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पूर्व चीफ इंजीनियर अरुण मिश्रा ने NGO में खपाई 400 करोड़ की कमाई, आयकर जांच में खुलासा

Former Chief Engineer Arun Mishra

By शिव मौर्या 
Updated Date

कानपुर। यूपीएसआईडीसी के पूर्व चीफ इंजीनियर अरुण कुमार मिश्रा पर आयकर का शिकंजा कसता जा रहा है। आयकर की जांच में अरुण की काली कमाई का खुलासा परत दर परत हो रहा है। जांच में सामने आया कि अरुण ने काली कमाई सफेद करने के लिए गैर सरकारी संगठन (एनजीओ), सोसाइटी और ट्रस्ट बनाए थे। इनके जरिए अरुण ने करीब 400 करोड़ रुपए की कमाई खपाई है। इसके साथ ही यह भी आशंका है कि, लखनऊ में कुर्सी रोड़ स्थित एशियन इंस्टीट्यूट में अघोषित कमाई का निवेश किया गया है। वहीं, ट्रेनिका सिटी में 400 करोड़ के घपले की फाइलें भी जल्द खुलने वाली हैं, जिसके बाद अरुण पर और ज्यादा शिकंजा कसेगा।

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पूर्व चीफ इंजीनियर अरुण मिश्रा की काली कमाई की जांच कर रही आयकर ने लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विशालखंड में उसके आवास को जांच के घेरे में ले लिया है। सूत्र बतातें हैं कि, जल्द ही यहां पर आयकर छापेमारी कर अरुण की काली कमाई से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में ले सकती है। वहीं, अरुण के एनजीओ का भी आयकर विभाग को पता लगा है। एनजीओ में अरुण के परिवार के सभी सदस्य मुख्य पदों पर हैं।

आयकर काली कमाई को सफेद बनाने की आशंका के साथ ट्रस्ट की पड़ताल की जा रही है। आयकर सूत्रों की माने तो अरुण का नाम ट्रेनिका सिटी के 400 करोड़ घोटाले के साथ वर्ष 2007 में हुए एक अन्य घोटाले में भी है। जांच कर रही आयकर यह पता लगाने में जुटी है कि अरुण की संपत्तियों का स्रोत क्या हैं और कहीं घोटाले की रकम से ही तो इन्हें नहीं खरीदा गया है।

300 करोड़ के घोटाले में भी चल रही जांच
यूपीएसआईडीसी के पूर्व चीफ इंजीनियर अरुण मिश्रा पहले भी घोटालों को लेकर चर्चा में आए थे। करीब 300 करोड़ के घोटाले के आरोपित मिश्रा के खिलाफ सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय व विभागीय जांचें चल रही हैं।

नियमों को दरकिनार करके होता रहा प्रमोशन
अरुण मिश्रा ने यूपीएसआईडीसी के साथ अपना सफर 1986 में सहायक अभियंता, सिविल (अस्थायी) के पद से शुरू किया था। हालांकि अनियमितताओं के कारण उन्हें 1987 में सस्पेंड कर दिया गया था। तेरह साल बाद वह सीधे अधिशासी अभियंता बन गए, जबकि उनके साथ के सहायक अभियंता उसी पद पर रहे। वहीं इसको लेकर जमकर हंगामा भी हुआ था। उनका प्रमोशन वरिष्ठता के आधार पर न होकर श्रेष्ठता के आधार पर हुआ। हद तब हो गई, जब तीन साल के अंदर अरुण सीधे मुख्य अभियंता बन गए। इसके बाद जमकर बवाल हुआ था।

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