सोने के ईट दबे हैं इस किले के नीचे

भोपाल। जबलपुर में स्थित एक किला, जो पहाड़ो पर निर्मित होने के साथ- साथ उन शासकों के अस्तित्व का साक्षी है, जिन्होंने यहां 11वीं शताब्दी में काफी समय के लिए शासन किया था। जबलपुर का ‘मदन महल किला’ राजा मदन सिंह द्वारा बनवाया गया था जिसे देख आज भी हम उस दौर में राजा के शानों-शौकत के बारे में अंदाजा लगा सकते है। यह किला शहर से करीब दो किमी दूर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है जंहा से आसमान के बदलों को आसानी से निहारा जा सकता है। इस किले को राजा ने बनाया तो था अपनी शानों शौकत के लिए था लेकिन युद्ध और हमलों के कारण इसका इस्तेमाल सेनाएं एक वॉच टावर के रूप में करने लगी।

खंडहर में तब्दील हो चुके इस किले के बारे में यह कहानी प्रचलित है कि यहां सोने की ईटें गड़ी हैं। जिसे खोजने कई लोग खुदाई तक कर चुके हैं पर सफलता आज तक किसी को हाथ नहीं लगी। यह किला राजा की मां रानी दुर्गावती से भी जुड़ा हुआ है, जो कि एक बहादुर गोंड रानी के रूप के जानी जाती है। खंडहर में तब्दील हो चुके इस किले में आज भी आपको शाही नज़ारे देखने को मिल जाएंगे, जैसे कि शाही परिवार का मुख्य कक्ष, युद्ध कक्ष, छोटा सा तालाब और अस्तबल देख सकते हैं। इतिहास के मुताबिक, गोंड राज्य पर लगातार मुगलों द्वारा हमले किए जा रहे थे, जिस कारण इस किले को उस वक्त वॉच टावर के रूप में तब्दील कर दिया गया।




किले से मंडला तक जाती थी एक सुरंग

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मदन महल किले के प्रचलित कहानियों के अनुसार यहां एक गुप्त सुरंग मिली थी, जिसे अब बंद कर दिया गया है। बताया जाता है कि ये सुरंग मंडला जाकर खुलती थी। इस सुरंग के रास्ते रानी दुर्गावती मंडला से इस किले तक आती थीं। वहीं किले का एक रास्ता यहां से पास शारदा मंदिर तक जाता है। कहा जाता है कि रानी दुर्गावती इस मंदिर में पूजा करती थी।




सोने की ईटें गड़ी होने की कहानी…

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मदन महल किले के बारे में एक कहानी यह भी प्रचलित है कि यहां दो सोने की ईटें गड़ी हुई हैं। जिसे अब तक कोई खोज नहीं सका है। दरअसल, यह कहानी “मदन महल की छाँव में, दो टोंगों के बीच। जमा गड़ी नौं लाख की, दो सोने की ईंट।” कहावत के कारण मशहूर होने की बात बताई जाती है। इस रहस्यमय किला टुरिस्ट के आकर्षण का केंद्र वर्षो से बना हुआ है।

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