पूर्व सैनिक की सुसाइड पर जनरल वीके सिंह का तीखा वार, पढ़िए

नई दिल्ली। वन रैंक वन पेंशन (OROP) का मुद्दा पिछले तीन दिनों में एकबार फिर सियासी सरगर्मी बढ़ाता नजर आ रहा है। बुधवार को पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल की सुसाइड के बाद से इस मुद्दे पर कांग्रेस और दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी पूरी तरह से नरेन्द्र मोदी सरकार पर हमलावर है। इस बीच मोदी सरकार के केन्द्रीय राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह ने विरोधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।




उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट लिखकर विरोधियों को ही संदेह के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर विरोधियों पर आरोप लगाया है कि पूर्व सैनिक की सुसाइड के पीछे राजनीतिक हित साधने की मंशा की जांच करवाई जा रही है। उन्होंने कहा है कि वह स्वयं एक सैनिक रहे हैं इसलिए समझ सकते हैं कि किस तरह से राम किशन की भावनाओं को उत्तेजित कर उसे सुसाइड के लिए उकसाया गया है।




पढ़िए क्या लिखा है जनरल वीके सिंह ने

सदा एक सैनिक की मृत्यु गोली से नहीं होती | कभी कभी उसका गौरव उसकी मृत्यु का कारण बनता है |
निश्चिन्त रहिये, राम किशन ग्रेवाल की “आत्महत्या” की जाँच होगी |
तथ्य सामने आ रहे हैं की वे कुछ समय से कुछ “प्रतिष्ठित नेताओं” के संपर्क में चल रहे थे | मुझे ज्ञात है कि एक सैनिक कैसे सोचता है और इसीलिए मैं विक्षुब्ध हो उठा जब मेरे सूत्रों ने मुझे बताया कि OROP को लेकर किस प्रकार एक विषैली कहानी बनायी गयी और उन्हें उकसाया गया कि उनके पास यही एक अंतिम रास्ता बचा है इस बारे में कुछ कर पाने का | सेना के प्रति उनका गौरव ही उनके और उनके परिवार के विरुद्ध एक घातक अस्त्र बना दिया गया |
दो प्रश्न हैं जिनसे सबको चिंतित होना चाहिए |
1. क्या राजनैतिक गिद्धों की भूख इतनी बढ़ चुकी है कि उन्होंने अब शिकार भी करना शुरू कर दिया?
2. यदि ये नेता राम किशन ग्रेवाल को शहीद मान कर उनके परिवार वालों को नौकरी के साथ 1 करोड़ रुपये दे रहे हैं, तो क्या वो सैनिकों में आत्महत्या को बढ़ावा नहीं दे रहे?
क्या आप इस तरह की ओछी राजनीति का पर्दाफाश करने में मेरे साथ हैं?