इसलिए नहीं दिखता अब लोगों के हाथों में नोकिया का फोन , वजह जानकार रह जाएंगे हैरान

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इसलिए नहीं दिखता अब लोगों के हाथों में नोकिया का फोन , वजह जानकार रह जाएंगे हैरान

लखनऊ। टेलीकम्यूनिकेशन के मामले में नोकिया एक ऐसी हिट कंपनी थी जिससे हर कोई वाकिफ था लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ जिसके वजह से नोकिया आज लोगों के हाथों में नहीं दिखाई देता। आज हम आपको बताएंगे कि कैसे मार्केट में इसका चलन तेज़ी से शुरू हुआ था और फिर अचानक नोकिया का क्रेज़ ख़त्म हो गया।

For This Reason Nokia Phones Not Seen In Anyone Hand :

आपको बता दें कि 1865 में नोकिया कंपनी ने फिनलैंड में वूड पल्प का बिजनेस स्टार्ट किया, जिसके बाद नोकिया ने केबल इंडस्ट्री, रबर इंडस्ट्री जैसे कई दूसरे कंपनी के साथ बिजनेस शुरू किया था। 1960 में कोल्ड वॉर सातवें आसमान पर था और USSR अपने न्यूक्लियर बॉम्ब को टेस्ट कर रहा था और अमेरिका अपने बॉम्ब को, जिसके चलते पूरी दुनिया में परेशानी की वजह बनी हुई थी। उस वक़्त फ़िनलैंड इस बात को भांप रहा था। तभी फिनलैंड की सरकार ने तय किया की मिलिट्री परपस के लिए रेडियो और टेलीकम्युनिकेशन में रिसर्च की ज़रूरत है। तभी इसका कांट्रैक्ट नोकिया को मिला। नोकिया ने इस काम को बखूबी अंजाम दिया।

जिसके बाद से नोकिया ने ये तय किया कि अब वो सिर्फ टेली कम्युनिकेशन पर ही काम करेगी। 1992 में नोकिया के सीईओ पद को jorma ollila ने संभाला और जोरमा ने 1992 में ‘नोकिया 1011’ लॉंच किया जो जीएसएम टेकनोंलॉजी को सपोर्ट करता था। उसके बाद नोकिया ने 1997 में एक ऐसा फोन लॉंच किया जिसमें snake game भी मौजूद था। इसके बाद से नोकिया ने कई अलग-अलग फीचर्स और सॉफ्टवेर के साथ फोन लॉंच करती रही और मार्केट में अच्छा बिजनेस किया।

नोकिया उस वक़्त मार्केट में ऐसे गिरा जब 2007 में एप्पल ने iphone लॉंच किया तो नोकिया की विनिर्माण अचानक से कम हो गई। जिसके बाद नोकिया ने iphone के मुक़ाबले nokia 5800 लॉंच किया मगर इसमें रिवर्सेबल टच होने की वजह से लोगों में इसकी पसंद कम हो गयी।

2008 में stephon elop ने माइक्रोसॉफ़्ट के साथ 2008 से 2010 तक काम किया। इससे पहले 2005 में stephon माइक्रोमीडिया से जुड़े हुए थे। stephon के आने के बाद नोकिया ने माइक्रोसॉफ़्ट की तरफ रुख किया जिसके बाद उसने कई लेटेस्ट फोन लॉंच किए मगर तबतक दूसरी कंपनियां काफी आगे निकल चुकी थी। तब नोकिया में 24% तक की गिरावट आ चुकी थी। उस वक़्त लोगों को ऐप्स चाहिए था लेकिन गूगल और ऐप्पल के मुक़ाबले विंडो ऐप के पास इतना बड़ा स्टोर नहीं था। जिसके चलते नोकिया का क्रेज़ लोगों में खत्म हो गया और नोकिया अपनी आखिरी सांसे लेने लगा। 2013 में माइक्रोसॉफ़्ट ने ऐलान किया कि वो नोकिया फोन के डिविजन को 7 बिलियन डॉलर में खरीदेगा। इस तरह से नोकिया का क्रेज़ ख़त्म होने के बाद आज लोगों के हाथ में नोकिया नहीं दिखाई देता है।

इस विडियों में आप नोकिया की पूरी डिटेल में पूरी जानकारी देख सकते हैं…..

