‘गो संरक्षण’ से ही होगी ‘सांस्कृतिक मूल्यों’ की रक्षा: दयाशंकर पाण्डेय

'गो संरक्षण' से ही होगी 'सांस्कृतिक मूल्यों' की रक्षा: दयाशंकर पाण्डेय
'गो संरक्षण' से ही होगी 'सांस्कृतिक मूल्यों' की रक्षा: दयाशंकर पाण्डेय

Gau Sanrakshan Amethi Dayashankar Pandey

प्रतापगढ़: जिले के सगरा सुंदरपुर विकासखंड में रामलली गौ सेवा आश्रम के तत्वाधान में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें गौ-रक्षा क्यों और कैसे करें के मुद्दे चर्चा की गई मुख्य अतिथि के रुप में आए हुए आए विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री श्री खेमचंद ने कहा कि गाय को मां का दर्जा मिला है इसलिए गौ रक्षा को संरक्षण देना हम सब सभी का दायित्व है। विशिष्ट अतिथि रिटायर्ड आईएएस अधिकारी व गौ सेवा आयोग के प्रांतीय अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने गाय के संरक्षण से होने वाले ‘आर्थिक महत्व’ पर विस्तार से प्रकाश डाला। वही रामलली गौसेवा आश्रम के उपाध्यक्ष दयाशंकर पाण्डेय ने गौसेवा,संरक्षण,संवर्द्धन सहित आर्थिक,वैज्ञानिक व आधात्मिक आधार पर गहराई से प्रकाश डाला।

ईश्वरीय देन है गोमाता-

गाय मनुष्य के लिए एक बहुमूल्य ईश्वरीय देन है। गाय धरती पर सर्वोत्तम तथा लाभप्रद भोजन उपलब्ध कराती है। वह घास तथा सूखे खुरदरे पत्तों से अत्यन्त बलवर्द्धक स्वास्थ्यवर्द्धक भोजन (दूध) तैयार करती है वह (गाय) दूध न केवल अपने बच्चों तथा पालकों के लिए प्रत्युत अवशिष्ट दूध बिक्री के लिए प्रदान करती है। जहां गऊ की रक्षा तथा पालन भली प्रकार किया जाता है वहां संस्कृति विकसित होती है, भूमि उपजाऊ होती है घरों में समृद्धि होती है तथा सिर पर ऋण नहीं चढ़ता।

संस्कृति की जननी है गोमाता-

गऊ समृद्धि और सम्पन्नता की जननी वा माता है प्राचीन काल के हिन्दू दूध मक्खन का प्रचुर प्रयोग किया करते थे इसलिए वे शारीरिक दृष्टि से बलिष्ठ थे उनके मस्तिष्क बहुत उर्वरा थे। सहनशक्ति आश्चर्यजनक थी उन्होंने संस्कृत सरीखी पूर्ण, उत्कृष्ट तथा व्यापक समृद्ध भाषा को जन्म दिया पीढ़ी दर पीढ़ी (गुरु शिष्य परम्परा से) वेदों को कण्ठाग्र करना तथा इतने विस्तृत ज्ञान, साहित्य तथा अध्यात्मवाद का प्रसार केवल गऊ–दुग्ध के भोजन से ही सम्भव हो पाया।

जननी माता के समान हो पालन व रक्षण-

भारत को गाय के रूप में सर्वोत्तम देन दी है इसलिए यहां के राजे-महाराजे, ऋषि-मुनि, जनसाधारण सब गऊ का सम्मान व पालन करते चले आये हैं तथा घर में गाय का रखना अपना धर्म समझते थे। इसके साथ वह अपने घरों को समृद्ध, स्वस्थ तथा सम्पदा से भरपूर रखते थे ‘ कृतघ्नता महापाप है कृतघ्न मनुष्य, मनुष्यता का सबसे बड़ा शत्रु, दूषण और कलंक होता है गाय अघ्न्या व अवध्य है और गोमांस अभक्ष्य पदार्थ है हमारी जन्मदात्री माता और गो माता दोनों ही हमारा पालन व पोषण करती हैं दोनों ही हमारे लिए पूज्य व सत्करणीय देवता हैं हमें कर्तव्य को जानकर गोमाता का भी अपनी जननी माता के समान पालन व रक्षण करना चाहिये।

आयोजित हुई संगोष्टी के इस मौके पर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह, डॉ राजेंद्र पांडे प्रतिभा पांडे, बृजकिशोर मिश्र, संजय पांडे, रामजी जायसवाल, राम भवन पाण्डेय, अंकित शुक्ल, राजीव तिवारी, शिवम द्विवेदी, नानबाबू श्याम जी जायसवाल, श्याम बिहारी पांडेय आदि मौजूद रहे।

रिपोर्ट-राम मिश्रा

प्रतापगढ़: जिले के सगरा सुंदरपुर विकासखंड में रामलली गौ सेवा आश्रम के तत्वाधान में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें गौ-रक्षा क्यों और कैसे करें के मुद्दे चर्चा की गई मुख्य अतिथि के रुप में आए हुए आए विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री श्री खेमचंद ने कहा कि गाय को मां का दर्जा मिला है इसलिए गौ रक्षा को संरक्षण देना हम सब सभी का दायित्व है। विशिष्ट अतिथि रिटायर्ड आईएएस अधिकारी व गौ सेवा आयोग के प्रांतीय…