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जासूसी केस में गलत तरीके से फंसे पूर्व वैज्ञनिक, बेकसूर निकले तो मिला 1.3 करोड़ का मुआवजा

Former Scientist Caught Wrongly In Espionage Case Gets Compensation Of 1 3 Crores If Left Innocent

By शिव मौर्या 
Updated Date

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व वै​ज्ञानिक नंबी नारायण को केरल सरकार ने 1.30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा सौंपा है। पूर्व वैज्ञानिक को 26 वर्ष पूर्व 1994 में जासूसी के झूठे मामले में फंसाया गया था। इस मामले में वह बेकसूर निकले थे।

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नबी नारायण द्वारा अपनी अवैध गिरफ्तारी और उत्पीड़न की क्षतिपूर्ति के लिए एक अदालत में राशि बढ़ाने के लिए दायर किए गए मामले को निपटाने के क्रम में सौंपा गया। नंबी नारायणन के इस मामले में 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि उनकी गिरफ्तारी गलत है। साथ ही उन्‍हें 50 लाख रुपये की अंतरिम राशि राहत के तौर पर देने को कहा था।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उन्हें अलग से 10 लाख रुपये का मुआवजा सौंपे जाने की सिफारिश की थी। इसके बाद नंबी ने तिरुवनंतपुरम के सेशन कोर्ट में एक केस दायर किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पूर्व वैज्ञानिक नबी नारायण को केरल सरकार के पूर्व मुख्य सचिव के जयकुमार को इस मामले को देखने और एक उपयुक्‍त मुआवजा राशि तय करने के लिए कहा था।

बाद में अदालत के समक्ष उनके सुझाव प्रस्तुत किए गए और समझौता किया गया। चेक मिलने के बाद नंबी नारायणन ने कहा, मैं खुश हूं. यह सिर्फ मेरे द्वारा लड़ी गई पैसे के लिए लड़ाई नहीं है। मेरी लड़ाई अन्याय के खिलाफ थी।

गौरतलब है कि, पूर्व वैज्ञानिक पर आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने अंतरिक्ष कार्यक्रम सं संबंधित कुछ बेहद गोपनीय दस्तावेजों को अन्य देशों को दिया है। नारायणन को दो महीने जेल में रहना पड़ा था। बाद में सीबीआई ने कहा था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप मिथ्या हैं। सीबीआई से पहले इस मामले की जांच केरल पुलिस कर रही थी।

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