1. हिन्दी समाचार
  2. जीवन मंत्रा
  3. इस  जून का पहला प्रदोष व्रत; जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

इस  जून का पहला प्रदोष व्रत; जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

भगवान शिव की पूजा-आराधना और उनके प्रति श्रद्धा-भाव सनातन धर्मावलंबियों के जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा है। भगवान शिव की पूजा के लिए भक्तगण निराहार रहकर शिव मंत्रों का जाप करते है। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

First Pradosh Vrat Of This June Know Date Muhurta And Worship Method

लखनऊ : भगवान शिव की पूजा-आराधना और उनके प्रति श्रद्धा-भाव सनातन धर्मावलंबियों के जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा है। भगवान शिव की पूजा के लिए भक्तगण निराहार रहकर शिव मंत्रों का जाप करते है। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। हर वर्ष कुल 24 प्रदोष व्रत रखे जाते हैं इस तरह महीने में दो प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस जून महीने का पहला प्रदोष व्रत: त्रयोदशी तिथि 7 जून सोमवार  सुबह (08:48) से आरंभ होकर 8 जून  मंगलवार (11:24) बजे तक रहेगा।

पढ़ें :- योग दुनिया को भारत की ओर से दिया गया एक अमूल्य उपहार :आनंदीबेन पटेल

हिंदू धर्म के अनुसार, हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है और इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। प्रदोष व्रत , प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना कल्याणकारी माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने के साथ शिव चालीसा, शिव पुराण कथा, शिव मंत्रों का जाप करना भी सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

ऐसी मान्यता है कि जो भक्त इस दिन भगवान शिव की पूजा-आराधना श्रद्धा-भाव के साथ करता है उसके सभी बिगड़े काम बन जाते हैं तथा घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। मान्यता के अनुसार, जो भोलेनाथ की पूजा करता है उसके सभी रोग दूर हो जाते हैं।

सिर्फ फल का सेवन
प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा के बाद फलाहार कर सकते हैं। प्रदोष व्रत में नमक खाने की मनाही होती है। सिर्फ फल का सेवन करना चाहिए।

 

पढ़ें :- Dry Skin के लिए एवोकाडो है बेहद लाभकारी, ऐसे घर में बनाएं Homemade Face Pack

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...
X