लखनऊ। टेलीकम्यूनिकेशन के मामले में नोकिया एक ऐसी हिट कंपनी थी जिससे हर कोई वाकिफ था लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ जिसके वजह से नोकिया आज लोगों के हाथों में नहीं दिखाई देता। आज हम आपको बताएंगे कि कैसे मार्केट में इसका चलन तेज़ी से शुरू हुआ था और फिर अचानक नोकिया का क्रेज़ ख़त्म हो गया।

आपको बता दें कि 1865 में नोकिया कंपनी ने फिनलैंड में वूड पल्प का बिजनेस स्टार्ट किया, जिसके बाद नोकिया ने केबल इंडस्ट्री, रबर इंडस्ट्री जैसे कई दूसरे कंपनी के साथ बिजनेस शुरू किया था। 1960 में कोल्ड वॉर सातवें आसमान पर था और USSR अपने न्यूक्लियर बॉम्ब को टेस्ट कर रहा था और अमेरिका अपने बॉम्ब को, जिसके चलते पूरी दुनिया में परेशानी की वजह बनी हुई थी। उस वक़्त फ़िनलैंड इस बात को भांप रहा था। तभी फिनलैंड की सरकार ने तय किया की मिलिट्री परपस के लिए रेडियो और टेलीकम्युनिकेशन में रिसर्च की ज़रूरत है। तभी इसका कांट्रैक्ट नोकिया को मिला। नोकिया ने इस काम को बखूबी अंजाम दिया।

जिसके बाद से नोकिया ने ये तय किया कि अब वो सिर्फ टेली कम्युनिकेशन पर ही काम करेगी। 1992 में नोकिया के सीईओ पद को jorma ollila ने संभाला और जोरमा ने 1992 में 'नोकिया 1011' लॉंच किया जो जीएसएम टेकनोंलॉजी को सपोर्ट करता था। उसके बाद नोकिया ने 1997 में एक ऐसा फोन लॉंच किया जिसमें snake game भी मौजूद था। इसके बाद से नोकिया ने कई अलग-अलग फीचर्स और सॉफ्टवेर के साथ फोन लॉंच करती रही और मार्केट में अच्छा बिजनेस किया।

नोकिया उस वक़्त मार्केट में ऐसे गिरा जब 2007 में एप्पल ने iphone लॉंच किया तो नोकिया की विनिर्माण अचानक से कम हो गई। जिसके बाद नोकिया ने iphone के मुक़ाबले nokia 5800 लॉंच किया मगर इसमें रिवर्सेबल टच होने की वजह से लोगों में इसकी पसंद कम हो गयी।

2008 में stephon elop ने माइक्रोसॉफ़्ट के साथ 2008 से 2010 तक काम किया। इससे पहले 2005 में stephon माइक्रोमीडिया से जुड़े हुए थे। stephon के आने के बाद नोकिया ने माइक्रोसॉफ़्ट की तरफ रुख किया जिसके बाद उसने कई लेटेस्ट फोन लॉंच किए मगर तबतक दूसरी कंपनियां काफी आगे निकल चुकी थी। तब नोकिया में 24% तक की गिरावट आ चुकी थी। उस वक़्त लोगों को ऐप्स चाहिए था लेकिन गूगल और ऐप्पल के मुक़ाबले विंडो ऐप के पास इतना बड़ा स्टोर नहीं था। जिसके चलते नोकिया का क्रेज़ लोगों में खत्म हो गया और नोकिया अपनी आखिरी सांसे लेने लगा। 2013 में माइक्रोसॉफ़्ट ने ऐलान किया कि वो नोकिया फोन के डिविजन को 7 बिलियन डॉलर में खरीदेगा। इस तरह से नोकिया का क्रेज़ ख़त्म होने के बाद आज लोगों के हाथ में नोकिया नहीं दिखाई देता है।

इस विडियों में आप नोकिया की पूरी डिटेल में पूरी जानकारी देख सकते हैं…..

https://www.youtube.com/watch?v=927RHTVBIm0