दो दिन बैंक की कतारों से जूझने के बाद युवती ने की सुसाइड

नई दिल्ली। नोटबंदी एक ओर लोगों के लिए कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ नई उम्मीद लेकर आई है तो दूसरी ओर इससे आम आदमी के सामने पैदा हुई नगदी की कमी ने लोगों की जीने की उम्मीद तक छीन ली है। ताजा मामला दिल्ली के खजूरी खास इलाकें का है। जहां नोटबंदी के बाद तीन दिनों बैंक की लाइन में लगकर नोट न बदल पाने के बाद अवसादग्रस्त युवती ने मंगलवार को फांसी के फंदे पर लटकर अपनी जीवन लीला को समाप्त कर लिया।




मिली जानकारी के मुताबिक मृतक युवती की पहचान उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ​के खानपुर निवासी 22 वर्षीय रिजवाना के तौर पर हुई है। रिजवाना अपने दो भाइयों के साथ दिल्ली के खजूरी इलाके में किराए के मकान में रहकर जरदोजी का काम किया करती थी। 8 नवंबर से 500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद से रिजवाना बैंकों की लाइन में लगने के बावजूद पुराने नोट बदलवाने में असफल रही थी।

स्थानीय लोगों की माने तो रिजवाना का शरीर बुधवार को उसके कमरे में फंसी के फंदे पर लटका मिला। पड़ोसियों से सूचना मिलने के बाद रिजवाना के जीजा को घटना की जानकारी देकर ​बुलाया गया। रिजवाना के जीजा का कहना है कि घर में केवल 500 और 1000 के नोट थे। दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया था। जिस वजह से रिजवाना के सामने खाने पीने तक की समस्या हो गई थी।




हालांकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि खुदकुशी के कारण स्पष्ट नहीं है। आत्महत्या के कारण संदिग्ध लग रहे हैं। किसी प्रकार का कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। ऐसे में आत्महत्या के कारणों का अंदाज लगाना गलत होगा। पुलिस तमाम पहलुओं पर जांच कर रही है, पोस्टमार्टम की रिपोर्ट व अन्य लोगों से पूछताछ करने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है।