फोर्टिस हॉस्पिटल बेंच रहा है 500 से 1700 प्रतिशत मंहगी दवाएं

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फोर्टिस हॉस्पिटल बेंच रहा है 500 से 1700 प्रतिशत मंहगी दवाएं

Fortis Memorial Hospital Gurugram Selling Medicines On 500 To 1700 Percent Margin

नई दिल्ली। फाइव स्टार कहलाने वाले कार्पोरेट हॉस्पिटल आम लोगों की जेबों पर जमकर डाका डाल रहे हैं। ये लूट खुलेआम हो रही है, लेकिन इन अस्पतालों की मनमानी पर लगाम कसने वाला कोई नजर नहीं आता। हाल ही में गुरुग्राम के फोर्टिस मैमोरियल हॉस्पिटल में सामने आए डेंगू पीड़िता बच्ची आध्या की मौत के मामले ने इस फाइव स्टॉर हॉस्पिटल की कारगुजारी को उजागर करने का काम किया है।

डेंगू से पीड़ित रही आध्या के पिता जयन्त सिंह के मुताबिक उन्होंने अपनी बेटी को 31 अगस्त को फोर्टिस अस्पताल में भर्ती करवाया था, जहां 14 दिन बाद उनकी बेटी की मौत हो गई थी। फोर्टिस अस्पताल ने 15 दिनों के ​इलाज के लिए उन्हें 16 लाख से ज्यादा का बिल थमाया था।

बेटी की मौत के बाद जयन्त सिंह ने फोर्टिस हॉस्पिटल की इस लूट के खिलाफ नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथोरिटी (NPPA) के समक्ष शिकायत दर्ज करवाई थी। जिसकी जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

फोर्टिस हॉस्पिटल की ओर से मिले 16 लाख के बिल में 1600 मेडिकल दस्तानों के साथ 660 सिरिंजों को ​शामिल किया गया था। पहला सवाल इन आइटमों की संख्या पर उठा, तो दूसरा सवाल इन आइटमों की कीमत पर।

किसी भी सामान्य व्यक्ति को मेडिकल स्टोर पर ये सामान लेने के लिए भेजेंगे तो दोनों चीजों के लिए 10 से 15 रूपए काफी हैं। बहुत अच्छी श्रेणी का लेंगे तो यह कीमत 20 से 22 रुपए हो जाएगी। लेकिन फोर्टिस अस्पताल में एक सिरिंज की कीमत ही 200 रुपए है, जिसके बाद आप मुनाफे का अंदाजा लगा सकते हैं।

शुक्रवार को एनपीपीए की ओर से जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक फोर्टिस हॉस्पिटल अपने बिल में एक सिरिंज की कीमत 200 रूपए लगाता है। यानी 660 सिरिंज की कीमत 1,32,000 रुपए। एनपीपीए की जांच में सामने आया है कि वास्तविकता में फोर्टिस हॉस्पिटल ने जिस सिरिंज को निर्माता कंपनी से 15 रूपए कीमत पर खरीदता है, उसे 200 रूपए कीमत पर मरीज को बेंचा जाता है। वहीं हॉस्पिटल के सिरिंज सप्लायर द्वारा दिए बयान को सच माना जाए तो फोर्टिस को यह सिरिंज करीब 12 रुपए की पड़ती होगी क्योंकि सिरिंज सप्लायर की ओर से बड़ी खरीद पर डील स्कीम के तहत कुछ सिरिंज अतिरिक्त दी जातीं हैं।

एनपीपीए की जांच में आध्या के इलाज के बिल में शामिल किए गए करीब 96 अइटमों में से 77 पर फोर्टिस अस्पताल ने 114 से 1737 प्रतिशत का मुनाफा कमाया है। मुनाफे को इनकी संख्या को भी बढ़ा दिया गया है।

देशभर में दवाओं की कीमतों की निगरानी करने वाली इस संस्था की जांच रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई के मुताबिक फोर्टिस हॉस्पिटल में सिड्यूल्ड ड्रग्स की श्रेणी में आने वाली 39 में 36 दवाओं पर 18 से 343 प्रतिशत का मुनाफा कमाया जा रहा है। जबकि सरकारी नियम के अनुसार इन दवाओं की बिक्री पर अधिकतम 16 फीसदी मुनाफा कमाया जा सकता है।

एनपीपीए की रिपोर्ट के मुताबिक 41 नॉन सिड्यूल्ड दवाओं के मामले में फोर्टिस का रिकार्ड और भी शानदार है। 41 नॉन सिड्यूल्ड दवाओं में से 20 दवाएं ऐसी हैं जिन पर हॉस्पिटल अपने खरीद मूल्य से 111 से 919 प्रतिशत ज्यादा कीमत मरीज से बसूल करता है।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित पिता द्वारा एनपीपीए में शिकायत करने के बाद फोर्टिस हॉस्पिटल की ओर उन्हें घूंस देने की कोशिश की गई। हॉस्पिटल ने उन्हें 10 लाख रूपए का हॉस्पिटल बिल चेक के माध्यम से रिफंड करने और 25 लाख रूपए नगद देने का आॅफर दिया गया।

अब देखना ये होगा कि दवाओं पर मनमानी कीमत बसूलने के मामले में एनपीपीए फोर्टिस अस्पताल पर क्या कार्रवाई करता है ये देखने वाली बात होगी।

नई दिल्ली। फाइव स्टार कहलाने वाले कार्पोरेट हॉस्पिटल आम लोगों की जेबों पर जमकर डाका डाल रहे हैं। ये लूट खुलेआम हो रही है, लेकिन इन अस्पतालों की मनमानी पर लगाम कसने वाला कोई नजर नहीं आता। हाल ही में गुरुग्राम के फोर्टिस मैमोरियल हॉस्पिटल में सामने आए डेंगू पीड़िता बच्ची आध्या की मौत के मामले ने इस फाइव स्टॉर हॉस्पिटल की कारगुजारी को उजागर करने का काम किया है। डेंगू से पीड़ित रही आध्या के पिता जयन्त सिंह के मुताबिक…