रंग लाई पीएम मोदी की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ मुहिम, देश में लड़कियों की औसत जन्म दर बढ़ी

नई दिल्ली| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ मुहिम रंग लाने लगी है| पिछले 65 वर्षों में भारतीय जनसंख्या में लिंग अनुपात जहां लगातार कम ही हुआ था वहीँ हाल ही में देश की सेहत का जो रिपोर्ट कार्ड सामने आया है उसे देखकर आपको भी ख़ुशी होगी| दरअसल ऐसा पहली बार हुआ है जब देश में जन्म ले रही लड़कियों का औसत बढ़ा है| नौ साल पहले जहां प्रत्येक हजार लड़कों के मुकाबले 914 लडकियां पैदा हो रही थीं वहीँ अब ये आंकड़ा बढ़कर 919 हो गया है| इसी तरह प्रत्येक हजार प्रसव में अब 41 बच्चे एक साल के अंदर तम तोड़ रहे हैं| नौ साल पहले शिशु मृत्यु दर 57 थी| राष्ट्रीय स्वास्थ्य सचिव सीके मिश्र ने ‘राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों को उत्साहजनक बताया है|




गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों हरियाणा के पानीपत जिले में जनसंख्या में लिंग अनुपात के कम होने पर चिंता जताते हुए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना की शुएउआत की थी| मोदी ने कहा था कि जो मां-बाप बेटे की चाह में बेटियों को मार रहे हैं, उन्हें यह सोचना चाहिए कि बेटियां रहेंगी ही नहीं तो बहुएं कहां से आएंगी, क्योंकि प्रति लड़कों पर जितनी बेटियां कम होंगी, उतने लड़कों की शादी नहीं होगी|




मोदी ने कहा था, “आज हम 21वीं सदी में जी रहे हैं| आज कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां लड़कियों ने कामयाबी के झंडे न गाड़े हों| कई क्षेत्रों में तो वे लड़कों से भी आगे हैं, फिर लड़कियों को पैदा करने और उनकी लड़कों के बराबर परवरिश देने में भेदभाव क्यों होता है? दरअसल, इसकी वजह पारंपरिक सोच है कि बेटा वंश चलाएगा, बुढ़ापे का सहारा बनेगा, जबकि बेटी को तो शादी के बाद दूसरे के घर जाना है|” मोदी ने कहा, “आज जो लोग भी ऐसा सोच रहे हैं, वे भारी भ्रम में हैं| यदि बेटे सहारा बनते तो देश में वृद्धा आश्रमों में बढ़ोतरी नहीं होती| आज से ही लड़कियों को सुरक्षित जन्म, समुचित शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और समाज में बराबरी का दर्जा देने का संकल्प लें|”