चिपको आंदोलन की 45वीं वर्षगांठ पर गूगल ने बनाया डूडल

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चिपको आंदोलन की 45वीं वर्षगांठ पर गूगल ने बनाया डूडल
नई दिल्ली। उत्तराखंड के चमोली जिले में 1973 के दौरान पेड़ों और जंगलों की कटाई से रक्षा के लिए शुरू किए गये चिपको आंदोलन की आज 45वीं वर्षगांठ है। गूगल ने सोमवार को इस अवसर पर डूडल के जरिए इसे याद किया। गूगल के आज डूडल में महिलाओं के द्वारा पेड़ों की रक्षा करते हुए चिपको आंदोलन का एक दृश्य दिखाया है। चिपको आंदोलन की शुरुआत गौरा देवी ने की थीं जिन्हे 'चिपको विमन' के नाम से भी जाना जाता…

नई दिल्ली। उत्तराखंड के चमोली जिले में 1973 के दौरान पेड़ों और जंगलों की कटाई से रक्षा के लिए शुरू किए गये चिपको आंदोलन की आज 45वीं वर्षगांठ है। गूगल ने सोमवार को इस अवसर पर डूडल के जरिए इसे याद किया। गूगल के आज डूडल में महिलाओं के द्वारा पेड़ों की रक्षा करते हुए चिपको आंदोलन का एक दृश्य दिखाया है। चिपको आंदोलन की शुरुआत गौरा देवी ने की थीं जिन्हे ‘चिपको विमन’ के नाम से भी जाना जाता हैं।

चिपको आदोलन की कब हुई शुरुआत

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चिपको आंदोलन की शुरुआत पर्यावरण को बचाने से हुई थी। 26 मार्च, 1974 को पेड़ों की कटाई रोकने के लिए ‘चिपको आंदोलन’ की शुरूआत की गयी। आंदोलन शुरू होने से पहले जब उत्तराखंड के रैंणी गांव के जंगल के लगभग ढाई हजार पेड़ों को काटने की नीलामी हुई, तो गौरा देवी नाम की महिला ने अन्य महिलाओं के साथ पेड़ों की नीलामी का विरोध किया लेकिन इसके बावजूद सरकार और ठेकेदार के निर्णय में कोई बदलाव नहीं आया। जब ठेकेदार के आदमी पेड़ काटने पहुंचे, तो गौरा देवी और उनके 21 साथियों ने उन लोगों को समझाने की कोशिश की। काफी समझाने के बाद भी वो लोग नहीं सुन रहे थे और जैसे ही पेड़ काटने के लिए आगे बढ़े तभी वहाँ मौजूद महिलाओं ने पेड़ों से चिपक कर उन्हें ललकारा कि पहले हमें काटो फिर इन पेड़ों को भी काट लेना।

महिलाओं के विरोध के आगे ठेकेदार को झुकना पड़ा। बाद में स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों के सामने इन महिलाओं ने अपनी बात रखी। जिसके बाद रैंणी गांव का जंगल नहीं काटा गया। उसी दिन से ‘चिपको आंदोलन’ की शुरुआत हुई।

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