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दैनिक अखबार के प्रधान सम्पादक दीपक द्विवेदी व मुद्रक प्रकाशक ललन मिश्रा के खिलाफ धोखाधडी का मुकदमा

Fraud Case Against Dipak Dwivedi The Editor In Chief Of The Daily Newspaper And Lalan Mishra The Printer Publisher

By Shehzad Ansari 
Updated Date

लखनऊ। उत्तरप्रदेश के एक दैनिक अखबार के प्रकाशन में फर्जी दस्तावेज बनाकर लाखो रूपये की ठगी के मामले में दैनिक अखबार नोएडा व लखनऊ के प्रधान सम्पादक दीपक द्विवेदी पुत्र हरीशंकर द्विवेदी व मुद्रक प्रकाशक ललनकुमार मिश्रा पुत्र नामालूम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 406 के तहत जिला वाराणसी के थाना लंका में 17 मई 20 को दैनिक अखबार वाराणसी संस्करण के स्थानीय सम्पादक डा0 वरूण उपाध्याय ने इन दोनो नटवरलालो के कारनामों का पर्दाफाश करते हुए निडर होकर इनके खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

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मजेदार बात यह है कि इस फर्जीवाडे में आरोपियो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से वाराणसी संस्करण के उदघाटन कराने का भी झांसा पीडित को दिया था। मांमला प्रधानमंत्री के नाम से जुडा था तो इसलिए पुलिस के आला अधिकारियो ने तहरीर मिलने के बाद सच्चाई का पता लगाया। लगभग एक सप्ताह के मथन के बाद आला अधिकारियो को प्रथम दृष्टया यह मामला न्याय संगत लगा तो रविवार 17 मई 2020 को इन दोनो बावर्ची से खरबची बने नटवरलालों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश वाराणसी जनपद के थानाध्यक्ष लंका को जारी किया। मामला दर्ज होते ही दैनिक अखबार उत्तर प्रदेश के लखनऊ और नोएडा संस्करण में हडकंप मचा हुआ है। ललन मिश्रा और दीपक द्विवेदी को आखिरी अंजाम तक पहुंचाने के लिए वाराणसी पुलिस ने इनके ठिकानो पर दबिश डालने के लिए पुलिस की कई टीमे रवाना कर दी है और इस सिलसिले में नोएडा पुलिस से भी वाराणसी पुलिस ने इनकी धरपकड के लिए सहयोग मांगा है।

पीडित डा0 वरूण कुमार उपाध्याय ने लंका थाना में दर्ज करायी गयी रिपोर्ट में लगभग 96 लाख तीस हजार की ठगी व धोखाधडी को तफसील के साथ उल्लेख किया है। डा0 वरूण ने आरोप लगाया है कि जब 2019 में उन्हें वाराणसी का ब्यूरो चीफ बनाया गया था तो उसके ऐवज में भी ललन कुमार मिश्रा ने अपने आप को दैनिक अखबार का निदेशक बताकर मोटी रकम ऐंठी थी। इसी कडी में डा. वरूण से ललन कुमार मिश्रा ने 50 हजार और दस हजार के दो चैक 19 फरवरी 2020 को लिए थे,सैतीस हजार रूपये का चैक 29 मार्च 2019 को दैनिक अखबार लखनऊ व मनुश्री क्रिएशन्स के खाते में जमा कराये थे और तीन हजार नकद दैनिक अखबार लखनऊ कार्यालय में जमा कराये थे। मोटी रकम वसूल करने के बाद उन्हें दैनिक अखबार वाराणसी का ब्यूरो चीफ का पहचान पत्र दिया गया।

