35 रुपए के लिए दो साल तक लड़ा मुकदमा, मिली जीत

कानपुर| कानपुर की एक महिला वकील ने पैंतीस रूपये की बेईमानी के लिये दो साल तक मुकदमा लड़ा और अपनी हक की लड़ाई जीत कर ही दम लिया। उसकी स्कूटी का इंजन आॅयल बदलने के लिये सर्विस सेण्टर वालों ने उससे एमआरपी से पैंतीस रूपये अधिक वसूले थे। पीड़ित का आरोप था कि सेंटर पर अकेली महिला होने के कारण उससे जबरन वसूली की गयी थी।




बात अगर उपभोक्ता हित की हो तो पैंतीस रूपये जैसी छोटी की रकम भी बड़ा मायने रखती है। यह बात साबित कर दिखायी है कानपुर में शारदा नगर की रहने वाली ममता चतुर्वेदी ने। मामले की शुरूआत 21 जून 2014 से होती है जब ममता अपने दुपहिया वाहन को सर्विस के लिये कम्पनी के अधिकृत सर्विस स्टेशन तिरूपति मोटर्स ले गयी थीं। वहां उनकी गाड़ी का इंजन आॅयल बदला गया और इसके लिये उन्हें 250 रूपये का बिल थमाया गया। ममता ने आॅयल के डिब्बे पर 215 रूपये एमआरपी अंकित होने की बात कही तो उनके साथ कर्मचारियों ने अभद्रता की। सर्विस सेण्टर पर अकेली महिला होने के कारण भयवश उन्होने चुपचाप पैंतीस रूपये अधिक की यह रकम अदा कर दी।

ममता ने बाद में इस घटना के बारे में अपनी सीनियर एडवोकेट को बताया तो उन्होने जिला उपभोक्ता फोरम में मुकदमा दर्ज कराने की सलाह दी। दो साल तक तारीख पर तारीख पड़ती रहीं लेकिन तिरूपति मोटर्स की तरफ से अदालत के समक्ष कोई उपस्थित नहीं हुआ तो फोरम ने एकपक्षीय फैसला सुनाते हुए उन्हें वादिनी को पैंतीस रूपये दस प्रतिशत सालाना ब्याज समेत वापस करने और जुर्माने के पांच हजार भी अदा करने का आदेश जारी किया। इस घटना ने साबित कर दिया है कि अगर किसी महिला को अकेला पाकर उसका आर्थिक उत्पीड़न कर लिया जाए तो भी उपभोक्ता कानून उसके हितों का संरक्षण करने के लिये मौजूद है।



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