सीएम शिवराज का नया सियासी दांव, पांच बाबाओं को बनाया मंत्री

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सीएम शिवराज का नया सियासी दांव, पांच बाबाओं को बनाया मंत्री

Five Spiritual Gurus Gets Mos Status In Shivraj Government

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बारे में कहा जाता है कि वह सत्ता हासिल करना जानते हैं। वह 2013 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मध्यप्रदेश की बेटियों को अपनी भांजी बनाकर सीएम मामा बन गए थे, और अपनी भांजियों की शादी और पढ़ाई के लिए सरकारी मदद देकर सत्ता में वापसी कर गए। अब लड़ाई 2018 की है। अपना तीसरा कार्यकाल पूरा कर र​हे शिवराज सिंह चौहान के​ लिए आने वाले चुनावों को जीतना किसी कठिन परीक्षा सरीखा नजर आ रहा है। ऐसी परीक्षा जिसे वह पहले कई बार पास कर चुके हैं, लेकिन अब उस परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम बदल गया है। यह बात सीएम शिवाराज भी समझ चुके हैं। इस परीक्षा को पास रकने के लिए उन्होंने ​साधु संतों की शरण ले डाली है। जिसके लिए उन्होंने मध्य प्रदेश के​ पांच नामी बाबाओं को अपनी सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा दिया है।

बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा देने की रणनीति को समझा जाए तो शिवराज ने इन सभी साधुओं को लेकर नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान हुए कार्यों के निरीक्षण के लिए समिति बनाई थी। जिसके बाद इन सभी साधुओं को राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान कर दिया। राज्यमंत्री बने नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, कम्प्यूटर बाबा, भय्यू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत को शिवराज की नर्मदा यात्रा के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले साधुओं के रूप में देखा जाता रहा है। इन सभी संतों के पास अनुयायियों की अच्छी खासी भीड़ है।

ये सभी संत नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान नर्मदा के किनारे बसे शहरों, कस्बों और गांवों में हुए कार्यों में हुए भ्रष्टाचार को लेकर मुखर थे। अगर कम्प्यूटर बाबा की बात करें तो वह सीएम शिवाराज सिंह चौहान की ओर से चलाई गई 148 दिनों की नर्मदा सेवा यात्रा में हुए भ्रष्टाचार को लेकर लगातार सरकार पर हमलावर रहे हैं। कम्प्यूटर बाबा को राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद उनके सुर जिस तरह से बदले हैं, उसे देखकर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला है। विपक्ष का अरोप है कि शिवराज सिंह चौहान ने नर्मादा सेवा यात्रा में हुए भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए साधु संतों का मुंह बंद करने के लिए राज्यमंत्री का दर्जा दिया है।

अगर 2018 के चुनावों की बात करें तो व्यापम घोटाला, किसानों की आत्महत्या, पुलिस द्वारा किसान आन्दोलनकारियों की गोली मारकर हत्या किया जाना और अब दलितों का विरोध ये ऐसे मुद्दे हैं जिनकी गूंज राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे रही है। अब तक मध्य प्रदेश की सियासत से ऐसे मुद्दे नहीं निकले थे। इस बड़े मुद्दों के बीच कई स्थानीय मुद्दे और शिवराज सरकार के प्रति जनता में मौजूद असंतोष की भावना नजर आती है।

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बारे में कहा जाता है कि वह सत्ता हासिल करना जानते हैं। वह 2013 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मध्यप्रदेश की बेटियों को अपनी भांजी बनाकर सीएम मामा बन गए थे, और अपनी भांजियों की शादी और पढ़ाई के लिए सरकारी मदद देकर सत्ता में वापसी कर गए। अब लड़ाई 2018 की है। अपना तीसरा कार्यकाल पूरा कर र​हे शिवराज सिंह चौहान के​ लिए आने वाले चुनावों को जीतना किसी…