पत्थर दिल बने धरती के भगवान, बच्ची को कंधे पर लेकर भटकता रहा पिता

फ़िरोज़ाबाद: यूपी में लगता है स्वास्थ्य विभाग की संवेदनाये शून्य हो गई है फ़िरोज़ाबाद में 12 साल की बच्ची को इलाज के लिए परिजन अपने कंधे पर गंभीर हालत में उठाये 1 घंटे तक घूमते रहे लेकिन उनको न तो एम्बुलेंस मिली और न ही स्ट्रेचर और न ही इलाज मिला।

फ़िरोज़ाबाद जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी में बुखार से पीड़ित 12 साल की बच्ची साधना का इलाज कराने रात को आये दम्पति मिथलेश और रमेश कुमार को हॉस्पिटल कर्मियों के रवैये से उठानी पड़ी खासी परेशानियाँ। इमरजेंसी से 800 मीटर दूर एक दम सुनसान में बने वार्ड तक बच्ची को ले जाने के लिए नहीं मिला कोई स्ट्रेचर व् एम्बुलेंस, परिजन कंधे और अपनी गोद में लटका कर चलते रहे जबकि बच्ची के बोतल भी चढ़ रही थी और थक जाने पर एक दुसरे की गोद में बदलने लगे इस बेकदरी से जुझते हुए परिजन बच्ची को वार्ड में लेकर पहुंचे गंभीर हालत में बच्ची के परिजनों की हताशा निराशा के भाव साफ़ देखे गये।




चेहरे पर गुस्सा निराशा से भरा युवक पैदल ही 12 साल की गंभीर हालत में इलाज के लिए भटक रहा है क्योकि उसे वार्ड में उपचार मिल सके। जब उसने डॉक्टर से कही की हम वार्ड तक कैसे ले जाये तो डॉक्टर ने कहा जेसे लाये हो वेसे ही ले जाओ। हालात गंभीर होने पर बाद में इस बच्ची साधना को आगरा मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया युवक अपनी भतीजी को कंधे पर ही लटकाकर ले गया। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक अब जांच करने की बात कह रह रहे है।

बच्ची की रिस्तेदार ने कहा कि बच्ची की हालत गंभीर है हम यहाँ दिखाने इमरजेंसी में लाये तो उन्होंने कहा कि वार्ड में ले जाओ जब एम्बुलेंस और स्ट्रेचर नही मिली तो डॉक्टर ने कहा कि गोदी में ही ले जाओ। अजय शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, फ़िरोज़ाबाद ने कहा कि ऐसा मामला मेरे संज्ञान में नही है यदि ऐसा हुआ है तो में इसकी जांच करा कर कार्यवाही करूँगा।