पूनम की रात से जुड़ा ये राज बढ़ा रहा सड़क हादसे, बाइक चलाने वाले जरूर पढ़ें

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नई दिल्ली। एक साल 12 बार चांद अपने पूरे शबाब पर होता है, जिसकी दूधिया रोशनी हमें आकर्षित करती है। पूनम की रात से जुड़ा एक राज कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ टॉरंटो और अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के शोध में सामने आया है। शोध में कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बताया गया कि पूनम की रात में दोपहिया वाहनों से यात्रा करने वालों के हादसों के आंकड़े अन्य दिनों की अपेक्षा काफी ज्यादा थे। शोध में पता चला है कि पूनम की रात में बाइक से चलने वालों का ध्यान चांद की रोशनी में भटक जाता है, जिसकी वजह से हादसे होते हैं।

पूनम की रात में चांद पूरा निकलता है और इसकी रोशनी भी काफी आकर्षक होती है। जो लोगों को भ्रमित कर देती है। आंकड़ों पर गौर करें तो एक हजार 482 रातों में 13 हजार 29 लोग घातक बाइक हादसों का शिकार हुए। इनमें 494 रातें पूर्ण चंद्र वाली रातें थीं, जबकि 988 रातें सामान्य थीं। आमतौर पर बाइक चलाने वाला मध्यम उम्र का पुरुष (औसत उम्र 32 साल) होता है, जो हेलमेट नहीं पहनता।

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शोधकर्ताओं का मानना है कि पूरे चांद वाली रात में रौशनी ज्‍यादा होती है, जिससे बाइक चलाते हुए ध्‍यान भटकने की काफी संभावना रहती है। चांद रात की रौशनी और उसकी चमक दिन के उजाले से अलग होती है। इसकी तुलना सूरज की रौशनी से नहीं की जा सकती। बता दें कि हर साल इस वजह से करीब पांच हजार लोगों की मौत होती है। यानी हर सात सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में एक बाइक सवार होता है।

नई दिल्ली। एक साल 12 बार चांद अपने पूरे शबाब पर होता है, जिसकी दूधिया रोशनी हमें आकर्षित करती है। पूनम की रात से जुड़ा एक राज कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ टॉरंटो और अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के शोध में सामने आया है। शोध में कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बताया गया कि पूनम की रात में दोपहिया वाहनों से यात्रा करने वालों के हादसों के आंकड़े अन्य दिनों की अपेक्षा काफी ज्यादा थे। शोध में पता चला है…
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