नहीं चूका। लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन को देखते हुए विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ऐतिहासिक परिणाम मिलने की उम्मीद लगाए है, ऐसा इसलिए भी है क्योंकि यह पीएम मोदी का लोकसभा क्षेत्र भी है।