राफेल विवाद: फ्रांस के पूर्व PM की चिट्ठी को लेकर राहुल ने मोदी पर किया हमला

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नई दिल्ली। शुक्रवार को राफेल डील को लेकर एक बार फिर हंगामा मचा हुआ है। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि रक्षा मंत्रालय ने पीएमओ के सामने डील के समांतर चल रही एक प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। एक अखबार में छपे इस खबर के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर कहा है कि चौकीदार चोर है। संसद में कांग्रेस ने इस मामले में जेपीसी गठन करने की मांग की है।

French Pm Had Written Indian Govt Backing The Rafale Deal Obligations :

केन्द्र सरकार पर आरोप है कि उसने फ्रांस सरकार से बिना सॉवरेन गारंटी लिए ही इस डील को मंजूरी दे दी थी। हालांकि समाचार एजेंसी एएनआई ने एक पत्र जारी किया है। ये पत्र फ्रांस के तत्कालीन प्रधानमंत्री मैनुअल वॉल्स द्वारा 8 सितबंर 2016 को पीएम नरेंद्र मोदी को लिखा गया था। इस पत्र में फ्रांस के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने लिखा है कि उनकी सरकार भारत की फर्म द्वारा रखी गई शर्तों को पूर्ण रूप से मानने को बाध्य होगी।

क्या लिखा था पूर्व फ्रेंच पीएम ने

पूर्व फ्रेंच पीएम वाल्‍स की यह चिट्ठी हासिल हुई है। इस चिट्ठी में वाल्‍स ने लिखा है, ‘मैं इस बात की पुष्टि करता हूं कि फ्रांस की सरकार वह सबकुछ करने के लिए प्रतिबद्ध है जिससे डसॉल्ट एविएशन और फ्रांस एमबीडीए इंटर-गवर्नमेंट करार में किए अपने वादों पर खरी उतर सके।’ उन्होंने इस चिट्ठी में आगे लिखा, ‘दोनों सरकारों के बीच में बातचीत एक इंटर-गवर्नमेंट करार के द्वारा परिभाषित है।

ये दो सरकारों के बीच एक काम को करने के लिए आपसी फैसला है।’ यह चिट्ठी फ्रेंच पीएम की ओर डील फाइनल होने के बाद सितंबर 2016 में लिखी गई थी। इस चिट्ठी में वाल्‍स ने आगे लिखा था, ‘नेगोशिएटिंग टीम और दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच जो सहमति हुई है, फ्रांस की सरकार उसके लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।’ सितंबर 2016 में भारत ने फ्रांस के साथ 36 राफेल फाइटर जेट्स की डील की थी जिसकी कीमत 59,000 करोड़ रुपए है।

नई दिल्ली। शुक्रवार को राफेल डील को लेकर एक बार फिर हंगामा मचा हुआ है। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि रक्षा मंत्रालय ने पीएमओ के सामने डील के समांतर चल रही एक प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। एक अखबार में छपे इस खबर के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर कहा है कि चौकीदार चोर है। संसद में कांग्रेस ने इस मामले में जेपीसी गठन करने की मांग की है। केन्द्र सरकार पर आरोप है कि उसने फ्रांस सरकार से बिना सॉवरेन गारंटी लिए ही इस डील को मंजूरी दे दी थी। हालांकि समाचार एजेंसी एएनआई ने एक पत्र जारी किया है। ये पत्र फ्रांस के तत्कालीन प्रधानमंत्री मैनुअल वॉल्स द्वारा 8 सितबंर 2016 को पीएम नरेंद्र मोदी को लिखा गया था। इस पत्र में फ्रांस के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने लिखा है कि उनकी सरकार भारत की फर्म द्वारा रखी गई शर्तों को पूर्ण रूप से मानने को बाध्य होगी। क्या लिखा था पूर्व फ्रेंच पीएम ने पूर्व फ्रेंच पीएम वाल्‍स की यह चिट्ठी हासिल हुई है। इस चिट्ठी में वाल्‍स ने लिखा है, 'मैं इस बात की पुष्टि करता हूं कि फ्रांस की सरकार वह सबकुछ करने के लिए प्रतिबद्ध है जिससे डसॉल्ट एविएशन और फ्रांस एमबीडीए इंटर-गवर्नमेंट करार में किए अपने वादों पर खरी उतर सके।' उन्होंने इस चिट्ठी में आगे लिखा, 'दोनों सरकारों के बीच में बातचीत एक इंटर-गवर्नमेंट करार के द्वारा परिभाषित है। ये दो सरकारों के बीच एक काम को करने के लिए आपसी फैसला है।' यह चिट्ठी फ्रेंच पीएम की ओर डील फाइनल होने के बाद सितंबर 2016 में लिखी गई थी। इस चिट्ठी में वाल्‍स ने आगे लिखा था, 'नेगोशिएटिंग टीम और दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच जो सहमति हुई है, फ्रांस की सरकार उसके लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।' सितंबर 2016 में भारत ने फ्रांस के साथ 36 राफेल फाइटर जेट्स की डील की थी जिसकी कीमत 59,000 करोड़ रुपए है।