नोटबंदी नहीं, एनपीए और रघुराम राजन की वजह से कम हुई विकास दर : नीति आयोग

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नोटबंदी नहीं, एनपीए और रघुराम राजन की वजह से कम हुई विकास दर : नीति आयोग

नई दिल्ली। नोटबंदी को विकासदर गिरने का कारण बताने वालों का मुंह नीति आयोग ने बंद करा दिया है। नीति आयोग ने कम आर्थिक विकास दर का जिम्मेदार रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम और एनपीए को इसका जिम्मेदार बताया है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सोमवार को कहा कि रघुराम राजन की नीतियों की वजह से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर असर पड़ा है. कुमार ने कहा कि विकास दर के घटने की एक बड़ी वजह बैंकिंग क्षेत्र का बढ़ता एनपीए है।

Former Rbi Governor Raghuram Rajans Policies Are Resposible For Growth Declining Says Niti Ayog :

नीति आयोग के उपाध्यक्ष नेकहा जब वर्ष 2014 में वर्तमान सरकार ने कामकाज संभाला था तब बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (NPA) का आंकड़ा 4 लाख करोड़ रुपए था। बाद में वर्ष 2017 के मध्य तक बढ़कर साढ़े 10 लाख करोड़ रुपए हो गया। इसका असर यह हुआ कि बैंक छोटे और मध्यम उद्योग को बैंकों ने लोन देना काफी कम कर दिया।

नोटबंदी के कारण विकास दर के घटने की चर्चा पर कुमार का कहना है कि इस तरह की बातें बिल्कुल गलत हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप विकास दर के आंकड़ों के देखें तो पाएंगे कि नोटबंदी के बाद जो जीडीपी दर में कमी देखने को मिली उसका कारण नोटबंदी नहीं था, बल्कि पिछले छह तिमाहियों से अर्थव्यवस्था में लगातार सुस्ती के चले आ रहे ट्रेंड की वजह से था।

इसके बाद पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि एनडीए सरकार ने कितना कर्ज दिया है और उनमें से कितनी राशि डूब गई। इसका खुलासा किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एनडीए सरकार के दौरान दिए गए उन कर्जों का खुलासा करने की मांग की, जो गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) में तब्दील हो चुके हैं।

नई दिल्ली। नोटबंदी को विकासदर गिरने का कारण बताने वालों का मुंह नीति आयोग ने बंद करा दिया है। नीति आयोग ने कम आर्थिक विकास दर का जिम्मेदार रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम और एनपीए को इसका जिम्मेदार बताया है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सोमवार को कहा कि रघुराम राजन की नीतियों की वजह से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर असर पड़ा है. कुमार ने कहा कि विकास दर के घटने की एक बड़ी वजह बैंकिंग क्षेत्र का बढ़ता एनपीए है।नीति आयोग के उपाध्यक्ष नेकहा जब वर्ष 2014 में वर्तमान सरकार ने कामकाज संभाला था तब बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (NPA) का आंकड़ा 4 लाख करोड़ रुपए था। बाद में वर्ष 2017 के मध्य तक बढ़कर साढ़े 10 लाख करोड़ रुपए हो गया। इसका असर यह हुआ कि बैंक छोटे और मध्यम उद्योग को बैंकों ने लोन देना काफी कम कर दिया।नोटबंदी के कारण विकास दर के घटने की चर्चा पर कुमार का कहना है कि इस तरह की बातें बिल्कुल गलत हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप विकास दर के आंकड़ों के देखें तो पाएंगे कि नोटबंदी के बाद जो जीडीपी दर में कमी देखने को मिली उसका कारण नोटबंदी नहीं था, बल्कि पिछले छह तिमाहियों से अर्थव्यवस्था में लगातार सुस्ती के चले आ रहे ट्रेंड की वजह से था।इसके बाद पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि एनडीए सरकार ने कितना कर्ज दिया है और उनमें से कितनी राशि डूब गई। इसका खुलासा किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एनडीए सरकार के दौरान दिए गए उन कर्जों का खुलासा करने की मांग की, जो गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) में तब्दील हो चुके हैं।