Friendship Day: कृष्ण-सुदामा और दुर्योधन-कर्ण जैसे दोस्त..जिसकी मिसाल देते हैं लोग

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Friendship Day: 'कृष्ण-सुदामा और दुर्योधन-कर्ण' ऐसे दोस्त, जिसकी मिसाल देते है लोग

लखनऊ। आज फ्रेंडशिप डे है यानी मित्रता दिवस। इस दिन याद आते हैं ऐसे दोस्त जिनकी दोस्ती की मिसाल रहती दुनिया तक लोग देंगे। किसी ने दोस्ती की खातिर जान दे दिया तो किसी ने अपने रंक दोस्त को राजा बना दिया।

Friendship Day Best Frends Krishna And Sudama Duryodhana And Karna :

दुर्योधन और कर्ण

महाभारत में दुर्योधन और कर्ण की मित्रता भी एक मिसाल है। कर्ण एक रथ चलाने वाले परिवार में पले बढ़े जिससे समाज में सूतपुत्र के रूप में इनकी पहचान थी। दुर्योधन ने कर्ण की प्रतिभा से प्रभावित होकर इन्हें अपना मित्र बना लिया और अंग देश का राजा घोषित कर दिया। कर्ण एक पल में सूतपुत्र से अंगराज कहलाने लगे। कर्ण ने भी दुर्योधन की मित्रता का सम्मान किया और मित्रता की खातिर महाभारत युद्ध में अपने प्राण न्योछावर कर दिए जबकि वह महाभारत युद्ध में पांडवों का साथ देकर पृथ्वी के सम्राट बन सकते थे।

कृष्ण और सुदामा की दोस्ती

दोस्ती की बात की जाए और भगवान कृष्ण और उनके दोस्त का नाम ना लिया जाए, ऐसा हो नहीं सकता। सुदामा कृष्ण के बचपन के मित्र थे। सुदामा निर्धन ब्राह्मण थे और भिक्षा मांगकर परिवार का भरण पोषण करते थे। पत्नी के आग्रह करने पर सुदामा अपने बचपन के सखा श्रीकृष्ण के दरबार में पहुचते हैं। श्रीकृष्ण को जब पता चलता है कि उनके मित्र सुदामा आए हैं तो वह नंगे पांव अपने मित्र को लेने दौड़ पड़ते हैं।

कृष्ण अपने मित्र सुदामा की दीन दशा देखकर रोने लगते हैं। कृष्ण सुदामा को अपने साथ महल में लाते हैं और पटरानियों के साथ सुदामा की सेवा करते हैं। सुदामा द्वारा भेंट में लाए हुए तीन मुट्ठी चावल द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण ऐसे खाते हैं जैसे वह अमृत हो। सुदामा जब कृष्ण से मिलकर वापस लौटते हैं तो अपनी झोपड़ी के स्थान पर द्वारकापुरी जैसा महल पाते हैं। श्रीकृष्ण ने बिना बताए ही गरीब मित्र सुदामा को रंक से राजा बना दिया।

लखनऊ। आज फ्रेंडशिप डे है यानी मित्रता दिवस। इस दिन याद आते हैं ऐसे दोस्त जिनकी दोस्ती की मिसाल रहती दुनिया तक लोग देंगे। किसी ने दोस्ती की खातिर जान दे दिया तो किसी ने अपने रंक दोस्त को राजा बना दिया। दुर्योधन और कर्ण महाभारत में दुर्योधन और कर्ण की मित्रता भी एक मिसाल है। कर्ण एक रथ चलाने वाले परिवार में पले बढ़े जिससे समाज में सूतपुत्र के रूप में इनकी पहचान थी। दुर्योधन ने कर्ण की प्रतिभा से प्रभावित होकर इन्हें अपना मित्र बना लिया और अंग देश का राजा घोषित कर दिया। कर्ण एक पल में सूतपुत्र से अंगराज कहलाने लगे। कर्ण ने भी दुर्योधन की मित्रता का सम्मान किया और मित्रता की खातिर महाभारत युद्ध में अपने प्राण न्योछावर कर दिए जबकि वह महाभारत युद्ध में पांडवों का साथ देकर पृथ्वी के सम्राट बन सकते थे। कृष्ण और सुदामा की दोस्ती दोस्ती की बात की जाए और भगवान कृष्ण और उनके दोस्त का नाम ना लिया जाए, ऐसा हो नहीं सकता। सुदामा कृष्ण के बचपन के मित्र थे। सुदामा निर्धन ब्राह्मण थे और भिक्षा मांगकर परिवार का भरण पोषण करते थे। पत्नी के आग्रह करने पर सुदामा अपने बचपन के सखा श्रीकृष्ण के दरबार में पहुचते हैं। श्रीकृष्ण को जब पता चलता है कि उनके मित्र सुदामा आए हैं तो वह नंगे पांव अपने मित्र को लेने दौड़ पड़ते हैं। कृष्ण अपने मित्र सुदामा की दीन दशा देखकर रोने लगते हैं। कृष्ण सुदामा को अपने साथ महल में लाते हैं और पटरानियों के साथ सुदामा की सेवा करते हैं। सुदामा द्वारा भेंट में लाए हुए तीन मुट्ठी चावल द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण ऐसे खाते हैं जैसे वह अमृत हो। सुदामा जब कृष्ण से मिलकर वापस लौटते हैं तो अपनी झोपड़ी के स्थान पर द्वारकापुरी जैसा महल पाते हैं। श्रीकृष्ण ने बिना बताए ही गरीब मित्र सुदामा को रंक से राजा बना दिया।