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पुलवामा की पहली बरसी: पंकज त्रिपाठी के गांव में लगा मेला, गांव वालों ने नम आंखों से दी श्रद्धांजलि

By रवि तिवारी 
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First Anniversary Of Pulwama Fair Held In Pankaj Tripathis Village Villagers Pay Tribute With Moist Eyes

महराजगंज। शहीद पंकज त्रिपाठी के महराजगंज स्थित गांव हरपुर बेलहिया में पुलवामा हमले की पहली बरसी पर मेला लगा है। इस मौके पर शहीद पंकज त्रिपाठी स्मारक पार्क में शहीद पंकज की मूर्ति के अनावरण और उन्‍हेें श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्‍या में लोग जुटेे हैंं। इससे पहलेे सीआरपीएफ के असिस्टेंट घनश्याम गुरुवार को जवानों के साथ शहीद के घर पहुंचे थेे। उन्‍होंने शहीद की नन्‍हीं बेटी वान्या के नाम से एक लाख रुपये का चेक परिवार को सौंपा।

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पहली बरसी पर शहीद पार्क में अखंड रामायण

शहीद पंकज त्रिपाठी की पहली बरसी पर पूरा परिवार और रिश्तेदार हरपुर बेलहिया में जुटे हैं। इस मौके पर शहीद पार्क में अखंड रामायण का आयोजन भी हुआ। इसमें गांववालों ने बढ़चढ़कर भाग लिया।

पूरे गांव को है गर्व

गांव के लाल के शहादत पर पूरे गांव को गर्व है। खोने का गम भी हर चेहरे पर झलकता है। शहीद के घर में अब पिता ओमप्रकाश त्रिपाठी, मां सुशीला देवी, पत्नी रोहिणी त्रिपाठी, छोटा भाई शुभम त्रिपाठी, बेटा प्रतीक और छह महीने की नन्हीं बच्ची वान्या ही रहते हैं।

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शहादत को सलाम

पंकज त्रिपाठी की शहादत के बाद गांव के सम्पर्क मार्ग का नामकरण शहीद के नाम पर हुआ। गांव के बाहर उनके नाम पर प्रवेश द्वार बनाया गया। शहीद के घर तक आरसीसी की सड़क बन चुकी है। गांव के प्राथमिक विद्यालय का नामकरण शहीद पंकज त्रिपाठी के नाम से कर दिया गया है। गांव में अमर शहीद पंकज त्रिपाठी स्मारक पार्क का निर्माण कराया गया है। पहली बरसी पर इसी पार्क में शहीद पंकज की मूर्ति का अनावरण किया जाएगा। मेला भी लगेगा। शहीद के परिवार की एक मांग अभी पूरी नहीं हो पाई है। शहीद की पत्नी रोहिणी को लक्ष्मीपुर ब्लाक में लिपिक पद की नौकरी मिली है।

शहीद परिवार की मांगें जो पूरी नहीं हुईं

परिवार ने मांग की थी कि शहीद पंकज के छोटे भाई शुभम त्रिपाठी को भी सीआरपीएफ में नौकरी मिले। पिता ओमप्रकाश त्रिपाठी और मां सुशीला देवी को पेंशन दी जाए लेकिन ये मांगें अभी पूरी नहीं की गई हैं। परिवार का कहना है कि अधिकारियों ने आश्‍वासन दिया था। इसके बाद भी इस बारे में अभी तक कुछ नहीं किया गया। शहीद क्रीड़ा स्थल का भी विकास नहीं हो पाया है। न तो चहारदीवारी बनाई गई न ही साफ-सफाई की गई। क्रीड़ास्थल पर झाड़ी उगी हुई है। गोरखपुर-सोनौली राजमार्ग से शहीद पंकज त्रिपाठी के गांव तक जाने वाली पिच सड़क भी अभी तक चौड़ी नहीं की जा सकी है।

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