डा0 वरुण के अनुसार दैनिक अखबार में इन बहरुपियों ने रुपए लेकर आई कार्ड जारी करने का कारखाना चलाया रखा था। जब ललन कुमार मिश्रा को यह पता चला कि डा. वरूण उपाध्याय पैसे वाले आदमी है तो ललन ने एक षडयंत्र के तहत अगस्त 2019 में डा. वरूण उपाध्याय की भेंट दीपक द्विवेदी से उनका यह परिचय करके करायी कि दीपक दैनिक अखबार उत्तर प्रदेश के स्वामी है और वाराणसी से दैनिक अखबार का संस्करण शुरू करना चाहते है और इसका सम्पादक भी आपको बनाया जायेगा। इस बातचीत में यह तय हुआ कि पांच वर्ष की लीज पर तीस लाख रूपये में इस अखबार का संस्करण आपको सौंपा जायेगा।

दीपक और ललन के सब्जबाग से आश्वस्त होकर डा. वरूण उपाध्याय ने 15 लाख दैनिक अखबार नोएडा के एचडीएफसी बैंक में व आठ लाख रूपये नकद किश्तो में जमा कराये। आपको बता दे कि तीस लाख की लीज संबंधी प्रपत्र खुद ललन मिश्रा ने गैर कानूनी ढंग से तैयार किया जो दीपक द्विवेदी को सम्बोधित था। यह अनुबंध मूल स्वामी संजय अग्रवाल ही कर सकते थे, ललन मिश्रा एक मामूली कर्मचारी है अनुबंध का कार्य विधिक रूप से करने के लिए वह अधिकृत नही था।

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खास बात यह है कि वाराणसी संस्करण का उदघाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कराने के नाम पर इन दोनो नटवर लालो ने डा. वरूण से सिंडिकेट बैंक का चेक अंकन पांच लाख रूपये अलग से वसूले थे। मजे की बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा वाराणसी संस्करण का उदघाटन नही हुआ अलबत्ता 29 सितम्बर 2019 को मुद्रक प्रकाशक ललन कुमार मिश्रा खुद मुख्य अतिथि बनकर वाराणसी संस्करण का उदघाटन कर आये। खास बात यह है कि वाराणसी संस्करण का घोषणा पत्र भी ललन ने खुद जिलाधिकारी वाराणसी कार्यालय में जमा किया था। जबकि इस घोषणा पत्र को जमा करने का अधिकार सिर्फ दैनिक अखबार के मूल स्वामी संजय अग्रवाल के पास था। मनुश्री क्रिएशन्स नामक कम्पनी के पास दैनिक अखबार के नोएडा और लखनऊ संस्करण को चलाने का अधिकार संजय अग्रवाल ने दिया हुआ है। वाराणसी संस्करण के प्रकाशन का घोषणा पत्र मूल स्वामी संजय अग्रवाल ही जमा कर सकते थे।

जब इस जालसाजी का आभास डा. वरूण उपाध्याय को हुआ तो डा0 वरूण ने 4 फरवरी 2020 एक कानूनी नोटिस ललन कुमार मिश्रा और दीपक द्विवेदी को भेजकर वाराणसी संस्करण पर अब तक नकद व प्रकाशन आदि पर खर्च हुए लगभग 96 लाख रूपये वापस करने के लिए कानूनी नोटिस भेजा गया था लेकिन बेशर्मो ने कोई जवाब नही दिया जिसके बाद डा0 वरुण ने इस नोटिस की प्रतिलिपि दैनिक अखबार उत्तर प्रदेश के मूल स्वामी संजय अग्रवाल को भी भेजी गयी थी। माना जा रहा है कि दैनिक अखबार नोएडा के स्वामी संजय अग्रवाल की सक्रियता के बाद दीपक द्विवेदी व ललन मिश्रा के कारनामों का पर्दाफाश हुआ है। इन नटवरलालों के कारनामें का पर्दाफाश होने से अब इनकी उल्टी गिनती शुरू हो गई है और इनके द्वारा ठगी के शिकार अन्य पीड़ितों ने भी इनके खिलाफ बदायूं, मुरादाबाद, बरेली, आगरा आदि स्थानों पर भी रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है।

शहजाद अंसारी कि विशेष रिपोर्ट

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