…तो क्या मंत्री पद पाने के लिए पहले ​बनना पड़ेगा ‘बाबा’

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...तो क्या मंत्री पद पाने के लिए पहले ​बनना पड़ेगा 'बाबा'

भोपाल। भोपाल में शिवराज सिंह चौहान जैसे बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दे रही हैं, उससे तो अब यही लग रहा हैं कि राज्यमत्री के लिए क्वालीफिकेशन बाबागिरी ही हो गई है। ये हम नही मध्य प्रदेश की जनता और राज्यमंत्री के पद के दावेदार भाजपा विधायक कह रहे है। ऐसा बोलने की उनके पास मजबूत वजह भी हैं क्योकिं भोपाल में शिवराज सरकार ने पांच बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया है।

बता दें कि बाबा से मंत्री बने लोगों में कम्प्यूटर बाबा, नर्मनानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, भैय्यू महाराज और पंडित योगेन्द्र महाराज था। लेकिन राज्यमंत्री का दर्जा पाने वाले बाबाओं में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय कम्प्यूटर बाबा बने हुए है। सरकार के इस फैसले से नाराज लोगों ने अब उनकी करतूतों को एक—एक कर उजागर करना शुरु कर दिया है।

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बतों दें कि पांच साल पहले जब बाबा सागर आए थे तो उन्होंने तो उन्होने बड़ा शोर—शराबा मचाकर सुर्खियां बटोरी था। इकस मुख्य कारण बाबा का स्टाइल था। बाद मे उन्होने एक महायज्ञ कराने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होने प्रेसकांन्फ्रेंस की। उन्होने प्रेस कांन्फ्रेंस कर बताया कि यह यज्ञ आधुनिकता और आध्यात्मिकता का संगम होगा। उनके करीबी लोगों ने ये बतायाकि इसके लिए उन्होने बुदेलखण्ड के पचास तीर्थस्थलों का भ्रमण किया।

भ्रमण के लिए बुक किया हेलीकॉप्टर

बता दें कि इस महायज्ञ के लिए बाबा ने जितने भी तीर्थस्थलों का भ्रमण किया,वहां जाने के लिए उन्होने इंदौर से 60 हजार रूपए प्रतिघंटे की दर से एक हेलीकॉप्टर बुक किया। जिसके चलते वो चर्चा का केन्द्र बन गए।

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टेंट हाउस के साढ़े तीन लाख रूपए का किया गबन

राज्यमंत्री का दर्जा पाकर चर्चा में आए कम्प्यूटर बाबा ने महायज्ञ के लिए पांच लाख रूपए का टेंट लगवाया था। टेंट मालिक पटेल के मुताबिक उन्होने कुछ पैसा उन्हे दिया, जबकि 3.35 लाख रूपए बाद में देने का कहा। बाद में उन्होने उसका बकाया पैसा नही दिया। पांच साल बीतने के बाद जब पैसा नही मिला तो उन्होने कई बार नोटिस भेजा, लेकिन उसका कोई जवाब नही आया। पीड़ित के मुताबिक बाबा ने बात करने पर बताया कि यज्ञ में ज्यादा लोग नही आए, जिससे चढ़ावे की रकम कम मिली। जिसके चलते उन्होने पैसा देने से इंकार कर दिया।

पेड़ काटने के विवाद में भी फंसे थे बाबा

कम्प्यूटर बाबा जबसे सागर आए तभी से विवादों से घिरे रहे। बताया जाता है कि उन्होने महायज्ञ के दौरान बहुमंजिला इमारत बनवाने के लिए यूकेलिप्टस के कई पेड़ कटवा दिए थे। ये मामले मीडिया को पता चला कि जानकारी वन विभाग को मिली। तब टीम वहां पहुंची और पेड़ के तनों को जब्त कर लिया। इस विवाद क बाद से इस महायज्ञ से राजनीतिक प्रभावशाली लोगों अलग हो गए।

ऐसे बनें कम्प्यूटर बाबा

कम्प्यूटर बाबा का असली नाम नामदेवदास त्यागी है। वो कम्प्यूटर बाबा कैसे बने इस बारे में उनके साथी महंत नृसिंहदास बताते हैं कि तेज दिमाग, स्मार्ट वर्किंग व कार्शशैली के कारण उन्हे ये नाम दिया गया था। जिन धर्मशाला व धार्मिक स्थलों के निर्माण के लिए राशि जुटाने के लिए कई वर्ष लग जाते थे, उनका निर्माण कम्प्यूटर बाबा ने चंद महीनों में ही करा देते थे।

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भोपाल। भोपाल में शिवराज सिंह चौहान जैसे बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दे रही हैं, उससे तो अब यही लग रहा हैं कि राज्यमत्री के लिए क्वालीफिकेशन बाबागिरी ही हो गई है। ये हम नही मध्य प्रदेश की जनता और राज्यमंत्री के पद के दावेदार भाजपा विधायक कह रहे है। ऐसा बोलने की उनके पास मजबूत वजह भी हैं क्योकिं भोपाल में शिवराज सरकार ने पांच बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया है। बता दें कि बाबा से मंत्री…
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