जानें क्यों 216 प्रसव में नहीं जन्मी एक भी बेटी, जिला प्रशासन में मचा हड़कंप

newborn baby
जाने क्यों 216 प्रसव में नहीं जन्मी एक भी बेटी, जिला प्रशासन में मचा हड़कंप

नई दिल्ली। पहाड़ी क्षेत्र उत्तराखंड के उत्तरकाशी में एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। यहां तीन महीने में 133 गांवों में 216 प्रसव हुए, लेकिन बेटी एक भी नहीं जन्मी। बच्चियों के घटते लिंगानुपात की उत्तरकाशी जिले की ये तस्वीर ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ समेत तमाम अभियानों पर काली स्याही पोतती दिख रही है।

Find Out Why Not A Single Girl Child Born At This Place :

दरअसल,सरकारी आंकड़ों में इस भयावह स्थिति का खुलासा होने पर हरकत में आए जिला प्रशासन ने इसकी पड़ताल शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग सभी जिलों के हर गांव में होने वाले संस्थागत एवं घरेलू प्रसवों का ब्योरा तैयार करता है। बीते अप्रैल से जून के बीच उत्तरकाशी जिले के विभिन्न गांवों में हुए प्रसव की रिपोर्ट सामने आई तो जिम्मेदार अधिकारी भी हैरत में पड़ गए।

मिली जानकारी के मुताबिक जिले के 133 गांवों में तीन माह के भीतर कुल 216 प्रसव हुए, लेकिन चौकानें वाली बात यह है कि इनमें एक भी बिटिया ने जन्म नहीं लिया। सरकारी रिपोर्ट में ही बिगड़ते लिंगानुपात की यह स्थिति सामने आने से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। गुरुवार को गंगोत्री विधायक गोपाल रावत और जिलाधिकारी डॉ.आशीष चौहान ने संबंधित गांवों की आशा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। दोनों ने इस मामले को लेकर आशा कार्यकर्ताओं से बात की और ऐसा होने के कारणों की भी पड़ताल करने की कोशिश की।

इतना ही नहीं डीएम ने बताया कि सभी संबंधित गांवों को रेड जोन में शामिल किया गया है। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं की ओर से भेजी गई रिपोर्ट नियमित रूप से मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए। वहीं, विधायक ने एएनएम एवं आशा कार्यकर्ताओं को आपसी समन्वय एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करने को कहा।

नई दिल्ली। पहाड़ी क्षेत्र उत्तराखंड के उत्तरकाशी में एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। यहां तीन महीने में 133 गांवों में 216 प्रसव हुए, लेकिन बेटी एक भी नहीं जन्मी। बच्चियों के घटते लिंगानुपात की उत्तरकाशी जिले की ये तस्वीर ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ समेत तमाम अभियानों पर काली स्याही पोतती दिख रही है। दरअसल,सरकारी आंकड़ों में इस भयावह स्थिति का खुलासा होने पर हरकत में आए जिला प्रशासन ने इसकी पड़ताल शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग सभी जिलों के हर गांव में होने वाले संस्थागत एवं घरेलू प्रसवों का ब्योरा तैयार करता है। बीते अप्रैल से जून के बीच उत्तरकाशी जिले के विभिन्न गांवों में हुए प्रसव की रिपोर्ट सामने आई तो जिम्मेदार अधिकारी भी हैरत में पड़ गए। मिली जानकारी के मुताबिक जिले के 133 गांवों में तीन माह के भीतर कुल 216 प्रसव हुए, लेकिन चौकानें वाली बात यह है कि इनमें एक भी बिटिया ने जन्म नहीं लिया। सरकारी रिपोर्ट में ही बिगड़ते लिंगानुपात की यह स्थिति सामने आने से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। गुरुवार को गंगोत्री विधायक गोपाल रावत और जिलाधिकारी डॉ.आशीष चौहान ने संबंधित गांवों की आशा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। दोनों ने इस मामले को लेकर आशा कार्यकर्ताओं से बात की और ऐसा होने के कारणों की भी पड़ताल करने की कोशिश की। इतना ही नहीं डीएम ने बताया कि सभी संबंधित गांवों को रेड जोन में शामिल किया गया है। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं की ओर से भेजी गई रिपोर्ट नियमित रूप से मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए। वहीं, विधायक ने एएनएम एवं आशा कार्यकर्ताओं को आपसी समन्वय एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करने को कहा।