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रिवर फ्रंट घोटाला: यादव परिवार के करीबी तीन इंजीनियरों की संपत्तियां जब्त, सफेदपोश भी रडार पर

Gomti River Front Scam Three Engineers Seized Properties Near Shivpal Yadav

By शिव मौर्या 
Updated Date

लखनऊ। सपा सरकार के कार्यकाल में हुए गोमती रिवर फ्रंट घोटले में ईडी ने कार्रवाई शुरू कर दी है। पहली कार्रवाई पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव के करीबी समेत तीन इंजीनियरों पर हुई है। ईडी ने आरोपित तीनों इंजीनियरों की लखनऊ, नोएडा और गाजियाबाद स्थित एक करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कर ली हैं। पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव के करीबी और सिंचाई विभाग के रिटायर अधीक्षण अभियंता रूप सिंह यादव पर कार्रवाई के बाद कई सफेदपोश भी रडार पर हैं।

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सूत्रों की माने तो, रिवर फ्रंट घोटाले में इंजीनियरों के साथ यादव परिवार भी रडार पर है। इसके साथ ही कई सफेदपोश लोगों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। पुख्ता सुबूत जुटाने के बाद ईडी पूर्ववर्ती सपा सरकार में उच्चे ओहदे पर बैठे लोगों पर कार्रवाई कर सकती है। वहीं, ईडी के मुताबिक, पहली बार रिश्वत लेने के साक्ष्य कड़ी दर कड़ी स्थापति हुए हैं। इससे घोटालेबाजों को सजा दिलाने में काफी मदद मिलेगी।

ईडी ने गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में वर्ष 2018 में मनी लाॅन्ड्रिंग में मनी लाॅन्ड्रिंग एक्ट के तहत लखनऊ में केस दर्ज किया था। इसके लिए ईडी ने सिंचाई विभाग द्वारा गोमतीनगर थाने में दर्ज कराई गई मुकदमें को आधार बनाया था। केस दर्ज करने के बाद 24 जनवरी 2019 को ईडी ने लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा, राजस्थान के भिवांडी व हरियाणा के फरीदाबाद समेत आरोपित इंजीनियर और ठेकेदारों के नौ ठीकानों पर छापेमारी की। ईडी के मुताबिक, छापेमारी के दौरान तत्कालीन मुख्य अभियंता एसएन शर्मा, तत्कालीन आधीक्षण अभियंता रूप सिहं यादव और अनिल यादव के घर से ठेकेदारों से रिश्वत लेने से जुड़े अहम साक्ष्य व दस्तावेज मिले थे।

ठेकेदारों को किया गया तय लागत से ज्यादा का भुगतान
ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि, गोमती रिवर फ्रंट के निर्माण में ठेकेदारों को तय लागत से ज्यादा का भुगतान किया गया। ठेकेदारों के जरिए ही इंजीनियरों को कमिश्न पहुंचाया गया। कई ऐसे ठेकेदारों को भी टेंडर दिया गया जो सिचाई विभाग में रजिस्टर नहीं थे। हालांकि, टेंडर के आखिरी दिन उन कंपनियों को सिचाईं विभाग में रजिस्टर करवाया गया।

काम से पूर्व ठेकेदारों को एडवांस के नाम पर किया भुगतान
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि, रिवर फ्रंट घोटाले में ठेकेदारों को काम शुरू करने से पहले ही एडवांस के नाम पर भुगतान भी कर दिया गया था। काम मिलने के बाद ठेकेदारों ने इस रकम से इंजीनियरों को कैश व उनके रिश्तेदारों के बैंक खाते में पैसे भेजे गये। रिश्वत की रकम से एसएन शर्मा द्वारा गाजियाबाद में खरीदा गया फ्लैट, रूप सिंह यादव द्वारा नोएडा के जेवर में खरीदा गया प्लाॅट और अनिल यादव द्वारा लखनऊ के आदिलनगर समेत दूसरे इलाकों में खरीदे गए तीन प्लाॅट अटैच किये गये हैं।

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सरकार बनते ही सीएम योगी ने दिये थे जांच के आदेश
प्रदेश में सरकार बनते ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने रिवर फ्रंट घोटाले की जांच के आदेश दिये थे। जांच के लिए न्यायिक कमिटी का गठन हुआ। इस कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर शारदा कैनाल के लखनऊ खंड के एक्जिक्यूटिव इंजीनियर डाॅ अंबुज द्विवेद्वी ने सबसे पहले 19 जनू को गोमतीनगर थाने में सिंचाई विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके साथी ही प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने जुलाई 2017 में गोमती रिवर फ्रंट घोटाले की सीबीआई जांच की सिफारिश की। सीबीआई ने 30 नंबर 2017 को केस दर्ज किया था।

ये हुईं गड़बड़ियां
– डायाफ्राॅम वाॅल की ऊंचाई 14 मी. से बढ़ाकर 16.5 मी. और बाद में 18 मी. कर दी गई।
– कई कंपनियों को टेंडर की तारीख निकल जाने के बाद टेंडर दे दिए गए। उनसे सेंटेज चार्ज भी लिया गया।
– निर्माण से जुड़े फंड को बिना किसी आदेश के दूसरे जगह डायवर्ट कर दिया गया।

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