चहेते अधिकारी को जलनिगम का मुखिया बनाने के लिए तीन महीने तक रोंक दी डीपीसी

up jal nigam
क्या योगीराज में आईएएस ही संभालेंगे सभी विभागों के एमडी का पद ?

लखनउ। अपने मनपंसद अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदो पर विराजमान कराने के लिए योगी सरकार के मंत्री किस हद तक नियमों की ​धज्जियां उड़ाते हैं, इसकी बानगी जल निगम मुख्यालय में देखने को मिली। दरअसल जल निगम के एमडी एके श्रीवास्तव आगामी 30 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं। नियमत: पांच महीने पहले इस पर वरिष्ठता के आधार पर किसी अधिकारी को तैनात कराने के लिए डीपीसी हो जानी चाहिए थी, ऐसा नहीं हुआ।

For The Three Months To Make The Beloved Officer The Head Of The Water Drain The Dpc Postponed :

विभागीय सूत्रों का कहना है कि नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना के इशारे में इस डीपीसी प्रक्रिया पांच महीने के लिए रोंक दिया। सूत्रों की मानें तो बुधवार को इसको लेकर बैठक की जाएगी। वहीं सूत्रों का ये भी कहना है कि मंत्री अपने चहेते अधिकारी को इस कुर्सी पर बैठाने में आमाद थे, लिहाजा कल उक्त अधिकारी का नाम ही एक नंबर पर रखा जाएगा।

बताया जा रहा है कि सीएण्डडीएस के डायरेक्टर राजीव निगम नगर विकास मंत्री की काफी दिनों से गणेश परिक्रमा कर रहे हैं, ताकि उन्हे जलनिगम एमडी की कुर्सी मिल जाए। वहीं सूत्रों का ये भी कहना है कि मंत्री जी ने पूर्ण रूप से आश्वस्त भी कर दिया था। यही वजह थी कि इस अहम बैठक को पांच महीनों तक टाला गया। वहीं सूत्रों का कहना है कि इन दोनों के बीच नोएडा की रहने वाले एक बिचौलिया अहम भूमिका निभा रहा है।

वरीयता की बात की जाए राजीव निगम इस क्रम में तीसरे नंबर पर आते हैं। उनसे वरिष्ठ दो अधिकारी विभाग में मौजूद है। फिर भी नियमों की दरकिनार कर मंत्री जी अपने चहेते को कुर्सी दिलाने पर आमादा हैं।

बता दें कि डीपीसी में इतनी लेटलतीफी देख प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह ने प्रतिनियुक्ति के लिए भी आवेदन कर दिया। जिसके चलते आनन—फानन में डीपीसी कराने का फैसला लिया। अब देखना दिलचस्प होगा कि नियमों के मुताबिक वरिष्ठता सूची के हिसाब से एमडी की तैनाती होती है या​ फिर मंत्री जी अपने मंसूबों में कामयाब होते हुए अपने चहेते को कुर्सी दिलाने में सफल हो जाते है।

लखनउ। अपने मनपंसद अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदो पर विराजमान कराने के लिए योगी सरकार के मंत्री किस हद तक नियमों की ​धज्जियां उड़ाते हैं, इसकी बानगी जल निगम मुख्यालय में देखने को मिली। दरअसल जल निगम के एमडी एके श्रीवास्तव आगामी 30 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं। नियमत: पांच महीने पहले इस पर वरिष्ठता के आधार पर किसी अधिकारी को तैनात कराने के लिए डीपीसी हो जानी चाहिए थी, ऐसा नहीं हुआ। विभागीय सूत्रों का कहना है कि नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना के इशारे में इस डीपीसी प्रक्रिया पांच महीने के लिए रोंक दिया। सूत्रों की मानें तो बुधवार को इसको लेकर बैठक की जाएगी। वहीं सूत्रों का ये भी कहना है कि मंत्री अपने चहेते अधिकारी को इस कुर्सी पर बैठाने में आमाद थे, लिहाजा कल उक्त अधिकारी का नाम ही एक नंबर पर रखा जाएगा। बताया जा रहा है कि सीएण्डडीएस के डायरेक्टर राजीव निगम नगर विकास मंत्री की काफी दिनों से गणेश परिक्रमा कर रहे हैं, ताकि उन्हे जलनिगम एमडी की कुर्सी मिल जाए। वहीं सूत्रों का ये भी कहना है कि मंत्री जी ने पूर्ण रूप से आश्वस्त भी कर दिया था। यही वजह थी कि इस अहम बैठक को पांच महीनों तक टाला गया। वहीं सूत्रों का कहना है कि इन दोनों के बीच नोएडा की रहने वाले एक बिचौलिया अहम भूमिका निभा रहा है। वरीयता की बात की जाए राजीव निगम इस क्रम में तीसरे नंबर पर आते हैं। उनसे वरिष्ठ दो अधिकारी विभाग में मौजूद है। फिर भी नियमों की दरकिनार कर मंत्री जी अपने चहेते को कुर्सी दिलाने पर आमादा हैं। बता दें कि डीपीसी में इतनी लेटलतीफी देख प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह ने प्रतिनियुक्ति के लिए भी आवेदन कर दिया। जिसके चलते आनन—फानन में डीपीसी कराने का फैसला लिया। अब देखना दिलचस्प होगा कि नियमों के मुताबिक वरिष्ठता सूची के हिसाब से एमडी की तैनाती होती है या​ फिर मंत्री जी अपने मंसूबों में कामयाब होते हुए अपने चहेते को कुर्सी दिलाने में सफल हो जाते है।