रैगिंग के विरोध में छात्र पर जानलेवा हमला, लगे 8 टांके

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चिनहट इलाके में स्थित गोयाल इंस्टीट्यूट में डीफार्मा प्रथम वर्ष के छात्र को रैगिंग का विरोध करना भारी पड़ गया। कालेज के पास एक चाय की दुकान पर हास्टल के छात्रों ने घेरकर छात्र पर हमला कर दिया। दबंग छात्रों ने पीडि़त छात्र को लाठी-डंडे से पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। सूचना पर पहुंचे परिवार वालों ने छात्र को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसके 8 टांके लगे हैं। फिलहाल छात्र ने इस संबंध में अज्ञात छात्राओं के खिलाफ चिनहट कोतवाली में एफआईआर दर्ज करायी है।

First Year D Pharma Student Opposes Ragging :

हजरतगंज के डालीबाग इलाके में राज्य सम्पत्ति विभाग में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संतोष श्रीवास्तव अपने परिवार संग रहते हैं। उनका कहना है कि इस साल उन्होंने अपने बेटे नीतिश श्रीवास्तव का चिनहट के गोयल इंस्टीट्यूट में डीफार्मा ने दाखिला कराया था। कालेज के हास्टल में रहने वाले कुछ सीनियर छात्र ने नीतिश की रैङ्क्षगग का प्रयास किया। इस पर छात्र नीतिश ने विरोध किया।

बताया जाता है कि शनिवार की दोपहर करीब तीन बजे छात्र नीतिश चाय पीने के लिए कालेज के बाहर निकला और एक चाय की दुकान पर पहुंचा। इसी बीच एक दर्जन से अधिक सीनियर छात्र भी वहां पहुंच गये और रैगिंग का विरोध करने पर नीतिश पर लाठी और डंडे से हमला कर दिया। दबंगों ने नीतिश को बड़ी बेरहमी से पीटा। छात्र नीतिश ने मदद के लिए पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया। सूचना मिलते ही मौके पर जैसे ही पुलिस पहुंची आरोपी छात्र वहां से भाग निकले। हमले की खबर पाकर नीतिश के परिवार के लोग भी मौके पर पहुंच गये।

परिवार वालों ने नीतिश को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसके 8 टांके लगे। इलाज के बाद डाक्टरों ने नीतिश को अस्पताल से छुट्टी दे दी। अब इस मामले में घायल छात्र नीतिश ने अज्ञात छात्रों के खिलाफ चिनहट कोतवाली में एफआईआर दर्ज करायी है।

छात्र नीतिश के पिता का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे के बेहतर भविष्य के लिए डीफार्मा में एडमिशन दिलाया था। उनका दर्द है कि अगर सीनियर छात्रों का नीतिश से कोई शिकायत थी तो वह लोग परिवार वालों से या फिर कालेज प्रशासन से सम्पर्क कर सकते थे। इस तरह सड़क पर उनके बेटे पर हमले से परिवार के लोग बेहद नाराज हैं। नीतिश के पिता ने बताया कि अगर इस मामले मेेंं कोई हल नहीं निकला तो वह अपने बेटे का नाम कालेज से कटवा लेेंगे। संतोष का कहना है कि बेटा चाय बेच लेगा पर जान से बढ़कर पढ़ाई नहीं है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चिनहट इलाके में स्थित गोयाल इंस्टीट्यूट में डीफार्मा प्रथम वर्ष के छात्र को रैगिंग का विरोध करना भारी पड़ गया। कालेज के पास एक चाय की दुकान पर हास्टल के छात्रों ने घेरकर छात्र पर हमला कर दिया। दबंग छात्रों ने पीडि़त छात्र को लाठी-डंडे से पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। सूचना पर पहुंचे परिवार वालों ने छात्र को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसके 8 टांके लगे हैं। फिलहाल छात्र ने इस संबंध में अज्ञात छात्राओं के खिलाफ चिनहट कोतवाली में एफआईआर दर्ज करायी है। हजरतगंज के डालीबाग इलाके में राज्य सम्पत्ति विभाग में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संतोष श्रीवास्तव अपने परिवार संग रहते हैं। उनका कहना है कि इस साल उन्होंने अपने बेटे नीतिश श्रीवास्तव का चिनहट के गोयल इंस्टीट्यूट में डीफार्मा ने दाखिला कराया था। कालेज के हास्टल में रहने वाले कुछ सीनियर छात्र ने नीतिश की रैङ्क्षगग का प्रयास किया। इस पर छात्र नीतिश ने विरोध किया। बताया जाता है कि शनिवार की दोपहर करीब तीन बजे छात्र नीतिश चाय पीने के लिए कालेज के बाहर निकला और एक चाय की दुकान पर पहुंचा। इसी बीच एक दर्जन से अधिक सीनियर छात्र भी वहां पहुंच गये और रैगिंग का विरोध करने पर नीतिश पर लाठी और डंडे से हमला कर दिया। दबंगों ने नीतिश को बड़ी बेरहमी से पीटा। छात्र नीतिश ने मदद के लिए पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया। सूचना मिलते ही मौके पर जैसे ही पुलिस पहुंची आरोपी छात्र वहां से भाग निकले। हमले की खबर पाकर नीतिश के परिवार के लोग भी मौके पर पहुंच गये। परिवार वालों ने नीतिश को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसके 8 टांके लगे। इलाज के बाद डाक्टरों ने नीतिश को अस्पताल से छुट्टी दे दी। अब इस मामले में घायल छात्र नीतिश ने अज्ञात छात्रों के खिलाफ चिनहट कोतवाली में एफआईआर दर्ज करायी है। छात्र नीतिश के पिता का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे के बेहतर भविष्य के लिए डीफार्मा में एडमिशन दिलाया था। उनका दर्द है कि अगर सीनियर छात्रों का नीतिश से कोई शिकायत थी तो वह लोग परिवार वालों से या फिर कालेज प्रशासन से सम्पर्क कर सकते थे। इस तरह सड़क पर उनके बेटे पर हमले से परिवार के लोग बेहद नाराज हैं। नीतिश के पिता ने बताया कि अगर इस मामले मेेंं कोई हल नहीं निकला तो वह अपने बेटे का नाम कालेज से कटवा लेेंगे। संतोष का कहना है कि बेटा चाय बेच लेगा पर जान से बढ़कर पढ़ाई नहीं है।