मिलीभगत : जालसाज कंपनी ने किया था इन्वेस्टर्स समिट में 15 सौ करोड़ का एमओयू

invester summit 2018
मिलीभगत : जालसाज कंपनी ने किया था इन्वेस्टर्स समिट में 15 सौ करोड़ का एमओयू

लखनऊ। जिस कंपनी ने एक निजी बैंक से करोड़ों रूपए की ठगी की, उसी कंपनी ने उत्तर प्रदेश में तरक्की की राह पर ले जाने के लिए सरकार द्वारा कराई गई इंन्वेस्टर समिट का हिस्सा भी बनी। यहीं ने उक्त जालसाज कंपनी ने सरकार से पंद्रह सौ करोड़ रूपए का एमओयू भी साइन किया। इस कंपनी ने प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आठ फाइव स्टार होटल बनाने की बात कही थी। बताया जा रहा है कि एमओयू साइ​न होने से पहले कंपनी के निदेशकों ने इस बात को पूरी तरह छिपाए रखा कि उनके खिलाफ ठगी के मामले में सीबीआई जांच चल रही है।

Fraud Company Signed 15 Hundred Crore Mou In Invester Summit :

इसमें सबसे खास बात ये रही कि एमओयू साइन होने के पहले लखनऊ डीएम और एसएसपी ने कंपनी का वेरिफिकेशन करके उसे क्लीन चिट भी दे दी थी। ये मामला उजागर होने के बाद पर्यटन मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि कंपनी द्वारा एमओयू करने या उसके खिलाफ केस दर्ज होने की मुझे कोई जानकारी नहीं है। उन्होने मामले की पड़ताल कराकर दोषी पाए जाने के पर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही है। पर्यटन मंत्री ने कहा कि ये भी पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि ये कंपनी ग्राउंड ब्रेकिंग कंपनी मे शामिल थी या नही।

बता दें कि विभूतिखण्ड के साइबर हाइट्स में संचालित इस कंपनी केसी इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के एमडी विजय मिश्रा और अन्य निदेशकों के खिलाफ आलमबाग के केनरा बैंक से 12.38 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। ये एफआईआर दिल्ली स्थित सीबीआई की इकोनोमिक आॅफेंस विंग ने 28 मार्च 2017 में दर्ज कराई थी।

बताया जा रहा है कि एमओयू साइ​न करने के दौरान केसी इंफ्रा ने सीबीआई में दर्ज मामले की जानकारी नहीं दी थी। वेरिफिकेशन रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख नहीं किया गया। जिसके चलते जांच करने वाले अधिकारियों ने कंपनी को क्लीनचिट दे दी। वहीं पर्यटन विभाग ने कई बार कंपनी को आठों होटलों की डीपीआर उपलब्ध कराने को कहा, लेकिन कंपनी ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। अब अधिकारियों का कहना है कि इस मामले को छिपाकर और एमओयू की शर्तों को पूरा नहीं करने पर उसे निरस्त भी किया जा सकता है।

लखनऊ। जिस कंपनी ने एक निजी बैंक से करोड़ों रूपए की ठगी की, उसी कंपनी ने उत्तर प्रदेश में तरक्की की राह पर ले जाने के लिए सरकार द्वारा कराई गई इंन्वेस्टर समिट का हिस्सा भी बनी। यहीं ने उक्त जालसाज कंपनी ने सरकार से पंद्रह सौ करोड़ रूपए का एमओयू भी साइन किया। इस कंपनी ने प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आठ फाइव स्टार होटल बनाने की बात कही थी। बताया जा रहा है कि एमओयू साइ​न होने से पहले कंपनी के निदेशकों ने इस बात को पूरी तरह छिपाए रखा कि उनके खिलाफ ठगी के मामले में सीबीआई जांच चल रही है। इसमें सबसे खास बात ये रही कि एमओयू साइन होने के पहले लखनऊ डीएम और एसएसपी ने कंपनी का वेरिफिकेशन करके उसे क्लीन चिट भी दे दी थी। ये मामला उजागर होने के बाद पर्यटन मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि कंपनी द्वारा एमओयू करने या उसके खिलाफ केस दर्ज होने की मुझे कोई जानकारी नहीं है। उन्होने मामले की पड़ताल कराकर दोषी पाए जाने के पर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही है। पर्यटन मंत्री ने कहा कि ये भी पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि ये कंपनी ग्राउंड ब्रेकिंग कंपनी मे शामिल थी या नही। बता दें कि विभूतिखण्ड के साइबर हाइट्स में संचालित इस कंपनी केसी इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के एमडी विजय मिश्रा और अन्य निदेशकों के खिलाफ आलमबाग के केनरा बैंक से 12.38 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। ये एफआईआर दिल्ली स्थित सीबीआई की इकोनोमिक आॅफेंस विंग ने 28 मार्च 2017 में दर्ज कराई थी। बताया जा रहा है कि एमओयू साइ​न करने के दौरान केसी इंफ्रा ने सीबीआई में दर्ज मामले की जानकारी नहीं दी थी। वेरिफिकेशन रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख नहीं किया गया। जिसके चलते जांच करने वाले अधिकारियों ने कंपनी को क्लीनचिट दे दी। वहीं पर्यटन विभाग ने कई बार कंपनी को आठों होटलों की डीपीआर उपलब्ध कराने को कहा, लेकिन कंपनी ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। अब अधिकारियों का कहना है कि इस मामले को छिपाकर और एमओयू की शर्तों को पूरा नहीं करने पर उसे निरस्त भी किया जा सकता है।