यूपी में भ्रष्टाचार की ‘बाढ़’, 14 करोड़ के बंधे की मरम्मत में उड़ा दिए 100 करोड़

लखनऊ। यूपी में बाढ़ के कहर और सरकारी मशीनरी के काले कारनामों ने आम जनता को जिस हाल में रखा है, उसका ताजा उदाहरण गोंडा जिले में देखने को मिला। यहां घाघरा नदी के कहर ने कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। दूसरी ओर बाढ़ राहत के लिए किए गए सरकारी इंतजाम को सरकारी महकमा हजम कर गया। गांववालों का कहना है कि घाघरा के किनारे के गांवों में बाढ़ की समस्या को देखते हुए मायावती सरकार ने बंधे का निर्माण करवाया गया था, लेकिन उसके बाद भी पूर्व की तरह ही बाढ़ उनकी फसलों और घरों को हर साल उजाड़ कर रही है।

स्थानीय लोगों की माने तो प्रशासनिक और सिंचाई विभाग की लापरवाही से करोड़ों की लागत से बनाया गया एल्गिन-चरसड़ी बांध पहली बारिश में ही धराशायी हो गया। गांव में बाढ़ का पानी घुसते ही लोगों के सामने खाने-पीने, रहने, मवेशियों की सुरक्षा, पशुओं के चारें और पलायन का संकट मुंह बाए खड़ा हो गया है। अब तक सैकड़ों परिवार को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और घाघरा से सटे इलाके के लोग बंधे पर गुजर करने को मजबूर हो गए हैं। फिलहाल बाढ़ का संकट जारी हैं और गांव तालाबों में तब्दील है।

{ यह भी पढ़ें:- ये हैं यूपी के अच्छे पुलिस वाले, एक आईजी दूसरा दारोगा }

बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से किए गए नाकाफी इंतजामों को लेकर खासा असंतुष्टी है। गांववालों की माने तो एल्गिन बंधा विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी है। हर साल गांववालों को भरोसा दिलाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर इस बंधे की मरम्मत का काम कराया जाता है, लेकिन घाघरा के पहले कटान में ही यह बांध टूट जाता है। जिसके पीछे की सबसे बड़ी वजह इस बांध में हर साल होने वाला भ्रष्टाचार है।

जब इस बांध को लेकर प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चंद्रा ने बात की गई तो उन्होंने बताया कि पिछले सरकार के दौरान इस बांध की मरम्मत पर सौ करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। जिसकी पाई-पाई का हिसाब देने का दंभ विभाग भरता तो नजर आता लेकिन उसके दावे बाढ़ में डूबे गांवों को देखने के बाद खोखले नजर आते हैं।

{ यह भी पढ़ें:- 'मुआवजा राशि' के लिए 'मुकर' गए प्रधान, महकमा मौन, मुख्यमंत्री से शिकायत }

14 करोड़ से बना पुल, मरम्मत में लगे 100 करोड़—-

साल 2005 में तत्कालीन बसपा सरकार ने 14 करोड़ की लागत से घाघरा नदी पर एल्गिन-चरसड़ी तटबंध बनाया था। सरकार का दावा था कि इस बांध से जिले के 175 गांव के लाखों लोगों की बाढ़ से सुरक्षा सुनिश्चित होगी। तटबंध बनने के बाद से इन गांवों की जिन्दगी जस की तस है लेकिन इसकी मरम्मत करने के नाम पर यह बांध हर साल ठेकेदारों और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को करोड़ों की कमाई करवा रहा है। सरकारी रिकार्ड को ही सही माने तो 14 करोड़ की लागत से बनने वाले इस बांध की मरम्मत पर​ पिछले पांच सालों में 100 करोड़ से ज्यादा का खर्चा हो चुका है।

कुछ दिन पहले गोंडा का दौरा करने पहुंचे यूपी सरकार के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने इस बांध में निर्माण से लेकर अब तक की मरम्मत में 300 करोड़ रूपये की घोटाले की बात कही थी। उन्होंने इस बांध में हुए करोड़ों के घोटाले पर जांच के आदेश भी दिए हैं।

{ यह भी पढ़ें:- योगी सरकार की बड़ी उपलब्धी, अंग्रेजी वर्णमाला में छाप डाले 31 अक्षर }

बताते चलें कि एल्गिन-चरसड़ी बांध बनने के बाद से अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है। 2012 और 13 में इस बांध के टूटने से 13 और 12 लोग बह गए थे। जिससे उनकी मौत हो गई थी।

Loading...